कहीं दूध जैसी सफेद: कहीं पन्ने जैसी हरी; चार धाम मार्ग की नदियों के बदलते रंगों के पीछे का विज्ञान और मिथक
KHULASA FIRST
संवाददाता

देवभूमि की रगों में बहते अनूठे रंग: कहीं नीली-हरी अलकनंदा, कहीं दूधिया भागीरथी, प्रकृति के इस कैनवास का सच
नदियों के बदलते रंगों का ‘दैवीय’ संयोग या भूगर्भीय रासायनिक क्रिया, जानिए चार धाम मार्ग का यह विहंगम कौतुक
चोराबारी ग्लेशियर से कालिंदी पर्वत तक, पहाड़ों के मिनरल्स और चट्टानों से तय होता है पवित्र जलधाराओं का ‘कलर कोड’
आस्था के प्रवाह में विज्ञान का रंग, संगमों पर बदलती जलधाराओं की पौराणिक कथाएं और उनका जमीनी भूगोल
हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट।
चार धाम की दुर्गम और पवित्र यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालु जब देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में प्रवेश करते हैं, तो पहाड़ों के अलौकिक सौंदर्य के साथ-साथ एक और दृश्य उन्हें सम्मोहित कर देता है। वह अद्भुत दृश्य है-रास्ते भर साथ चलने वाली नदियों के बदलते रंग।
कहीं अलकनंदा का पानी गहरे पन्ने जैसा हरा दिखाई देता है, तो कहीं मंदाकिनी और भागीरथी का वेग दूधिया सफेद नजर आता है। देवप्रयाग और रुद्रप्रयाग जैसे महान संगमों पर तो दो अलग-अलग रंगों की जलधाराओं का मिलन साफ देखा जा सकता है।
आंखों को सुकून देने वाले इस विहंगम नजारे के पीछे जितना गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है, उतना ही दिलचस्प इसके पीछे का भूविज्ञान भी है। आस्था और विज्ञान का यह अनोखा संयोजन पाठकों को हमेशा से अपनी ओर आकर्षित करता रहा है।
देवप्रयाग का महा-संगम और दो धाराओं का चरित्र... नदियों के रंग बदलने और उनके अनूठे मिलन का सबसे जीवंत उदाहरण देवप्रयाग में देखने को मिलता है। यहां एक ओर से गहरे नीले-हरे शांत जल के साथ अलकनंदा आती है, तो दूसरी ओर से कोलाहल करती, चट्टानों से टकराती दूधिया सफेद रंग की भागीरथी कदम बढ़ाती है।
इन दो अलग रंगों की धाराओं का संगम दूर से ही पहचान में आ जाता है। पुराणों में अलकनंदा को ‘ज्ञान की धारा’ कहा गया है, जो गंभीर और शांत है, इसलिए इसका रंग गहरा और धीर गंभीर है। दूसरी ओर भागीरथी को ‘वैराग्य और तपस्या की ऊर्जा’ माना गया है, जो राजा भगीरथ के कठिन तप से स्वर्ग से उतरी थी, इसलिए इसका वेग और रंग एकदम उजला और चंचल है।
इस पौराणिक मान्यता के समानांतर जब हम विज्ञान के पन्नों को पलटते हैं, तो भूवैज्ञानिक इसके पीछे एक अलग तर्क देते हैं। उनके अनुसार अलकनंदा एक बहुत लंबा रास्ता तय करके आती है, जिससे मैदान तक पहुंचते-पहुंचते उसका वेग कम हो जाता है। वेग कम होने से पानी में मौजूद गाद और मिट्टी नीचे बैठ जाती है, जिससे पानी साफ और गहरा नीला-हरा दिखाई देने लगता है।
इसके विपरीत भागीरथी अत्यंत तीव्र ढाल से अत्यधिक वेग के साथ बहती हुई आती है। तेज बहाव के कारण पानी में लगातार हवा के बुलबुले बनते हैं और रास्ते की चट्टानों के महीन कण पानी में हर वक्त घुले रहते हैं, यही वजह है कि यह धारा हमेशा मटमैली या दूधिया सफेद नजर आती है।
रुद्रप्रयाग में पन्ने जैसी हरी मंदाकिनी का रहस्य... जब यात्री केदारनाथ मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, तो रुद्रप्रयाग में अलकनंदा का मिलन मंदाकिनी से होता है। यहां मंदाकिनी नदी का रंग बिल्कुल पन्ने जैसा खूबसूरत हरा दिखाई देता है, जो पहाड़ों की हरियाली को अपने भीतर समेटे हुए लगता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव ने नारद मुनि को संगीत की शिक्षा देने के लिए ‘रुद्र’ रूप में अवतार लिया था। मंदाकिनी के इस शांत और मनमोहक हरे रंग को माता पार्वती के सौंदर्य और वात्सल्य से जोड़कर देखा जाता है, जो पहाड़ों में जीवन के संचार का प्रतीक है।
