स्मार्ट सिटी में घपले का ‘वाटर टेस्ट’: 32 करोड़ डकारने के बाद भी सड़क अधूरी; सीईओ की अजीबोगरीब दलील
KHULASA FIRST
संवाददाता

ईडी जांच में फंसी कंपनी, 150 मीटर सड़क पर पानी-पानी!
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लंदन की तर्ज पर शहर को चमकाने का दावा करने वाला प्रशासनिक अमला घोर भ्रष्टाचार, लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के दलदल में धंस चुका है।
बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक एमजी रोड की महज 1.70 किलोमीटर की तथाकथित आदर्श सड़क के निर्माण पर जनता के करीब 40 करोड़ रुपए पानी की तरह बहा दिए गए। इसके बावजूद हकीकत यह है कि यह मार्ग बनने के बाद से बीते तीन वर्षों में 35 बार से अधिक मरम्मत का दंश झेल चुका है।
सोमवार को गौराकुंड चौराहा के पास नई पाइप लाइन की टेस्टिंग के दौरान छूटे पानी के फव्वारे ने न केवल सड़क को धंसा दिया, बल्कि इंदौर के भ्रष्ट विकास मॉडल का खुलासा भी कर दिया। चौतरफा फजीहत होते देख अब स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्थ जैन को बचाव में उतरना पड़ा है।
दस्तावेजों और अधिकारियों के मुताबिक 1.70 किलोमीटर लंबे एमजी रोड के निर्माण का 39.42 करोड़ रुपए जीएसटी सहित का भारी-भरकम ठेका तीर्थ गोपीकॉन प्राइवेट लिमिटेड को 11 फरवरी 2022 को सौंपा गया था। चौंकाने वाली बात यह कि इस चहेती निर्माण एजेंसी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा पहले से कसा हुआ है।
कागजों पर रोड कंस्ट्रक्शन, स्टॉर्म वाटर, ड्रेनेज और अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिकल का जाल बिछाना था, लेकिन यह एजेंसी काम अधूरा छोड़कर चली गई। इसके बावजूद ‘प्रशासनिक मेहरबानी’ से इसे करीब 32 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया।
अनुबंध के नियमानुसार अगले 5 वर्षों तक सड़क का रखरखाव मेंटेनेंस उसी एजेंसी को करना था, लेकिन वह बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी हुए ही रफूचक्कर हो गई। गौराकुंड के रामद्वारा मंदिर सहित अन्य अतिक्रमण का बहाना बनाकर करीब 150 मीटर हिस्से में अंतिम सीमेंट-कंक्रीट का काम जानबूझकर लटकाकर रखा गया था।
इसी छूटे हुए टुकड़े पर गिट्टी और डामर की अस्थायी लीपापोती की गई थी, ताकि 300 और 400 मिलीमीटर की वाटर ट्रंक लाइन की टेस्टिंग की जा सके। सोमवार को जैसे ही पाइप लाइन में पानी छोड़ा गया, सड़क भरभराकर पानी-पानी हो गई।
पानी के दबाव से न सिर्फ पाइप लाइन फटी, बल्कि सड़क के बीचोबीच बने गड्ढे से निकले तेज फव्वारे से देखते ही देखते पूरी सड़क पर पानी फैल गया। सड़क के आसपास लगाए गए पेवर ब्लॉक भी घटिया निर्माण के कारण धंस गए।
घटना के अगले दिन मंगलवार को जब चौतरफा दबाव बढ़ा, तो स्मार्ट सिटी कंपनी की टीम मौका-मुआयना करने गौराकुंड पहुंची। जांच के नाम पर अधिकारियों की दलीलों ने तंत्र की नाकामी का और खुलासा कर दिया।
स्मार्ट सिटी कंपनी के सहायक यंत्री सौरभ माहेश्वरी और उनकी टीम ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए तर्क दिया कि जहां पानी फूटा, वहां से रामदेवरा मंदिर तक का हिस्सा अतिक्रमण न हटने से 60 फीट चौड़ाई न मिलने के कारण पूरा बन ही नहीं पाया था।
