50 से ज्यादा मौत का दावा, आंकड़े छिपाने का आरोप: जहरीली शराबकांड; मौत का सिलसिला थम नहीं रहा
KHULASA FIRST
संवाददाता

मंदसौर में कलेक्टर हटे थे, सागर में मेहरबानी क्यों?
‘तबादला, निलंबन न्याय नहीं और सरकारी बयान जवाबदेही नहीं’
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जहरीली शराब से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। सोमवार को एक और मौत के बाद संख्या 28 हो गई है, जबकि बड़ी संख्या में बीमारों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और प्रशासन पर वास्तविक आंकड़ा छिपाने का गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया उन्होंने गांव-गांव जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है। मौत का आंकड़ा 50 से ज्यादा है।
इधर, प्रशासन प्रभावित गांवों में स्क्रीनिंग करा रहा है, ताकि शराब सेवन कर चुके किसी व्यक्ति में लक्षण दिखाई दें तो तत्काल उपचार मिल सके। इधर, घटना को लेकर सियासत भी तेज हो गई है।
पटवारी ने मरीजों और परिजनों से की मुलाकात... जीतू पटवारी ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर जहरीली शराब से प्रभावित मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ डॉक्टरों से इलाज की स्थिति भी जानी। दावा किया 33 से ज्यादा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की है। हर परिवार की अपनी पीड़ा है और कई मौतों की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में शामिल नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।
सरकार मौतें छिपा रही है... पटवारी ने हमला बोलते हुए कहा प्रशासन और सरकार मौतों की वास्तविक संख्या छुपा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया जिन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी अवैध शराब के कारोबार को रोकने की थी, उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। प्रदेश अध्यक्ष ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
30 आरोपी नामजद, 14 गिरफ्तार... पुलिस ने तीन एफआईआर में 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 14 की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस अब शराब की सप्लाई, उसके स्रोत और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। बंडा एसडीएम आरती यादव और एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि को हटा दिया गया है।
बंडा के गांवों से शुरू हुआ था मौतों का सिलसिला
सागर जि से करीब 30 किमी दूर बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में कथित तौर पर शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी थी। कई लोगों को चक्कर आने और धुंधला दिखाई देने जैसी शिकायतें हुईं। इसके बाद बड़ी संख्या में मरीजों को अस्पताल पहुंचाया गया।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को सक्रिय किया है और घर-घर स्क्रीनिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, धुंधला दिखाई देना और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण हैं।
मौतों के आंकड़े पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ा विवाद मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर है। प्रशासन 22 मौतों की पुष्टि कर रहा है, वहीं जीतू पटवारी 50 से ज्यादा मौतों का दावा कर रहे हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में इससे भी अधिक मौतों के आंकड़े सामने आए हैं, लेकिन स्पष्ट अंतर है।ऐसे में पोस्टमॉर्टम, मेडिकल रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी।
सरकार के एक्शन पर सवाल
जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सियासत तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल है जब पुराने मामलों में कलेक्टर समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, तो सागर कलेक्टर पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के कार्यकाल में मंदसौर में जहरीली शराब कांड के बाद सरकार ने तत्काल एक्शन लिया था। आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा के गृह जिले में जहरीली शराब से मौतों के मामले के बाद तत्कालीन सरकार ने आबकारी समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की थी और तत्कालीन कलेक्टर मनोज पुष्प को हटा दिया था, लेकिन सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद जिम्मेदारी तय करने में वही सख्ती क्यों नहीं दिखाई जा रही है।
सागर कलेक्टर पर कार्रवाई क्यों नहीं?
मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से सवाल किया जा रहा है कलेक्टर प्रतिभा पाल को अब तक क्यों नहीं हटाया गया? जिला स्तर पर आबकारी विभाग प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है और कलेक्टर के स्तर पर भी निगरानी एवं जवाबदेही तय होना चाहिए।
न्यायालय की टिप्पणी का भी हवाला... न्यायालय द्वारा कलेक्टर प्रतिभा पाल की कार्यशैली को लेकर सख्त टिप्पणी के बाद भी सरकार ने उन्हें बनाए रखा।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर... जहरीली शराब कांड के बाद सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है सिर्फ आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब निगाह जांच रिपोर्ट पर हैं। यह रिपोर्ट ही स्पष्ट करेगी अवैध शराब के कारोबार में किन स्तरों पर लापरवाही हुई और जिम्मेदारी किस-किस अधिकारी की बनती है।
जीतू पटवारी का सीएम को पत्र
सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों के मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क के खुलासे की मांग की है। पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा ‘मौत के बाद तबादला और निलंबन न्याय नहीं है और सरकारी बयान जवाबदेही नहीं।’
पटवारी ने लिखा जहरीली शराब से मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी स्थिति देखी है। प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा हर बार जहरीली शराबकांड के बाद कुछ अधिकारियों के तबादले या निलंबन कर दिए जाते हैं, मूल नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश नहीं होती।
मौतों से पहले तंत्र कहां था?
पटवारी ने सवाल उठाया अवैध शराब कारोबार की सूचनाएं और शिकायतें थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सरकार को बताना चाहिए कि मौतों के बाद सक्रिय होने वाला प्रशासनिक तंत्र घटना से पहले कहां था।
वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जवाबदेही तय की जाए। केवल अधिकारियों के तबादले या निलंबन से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। जमीन पर मॉनिटरिंग और प्रभावी सुपरविजन किसकी जिम्मेदारी थी, इसका स्पष्ट जवाब सरकार को देना चाहिए।
कार्रवाई के आदेश में बदलाव पर भी सवाल
पटवारी ने संदिग्ध शराब को लेकर विभागीय स्तर पर हुई जांच और कार्रवाई के बीच कथित विरोधाभासों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा पहले कार्रवाई का आदेश और फिर उसमें बदलाव जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए। सरकार सार्वजनिक करे किसके आदेश पर क्या फैसला लिया गया और उसमें बदलाव क्यों किया गया।
ललितपुर से सागर तक कैसे पहुंची शराब?
पटवारी ने जहरीली शराब नेटवर्क की जांच स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर अंतरराज्यीय स्तर तक करने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया ललितपुर से सागर तक नकली या संदिग्ध शराब पहुंची?
गुजरात में हुई जहरीली शराब त्रासदी और उज्जैन से सामने आए कथित कनेक्शन का भी उल्लेख कर सरकार से पूछा पिछली घटनाओं के बाद क्या कदम उठाए गए। संवेदनशील जिलों में विशेष जांच या नई गाइडलाइन लागू की गई या नहीं, सरकार इसकी जानकारी सार्वजनिक करे।
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