खबर
Top News

प्रजा में बदलते हुए नागरिक और लंबी कैद में सोनम वांगचुक

Khulasa First

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 फ़रवरी 2026, 3:14 pm
शेयर करें:
प्रजा में बदलते हुए नागरिक और लंबी कैद में सोनम वांगचुक

आलोक बाजपेयी स्वतंत्र पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अभियन्ता, नवाचारी और शिक्षा सुधारक के साथ सामाजिक-पर्यावरणीय कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। वे वर्तमान में जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनकी हिरासत को लगभग 150 दिन (5 महीने) हो चुके हैं।

हाल ही में, 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई, जहां अदालत ने सरकार से उनके भाषणों की मूल रिकॉर्डिंग और सटीक अनुवाद पेश करने को कहा है। वांगचुक की लम्बी कैद को केवल एक कानूनी प्रकरण मानकर अनदेखा कर देना आसान है।

किंतु ऐसे मामलों में सवाल व्यक्ति का नहीं, लोकतंत्र की संवेदनशीलता का होता है। लोकतंत्र में सत्ता और असहमति के बीच तनाव स्वाभाविक है, पर जब असहमति के स्वर लंबे समय तक कारावास में बंद किए जाने लगें, तो वह लोकतान्त्रिक व्यवस्था के स्वास्थ्य पर प्रश्नचिह्न लगा देता है।

यह केवल एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न नहीं है; यह भारतीय लोकतंत्र की संवेदनशीलता, सहिष्णुता और संवाद हेतु उपलब्धता की कसौटी भी है। भारतीय जनमानस के लिए भी यह क्षण आत्ममंथन का है कि क्या हम असहमति को देशद्रोह, आलोचना को विद्रोह और चेतावनी को अपराध समझने लगे हैं?

वांगचुक पर्यावरण, शिक्षा और सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक प्रश्नों पर राज्य का ध्यान खींचने का प्रयास करते रहे हैं। लद्दाख जैसे भूगोल और संस्कृति की दृष्टि से विशिष्ट क्षेत्र में उनकी भूमिका केवल एक कार्यकर्ता की नहीं, बल्कि स्थानीय समाज और केंद्र के बीच संवाद सेतु की रही है।

ऐसे में उनकी लंबी कैद का प्रश्न केवल कानून व्यवस्था का नहीं रह जाता; वह सत्ता और समाज के संबंधों के स्वरूप पर बहस छेड़ता है। उनकी लम्बी कैद से कुछ सवाल उठते हैं या उठने चाहिए, जिनके जवाब लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमें ढूंढने होंगे ।

पहला सवाल है लोकतंत्र में असहमति के अधिकार का - एक ऐसे व्यक्ति को, जिसने शिक्षा, सामुदायिक विकास और लद्दाख के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया हो, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त कर देश का नाम रौशन किया हो, जिसने गलवान में देशभक्ति दिखाई, हिमालय की पर्यावरण रक्षा के लिए अनशन किए, और लाखों भारतीयों को प्रेरित किया, उसे प्रिवेंटिव डिटेंशन एनएसए जैसे सख्त कानून के तहत इतने लंबे समय तक बंद रखना सही संदेश नहीं देता।

असहमति अपराध नहीं है। अगर कोई शांतिपूर्ण तरीके से राज्य से मांग कर रहा है, तो उसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार देकर जेल में डालना लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करता है। संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार इसलिए नहीं दिया कि नागरिक केवल सत्ता की प्रशंसा करें, बल्कि इसलिए कि वे सत्ता से सवाल भी कर सकें।

सोनम वांगचुक जैसे व्यक्तियों की भूमिका सत्ता का विरोध करने की नहीं, बल्कि समाज को आगाह करने की रही है-चाहे वह लद्दाख के पर्यावरण, शिक्षा सुधार या स्थानीय स्वायत्तता का प्रश्न हो। यदि ऐसे स्वरों को लंबी कैद में डाल दिया जाए, तो समाज में डर और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण बनता है। यह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि नागरिक चेतना को कारावास में डालने जैसा है।

दूसरा मुद्दा है एनएसए का दुरुपयोग रोकने की जरूरत का। एनएसए प्रिवेंटिव डिटेंशन के लिए है, पर इसका इस्तेमाल राजनीतिक असहमति दबाने के लिए बार-बार हो रहा है। यह एक खतरनाक ट्रेंड है। एनएसए जैसे असाधारण कानून का इस्तेमाल असाधारण परिस्थितियों में ही होना चाहिए। अगर हर असहमति को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ मान लिया जाए, तो अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र दोनों खतरे में पड़ जाएंगे ।

तीसरा मुद्दा है लद्दाख की अनसुनी मूल मांगों का। छठी अनुसूची, राज्य का दर्जा, नौकरियों में स्थानीयों को प्राथमिकता-ये मांगें क्षेत्र की सुरक्षा, संस्कृति और आजीविका से जुड़ी हैं। वांगचुक की यात्रा मौजूदा शिक्षा प्रणाली के प्रति निराशा के साथ शुरू हुई, जो उन्हें लगा कि यह लद्दाखी छात्रों की जरूरतों को पूरा नहीं करती है।