मंदाकिनी के इस अनूठे हरे रंग के पीछे का वैज्ञानिक कारण भी बेहद दिलचस्प है। इस नदी का उद्गम केदारनाथ के ठीक पीछे चोराबारी ग्लेशियर से होता है। इस पूरे यात्रा मार्ग की चट्टानों में क्वेर्टजाइट और क्लोराइट शीस्ट जैसे खनिजों की भारी प्रचुरता है।
जब ग्लेशियर पिघलता है, तो वह इन विशिष्ट चट्टानों को महीन पीसकर अपने साथ लाता है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘ग्लेशियर फ्लोर’ कहा जाता है। जब सूर्य की किरणें पानी में मौजूद इन सूक्ष्म खनिजों पर पड़ती हैं, तो वे प्रकाश के लाल और पीले रंग को सोख लेती हैं और केवल हरे व नीले रंग को परावर्तित करती हैं, जिससे पूरी नदी पन्ने जैसी चमकीली हरी दिखाई देती है।
यमुना का श्यामल रंग और कालिंदी की पौराणिक कथा...कालिंदी पर्वत से निकलने वाली यमुना नदी जब अपने उद्गम स्थल यमुनोत्री पर होती है, तो बर्फ के ताज़ा पिघलने के कारण इसका पानी दूध जैसा सफेद और पारदर्शी होता है। लेकिन जैसे ही यह नदी मैदानी और निचले पहाड़ी इलाकों की तरफ बढ़ती है, इसका रंग धीरे-धीरे श्यामल यानी गहरा नीला और काला होने लगता है।
पौराणिक कथाओं में यमुना को सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन माना गया है। भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और कालिया नाग के मर्दन के प्रसंग के कारण यमुना के इस गहरे श्यामल रंग को ‘कृष्ण वर्ण’ या ‘कालिंदी’ कहा गया है, जो आस्थावानों के लिए साक्षात कृष्ण भक्ति का प्रतीक है।
भूवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यमुनोत्री के आस-पास की चट्टानों और भूगर्भ की बनावट में सल्फर यानी गंधक और ग्रेफाइट जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यमुनोत्री धाम में ही प्रसिद्ध ‘सूर्य कुंड’ जैसे गर्म पानी के चश्मे हैं, जिनमें गंधक की मात्रा बहुत अधिक होती है।
जब यह भूगर्भीय गर्म पानी मुख्य धारा में मिलता है और नदी आगे का सफर तय करती है, तो रास्ते की चट्टानों के मिनरल्स और कंकड़-पत्थरों की रासायनिक संरचना के कारण पानी का रंग गहरा और श्यामल दिखाई देने लगता है।
ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का ‘एक्वा ब्लू’ रूप... चार धाम यात्रा के प्रवेश द्वार ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का पानी सर्दियों और गर्मियों की शुरुआत में ‘एक्वा ब्लू’ यानी हल्के नीले-हरे रंग में लहराता हुआ दिखाई देता है। यह पूरी तरह से प्रकाश के प्रकीर्णन और पानी की शुद्धता पर निर्भर करता है।
जब पहाड़ों से आने वाले पानी में मानसून की मिट्टी या कीचड़ नहीं होता, तो साफ पानी नीले रंग की रोशनी को सबसे ज्यादा बिखेरता है। चूंकि उत्तराखंड के इन पहाड़ों की चट्टानें चूना पत्थर और कैल्शियम कार्बोनेट से समृद्ध हैं, इसलिए पानी में एक खास तरह की चमक और हल्का हरा-नीला रंग उभर कर आता है, जो मानसून आते ही फिर से मटमैला हो जाता है।
कुल मिलाकर, चार धाम मार्ग की इन नदियों के रंग केवल आंखों को सुकून देने वाले दृश्य नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि हमारी सनातन आस्थाओं ने किस तरह प्रकृति के भूगोल और विज्ञान को अपने भीतर बेहद खूबसूरती से समेटा हुआ है।
संबंधित समाचार

अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन सख्त:सरकारी जमीन से हटेगा कब्जा; अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, कलेक्टर के निर्देश की अनदेखी पर कटेगा वेतन

जर्जर छात्रावासों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन:कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों स्टूडेंट्स; बोले- छत का प्लास्टर गिरने से डर का माहौल

गर्ल्स डिग्री कॉलेज में जमकर हंगामा:बीए के रिजल्ट पर मचा बवाल; 1316 छात्राओं में इतनों को दी सप्लीमेंट्री

मोमोज को लेकर विवाद:ठेले वाले ने छात्र पर फेंका खौलता तेल; चेहरा-कान झुलसे

जमीन मुक्त नहीं हुई तो उग्र आंदोलन तय:5.84 करोड़ जमा, फिर भी टालमटोल; 7 को ज्ञापन, 13 से आरपार का ऐलान

600 पन्नों की रिपोर्ट से तय होगी जवाबदेही:जहरीले जलकांड पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई

दूषित जल कांड मामला:अब इस तारीख को होगी अगली सुनवाई; याचिकाकर्ताओं ने कहा- रिपोर्ट का अध्ययन कर बहस के लिए समय जरूरी

350 करोड़ का प्रोजेक्ट:सवा किमी में 15 पिलर की खुदाई पूरी; 2028 तक निर्माण का लक्ष्य

स्कीम नं. 114 पार्ट-1 में शासकीय भूमि पर कब्जा:कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता को भगा रहे अधिकारी

निगम की अनदेखी से मुसीबत बना खुला नाला:हादसों का जिम्मेदार कौन

शहर के नामी होटल पर नगर निगम की कार्रवाई:लाखों रुपए का लगाया स्पॉट फाइन; मिली ये खामियां

पटवारी अपने विवादित वीडियो पर स्पष्टीकरण दें:यादव समाज

तय समय के बाद तक हैमर्स में झलके जाम तो थिरके लोग:देर रात कासा-कासा की धूम; सिस्टम खामोश

बंटी नागर की मौत के पीछे करोड़ों का जाल:खुलासा फर्स्ट ने जिन नामों का किया था खुलासा; पुलिस की जांच में वही नाम

सोयाबीन के भाव को लेकर किसानाें चक्काजाम:कहा- मंडी में 4400; बाहर 5200 से 5600 रुपए तक बिक रहा, विधायक ने लगाए साठगांठ के आरोप

पुलिस चौकी के पास कारों पर पथराव:बदमाशों ने मचाया का आतंक; शाम तक पुलिस रही बेखबर

पत्नी ने की पति की बेरहमी से हत्या:सोते समय सिर पर हथौड़ा मारा; फिर गला दबाया, इस वजह से उठाया खौफनाक कदम

भाजपा में जंग से भोपाल तक गरमाई सियासत:उमंग सिंघार का ट्वीट- जब मुख्यमंत्री न किसी की सुनते हैं, न चलने देते हैं, तो अधिकारी क्यों सुनेंगे

नए जिलों का तेजी से विकास ही प्राथमिकता:सीएम डॉ. मोहन यादव

गर्लफ्रेंड का नेकलेस टूटने पर बौखलाया बॉयफ्रेंड:जला दी दूसरी युवती की एक्टिवा; नाबालिग सहित चार गिरफ्तार, मुख्य आरोपी पर पहले से दर्ज है कई मामले
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!