पहली बार हो रहा सिंहस्थ: सदियों से सिंहस्थ के साक्षी खड़े हनुमान किसी ने नहीं हटाया अब मुख्यमंत्री से आस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खड़े हनुमानजी महाराज के पक्ष में उज्जैन में बना जबरदस्त माहौल, बैकफुट पर प्रशासन
खड़े हनुमान की 56 साल पुरानी तस्वीर
श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़े विषय पर उज्जैन जिला प्रशासन ने बयान जारी कर की अपनी स्थिति स्पष्ट
जिला प्रशासन ने किया वादा- श्रद्धालुओं-नागरिकों की भावनाओं व आस्था का होगा पूर्ण सम्मान
खड़े हनुमानजी महाराज के लिए बढ़ती जा रही भीड़, साधु-संतों की टोली ने भी दर्शन कर प्रतिमा हटाने का किया विरोध
अब प्रशासन आईआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लेगा कोई फैसला, टेंट में हैं हनुमानजी
कांग्रेस भी खड़े हनुमानजी के पक्ष में आकर खड़ी हुई, पार्टी विधायक बोले-जनभावनाओं का हो सम्मान
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
क्या उज्जैन में पहली बार सिंहस्थ हो रहा है? सिंहस्थ तो अनादिकाल से हो रहा है न? फिर खड़े हनुमानजी इस बार ही सिंहस्थ के आड़े क्यों आ रहे हैं? क्या इस बार वाले सिंहस्थ में ही भीड़ जुटेगी? क्या कंठाल से छत्रीचौक तक रास्ता पहले चौड़ा था और अब संकरा हो गया है? क्या कंठाल से छत्रीचौक होते हुए साधु-संत व अखाड़े रामघाट स्नान करने जाते हैं?
अंकपात क्षेत्र के तमाम वैष्णव संप्रदाय के अखाड़े तो तेलीवाड़ा होते हुए ढाबा रोड, दानी गेट से गुजरते हुए रामघाट जाते हैं न? फिर कंठाल चौराहा से सराफा होते हुए छत्रीचौक तक के सरपट सफर को लेकर जिद क्यों? वह भी तब, जब हनुमानजी महाराज साफ संकेत दे रहे हैं कि वे यहीं विराजमान रहना चाहते हैं। नतीजतन अब खड़े हनुमानजी की बेदखली देशव्यापी खबर हो गई है।
अब हनुमानजी महाराज व उनके अनन्य भक्तों की नजर प्रदेश के मुख्यमंत्री और खड़े हनुमानजी की नगरी उज्जैन के बेटे डॉ. मोहन यादव पर है। वे विदेश से मध्य प्रदेश आ गए हैं। सीएम की अवंतिकापुरी में अब सब तरफ एक ही बात है- मोहन भइया अई ग्या हे, वी सब ठीक करी देगा।
क्या उज्जैन में पहली बार सिंहस्थ हो रहा है, जो हनुमानजी महाराज को बेदखल किया जा रहा है?
ये सवाल न सिर्फ उज्जैन, बल्कि अब समूचे मालवा अंचल में गूंज रहा है। सिंहस्थ और विकास के नाम पर उज्जैन में 60 मंदिर अभी तक इधर से उधर हो गए, लेकिन अब बात उन हनुमानजी पर आकर टिक गई है, जो खड़े हनुमानजी के नाम से ख्यात हैं। परमारकालीन इस प्रतिमा के विस्थापन से अब उज्जैन बिफर गया है। नगरवासियों का कहना है कि इतने सारे मंदिर हटाने के बाद कम से कम सरकार को ये मंदिर तो बख्श देना चाहिए।
श्रद्धालुओं व नगरवासियों के इस गुस्से को स्वयं हनुमानजी महाराज ने भी अपना बल दे दिया। वे अपनी जगह से टस से मस नहीं हो रहे। आज 10 दिन हो गए, लेकिन प्रतिमा अब तक हट नहीं पाई, जबकि मंदिर लगभग पूरा टूट गया है। हनुमानजी का विग्रह अस्थायी टेंट में विराजमान है।
उज्जैन में खड़े हनुमानजी के इर्द-गिर्द भीड़ बढ़ती जा रही है। हजारों की संख्या में भक्त यहां आकर डटे हुए हैं और सरकार व प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि मंदिर व प्रतिमा यहीं रहने दी जाए। प्रतिदिन महाआरती हो रही है। बुधवार को उज्जैन में मौजूद साधु-संत समाज भी दर्शन करने खड़े हनुमानजी के समक्ष उपस्थित हुआ और प्रतिमा हटाने का विरोध किया।
30 अगस्त से प्रशासन व भक्त आमने-सामने हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा। अब उज्जैन को अपने बेटे, यानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आस है कि वे ही हस्तक्षेप करें और बाबा का विस्थापन टालें।
बुधवार को दिनभर उज्जैन में ये ही चर्चा थी कि मुख्यमंत्री वापस देश में आ गए हैं और अब समस्या का निदान हो जाएगा। न सिर्फ उज्जैन, बल्कि अब देशभर की नजरें मुख्यमंत्री डॉ. यादव के फैसले पर टिक गई हैं, क्योंकि खड़े हनुमानजी के हठीलेपन की चर्चा अब देशभर में हो रही है।
आस्था व जनभावनाओं के समक्ष जिला प्रशासन बैकफुट पर... जन-जन की हनुमानजी के प्रति आस्था व मंदिर को हटाने पर आहत जनभावनाओं के दबाव के बाद जिला प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। उसने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। एसडीएम के हवाले से कहा गया है कि सिंहस्थ-2028 के विकास कार्य भी आवश्यक हैं और उज्जैन की धार्मिक आस्था भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों, संत समाज एवं श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ समाधान निकाला जाएगा। यह श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा विषय है। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैनवासियों एवं श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है।
प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं की भावना, प्रतिमा की सुरक्षा तथा उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत सर्वोपरि है। प्रशासन सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों की भावनाओं और आस्था का पूर्ण सम्मान करता है। सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई भी निर्णय अथवा कदम नहीं उठाया जाएगा।
आईआईटी की रिपोर्ट के बाद ही होगा प्रतिमा का फैसला...जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए जा चुके हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई भी प्रयास किसी मशीन अथवा मानवीय युक्तियों से नहीं किया गया है।
इस संबंध में यह निर्णय लिया गया है कि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक, तकनीकी राय प्राप्त किए बिना प्रतिमा के विस्थापन हेतु कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा प्रतिमा की संरचना का परीक्षण किया जाएगा। उज्जैन की आस्था और विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रशासन श्रद्धालुओं एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद कर सर्वसम्मत समाधान निकालेगा।
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