योजना से वंचित: नियमों में फंसी लाखों आदिवासी महिलाएं; जनहित याचिका के जरिए उठाया मुद्दा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) की महिलाओं से जुड़ा एक मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय की करीब 7 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा जनहित याचिका के जरिए उठाया गया है।
मामले में योजना के क्लॉज 4.4 की व्याख्या को मुख्य आधार बनाया गया है। याचिका के मुताबिक, पोषण आहार अनुदान योजना के तहत मिलने वाली राशि के कारण इन महिलाओं को लाड़ली बहना योजना के लिए अपात्र माना जा रहा है।
क्या है क्लॉज 4.4 का विवाद?
याचिका के अनुसार, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के क्लॉज 4.4 में ऐसी महिलाओं को अपात्र माना गया है, जो स्वयं किसी सरकारी योजना के तहत प्रतिमाह 1,000 रुपए या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही हों। याचिका में दावा किया गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस प्रावधान की व्याख्या करते हुए बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से बाहर रखा है।
इन महिलाओं के खातों में पोषण आहार अनुदान की राशि के रूप में 1,500 रुपए प्रतिमाह जमा होने का हवाला दिया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि पोषण आहार की राशि परिवार के पोषण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सहायता है, जबकि लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता देना है। इसी आधार पर दोनों योजनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर पात्रता समाप्त करने पर सवाल उठाए गए हैं।
विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
इस मामले को लेकर 2 दिसंबर 2025 को विधानसभा में भी सवाल उठाया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, महिला एवं बाल विकास मंत्री ने लिखित जवाब में बताया था कि संबंधित महिलाओं को लाड़ली बहना योजना की पात्रता से बाहर किए जाने का आधार क्लॉज 4.4 है और पोषण आहार योजना से मिलने वाली राशि को पात्रता के निर्धारण में देखा गया।
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने दायर की जनहित याचिका
इस मुद्दे को लेकर रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने अधिवक्ता मनीष यादव के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में मांग की गई है कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय की पात्र महिलाओं को भी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में शामिल किया जाए।
याचिका में विभाग द्वारा क्लॉज 4.4 की गई व्याख्या को चुनौती देते हुए संबंधित महिलाओं को योजना का लाभ दिए जाने की मांग की गई है।
करीब 7 लाख महिलाओं पर असर का दावा
याचिका और इस मामले से संबंधित रिपोर्टों में करीब 7 लाख महिलाओं के प्रभावित होने का दावा किया गया है। हालांकि, महिलाओं की सटीक संख्या और पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट होगा।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग प्रकार की सहायता उपलब्ध कराना है।
अब विवाद इस बात पर केंद्रित है कि पोषण आहार के तहत मिलने वाली राशि को लाड़ली बहना योजना की पात्रता तय करने के लिए किस तरह माना जाए।
हाईकोर्ट के फैसले पर नजर
जनहित याचिका के जरिए अदालत से संबंधित महिलाओं को लाड़ली बहना योजना में शामिल करने की मांग की गई है।
अब इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही और सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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