1988 में, अन्य संबंधित छात्रों के साथ, उन्होंने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ़ लद्दाख की स्थापना की जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में सुधार करना और शिक्षा को लद्दाखी संदर्भ में व्यावहारिक और अधिक प्रासंगिक बनाना था। ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बढ़ते जल संकट को पहचानते हुए, वांगचुक ने सरल ‘आइस स्तूप’ तकनीक विकसित की।

बर्फ के स्तूप ने पानी की कमी के कम लागत वाले समाधान के रूप में अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा अर्जित की है। वांगचुक 6 मार्च 2024 से 26 मार्च 2024 तक लेह में भूख हड़ताल पर थे। उनकी मुख्य मांगें थीं लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा दिया जाए, जो आदिवासी क्षेत्रों को विशेष अधिकार और सुरक्षा प्रदान करता है।

लद्दाख को एक ‘पर्यावरण संरक्षित क्षेत्र’ घोषित किया जाए। लद्दाख के युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो और लद्दाख की अनूठी संस्कृति और भाषा को संरक्षित किया जाए।जेल की सलाखों के पीछे सोनम वांगचुक को रखकर समस्या हल नहीं होती। लद्दाख के लोगों की भावनाओं को संबोधित करना चाहिए, न कि उन्हें दबाया जाना चाहिए, ख़ासकर तब जब लद्दाख सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य हो।

चौथा प्रश्न है स्वास्थ्य और मानवीयता का। सुप्रीम कोर्ट ने खुद उनकी सेहत पर चिंता जताई है। एक पचास वर्ष से अधिक उम्र के कुछ क्रॉनिक बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति, जो पहले से अनशन कर चुका है, जिसे जेल के दूषित पानी और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य में गिरावट के चलते जोधपुर एम्स में भी भर्ती करना पड़ा, को क्या इतनी लम्बी निवारक हिरासत की जरूरत है? क्या यह मानवीयता के खिलाफ नहीं है?

शांतिपूर्ण संवाद और सकारात्मक समाधान का आह्वान- सोनम वांगचुक ने हमेशा शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन किया है। गांधीवादी मार्ग पर चले वांगचुक का आंदोलन अनशन और लेह से दिल्ली तक शांतिपूर्ण मार्च पर आधारित रहा है। क्या अहिंसक विरोध प्रदर्शन करने वाले व्यक्ति पर एनएसए जैसे कड़े कानून लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है? वे केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित नवाचारी और पर्यावरणविद हैं।

जलवायु सैनिक के रूप में लद्दाख के ग्लेशियरों और वहां की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाने की उनकी मांग पूरे देश ख़ासकर हिमालय के भविष्य से जुड़ी है। उनके जेल में होने का मतलब है कि लद्दाख की पारिस्थितिक सुरक्षा की आवाज़ को कमजोर करना। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से स्पष्टता मांगी है कि क्या उनकी हिरासत के लिए पर्याप्त आधार हैं? पुरानी कहावत है कि न्याय में देरी न्याय से वंचित करने जैसा है। सोनम वांगचुक का संघर्ष केवल लद्दाख के लिए नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रकृति के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की लड़ाई है।

एक प्रबुद्ध समाज को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास की दौड़ में हम अपने पर्यावरण के रक्षकों को सलाखों के पीछे न खो दें। भारतीय जनमानस के लिए यह समय है कि वह अभिव्यक्ति, संवाद और सहिष्णुता के पक्ष में स्पष्ट और विवेकपूर्ण रुख अपनाए क्योंकि लोकतंत्र अंततः संस्थाओं से नहीं, नागरिक चेतना से जीवित रहता है। केंद्र सरकार को सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा कर सरकार को अपनी भूलसुधार करनी चाहिए । लद्दाख के साथ संवाद की मेज पर बैठना अभी भी संभव है। यही देश की एकता और गरिमा के लिए श्रेष्ठ होगा। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा अर्थशास्त्र के शोधार्थी हैं) (ये लेखक के निजी विचार है)

संबंधित समाचार

सांची प्लांट में पेड़ा बनाते समय हादसा
Top News

सांची प्लांट में पेड़ा बनाते समय हादसा:गैस ज्यादा होने से कड़ाही फटने की सूचना; एक की मौत की भी खबर

about 9 hours ago
धीमी रफ्तार के बावजूद लापरवाह ठेकेदारों पर सीधी कार्रवाई से क्यों कतरा रहा नगर निगम
Top News

धीमी रफ्तार के बावजूद लापरवाह ठेकेदारों पर सीधी कार्रवाई से क्यों कतरा रहा नगर निगम:अमृत 2.0 और नर्मदा चतुर्थ चरण में लेटलतीफी पर फिर चेतावनी की खानापूर्ति

about 9 hours ago
5 साल तक अटकी रही साइकिल योजना की जांच
Top News

5 साल तक अटकी रही साइकिल योजना की जांच:हाईकोर्ट ने EOW के DG को तलब किया; 60 दिन में जांच पूरी करने के निर्देश

about 10 hours ago
‘खुलासा फर्स्ट’ में समाचार प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया निगम प्रशासन
Top News