दूसरी ओर सफाई पेश करते हुए स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन ने दावा किया कि टेस्टिंग के दौरान पानी का केवल मामूली रिसाव हुआ था, जिसे तुरंत दुरुस्त कर दिया गया है। सीईओ जैन के अनुसार ठेकेदार को 32 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं, जबकि 7.42 करोड़ रुपए की राशि रोकी गई और काम पूरा न होने के कारण कंप्लीशन सर्टिफिकेट अटका है। अब रक्षाबंधन पर्व के बाद गौराकुंड चौराहे का ट्रैफिक रोककर इस अधूरे काम को आगे बढ़ाया जाएगा और बचे हुए 150 मीटर हिस्से पर कंक्रीट डाला जाएगा।
लापरवाही का सबसे बड़ा और चिंताजनक पहलू यह कि 24 घंटे पानी देने के दावों के साथ 50 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बिछाई गई पाइप लाइन का नक्शा तक अफसरों के पास नहीं है। जिस कंपनी ने पानी की लाइन डाली थी, उसे ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
स्थिति इतनी हास्यास्पद है कि प्रशासनिक अमले को यह तक नहीं मालूम कि कंपनी ने पाइप लाइन में किस-किस स्थान पर अंतिम छोर छोड़े थे। इसी अज्ञानता के कारण बिना किसी पूर्व योजना के दबाव जांचे जा रहे हैं, जिसके दुष्परिणामस्वरूप करोड़ों की सड़क पानी में बह गई।
वर्ष 2022-23 में रखी गई थी घटिया निर्माण की नींव इस घटिया निर्माण और भुगतान की वर्ष 2022-23 में जब नींव रखी जा रही थी, तब स्मार्ट सिटी कंपनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषभ गुप्ता थे। उनके बाद यह जिम्मेदारी दिव्यांक सिंह के पास रही और वर्तमान में अर्थ जैन इसके सीईओ हैं।
निर्माण कार्य के दौरान कार्यपालन यंत्री डीआर लोधी थे। सवाल यह है कि स्मार्ट सिटी कंपनी के निदेशक मंडल बोर्ड में इंदौर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त स्वयं शामिल हैं, फिर भी इतना बड़ा भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कैसे हुआ?
40 करोड़ की सड़क और 50 करोड़ की पानी की लाइन को मिलाकर करीब 90 करोड़ खर्च होने के बाद भी जनता को आज तक पुरानी जर्जर पाइप लाइन से ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। 2021 में पूरी होने वाली इस योजना को चालू होने में अभी कम से कम एक साल और लगने का अनुमान है।
बहरहाल, करोड़ों के नुकसान के एवज में केवल दो जूनियर इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर लीपापोती की कोशिश की जा रही है, जबकि मुख्य रूप से जिम्मेदार अफसर तकनीकी तर्कों और रक्षाबंधन के बाद काम पूरा करने के आश्वासनों की आड़ लेकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
यह आठ साल पहले स्मार्ट सिटी का किया हुआ काम है। नगर निगम का उससे कोई लेना-देना नहीं। फिर भी 2022 में जब यह परिषद बनी थी, तब महापौर पुष्यमित्र भार्गव, राजेंद्र राठौर और हमने खुद उस कंपनी के कामों पर आपत्ति लेकर उसे ब्लैकलिस्टेड किया था। अभी जो दोषी हैं, उन पर कार्रवाई करेंगे।
- अभिषेक बबलू शर्मा, एमआईसी सदस्य नगर निगम, इंदौर
पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई होना चाहिए। महापौर भी चाहते हैं कि जांच हो। हमारे यहां का लोकल ठेकेदार इससे बेहतर सड़क बना देता है, जबकि इसके लिए गुजरात के ठेकेदार से काम कराया गया।
- राजेंद्र राठौर, एमआईसी सदस्य नगर निगम, इंदौर
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