‘खुलासा फर्स्ट’ में समाचार प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया निगम प्रशासन:रोड पर जानलेवा बन गए पेवर ब्लॉक उखाड़े; बारिश के बाद बनेगी सड़क

about 10 hours ago
श्रीनाथ रेस्टोरेंट में परोसा जा रहा कीड़े वाला अचार
Top News

श्रीनाथ रेस्टोरेंट में परोसा जा रहा कीड़े वाला अचार:विरोध करने पर ग्राहक से की अभद्रता

about 10 hours ago
देखिए वीडियो
Top News

देखिए वीडियो:मोदी-पुतिन गले मिले; रूस के प्रधानमंत्री को दिया ‘तिरुक्कुरल’, एक कार से एग्जिबिशन पहुंचे

about 10 hours ago
बड़ा गणपति रोड पर जर्जर मकान को किया जमींदोज
Top News

बड़ा गणपति रोड पर जर्जर मकान को किया जमींदोज:एमजी रोड के मकान पर चला बुलडोजर; निगम व पुलिस बल ने पोकलेन से हटाया

about 10 hours ago
वांटेड आरोपी ने बताया शराब बनाने का फाॅर्मूला
Top News

वांटेड आरोपी ने बताया शराब बनाने का फाॅर्मूला:लाइसेंसी ठेकेदार भेजता था अवैध सामग्र;, ठेके की आड़ में बेची नकली जहरीली शराब

about 10 hours ago
चंदू की निशानदेही पर जमीन से मिली 26 पेटी शराब
Top News

चंदू की निशानदेही पर जमीन से मिली 26 पेटी शराब:जहरीली शराब कांड में बड़ा खुलासा; अब पूरे नेटवर्क की तलाश

about 10 hours ago
देखिए वीडियो
Top News

देखिए वीडियो:सीएम डॉ. मोहन यादव का बड़ा ऐलान; MP में बनेंगे इतने नए एक्सप्रेस-वे

about 10 hours ago
बिना बैच नंबर का एक्सपायरी और एमआरपी के बेचा जा रहा खाद्य तेल
Top News

बिना बैच नंबर का एक्सपायरी और एमआरपी के बेचा जा रहा खाद्य तेल:सुविधि नगर स्थित एमएफ उद्योग की दुकान पर ग्राहक ने पकड़ा बिना मानक मापदंड का माल

about 10 hours ago
कहीं सीलिंग की सख्ती तो कहीं ‘धृतराष्ट्र' बना निगम
Top News

कहीं सीलिंग की सख्ती तो कहीं ‘धृतराष्ट्र' बना निगम:खुलासा पड़ताल; पांच बड़े इलाकों में बेसमेंट सील

about 10 hours ago
मंदिर पर सियासत तेज
Top News

मंदिर पर सियासत तेज:BJP विधायक बोले- सड़क पर्याप्त चौड़ी; राजसी सवारी में भी नहीं हुई दिक्कत; मंदिर हटाने का कारण नहीं

about 10 hours ago
देखिए वीडियो
Top News

देखिए वीडियो:पत्थरों की बरसात; सैकड़ों घायल, 22 एंबुलेंस दौड़ीं; विधायक भी मैदान में उतरे; 4 की हालत गंभीर, ड्रोन-CCTV से निगरानी, जवान तैनात

about 11 hours ago
बुल्डोजर अब तक हिला नहीं पाया
Top News

बुल्डोजर अब तक हिला नहीं पाया:भक्तों की भीड़ जुटी

about 11 hours ago
मध्य प्रदेश में बनेंगे 4200 मेगावाट के दो परमाणु संयंत्र
Top News

मध्य प्रदेश में बनेंगे 4200 मेगावाट के दो परमाणु संयंत्र:देश का प्रमुख न्यूक्लियर पावर सेंटर बनने की तैयारी

about 11 hours ago
75 जवानों ने जंगल में 4 खेत घेरकर पकड़ी गांजे की खेती
Top News

75 जवानों ने जंगल में 4 खेत घेरकर पकड़ी गांजे की खेती:हजारों पौधे जब्त; क्विंटलों फसल की कीमत लाखों में

about 11 hours ago
हनुमान अंश’ फिल्म आस्था, संस्कृति और भक्ति की शक्ति का देती है संदेश
Top News

हनुमान अंश’ फिल्म आस्था, संस्कृति और भक्ति की शक्ति का देती है संदेश:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देखी हनुमान अंश फीचर फिल्म, कहा

about 11 hours ago
टीम को चकमा देकर नाबालिग की शादी
Top News

टीम को चकमा देकर नाबालिग की शादी:प्रशासन के लौटते ही उसी शाम करा दिया विवाह; 9 लोगों पर FIR

about 11 hours ago
2 साल से लैब टेक्नीशियन के स्नातक की पहले वर्ष की भी परीक्षा नहीं ली गई
Top News

2 साल से लैब टेक्नीशियन के स्नातक की पहले वर्ष की भी परीक्षा नहीं ली गई:रीना बौरासी सेतिया के समक्ष विद्यार्थियों ने बताई की अपनी समस्याएं

about 11 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!