इस घोटाले में चौंकाने वाला खुलासा: पुताई करने वाला बना अकेला गवाह; सुप्रीम कोर्ट भी सख्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले से जुड़ा एक हैरान करने वाला तथ्य सामने आया है। भोपाल के कोटरा सुल्तानाबाद निवासी और पेशे से पुताई का काम करने वाले सुनील कुशवाहा अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें घोटाले के 847 आरोपियों के खिलाफ गवाह बनाया गया।
जांच प्रक्रिया और गवाहों की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस खुलासे ने जांच प्रक्रिया और गवाहों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ ) ने व्यापमं घोटाले से जुड़े करीब 10 मामलों में आरोपियों के कथित बयानों और कार्रवाई की पुष्टि के लिए सुनील कुशवाहा को मेमोरेंडम गवाह के रूप में पेश किया। इतने संवेदनशील मामलों में गवाह होने के बावजूद कभी विशेष सुरक्षा नहीं दी गई।
अदालत में बदले बयान, जांच पर उठे सवाल
मामला तब और चर्चा में आ गया जब सुनील कुशवाहा ने अदालत में मुख्य परीक्षण के दौरान अपने पहले दिए गए बयानों से अलग बातें कहीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 से उन्हें बार-बार STF कार्यालय बुलाया जाता था। कभी आरोपियों की गिरफ्तारी, कभी जब्ती की कार्रवाई और कभी उनके बयानों की पुष्टि के लिए उन्हें गवाह बनाया जाता था।
कई मामलों में कार्रवाई उनके सामने हुई
सुनील ने अदालत को बताया कि कई मामलों में कार्रवाई उनके सामने हुई, लेकिन कई बार दस्तावेज पहले से तैयार रहते थे और उन्हें केवल हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया जाता था।
उन्होंने यह भी कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपियों के कथित बयान टाइप किए जाते थे, जिन पर आरोपी, पुलिस अधिकारी और वे स्वयं हस्ताक्षर करते थे। हालांकि इतने वर्षों बाद उन्हें सभी घटनाएं स्पष्ट रूप से याद नहीं हैं।
‘स्टॉक गवाह’ व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
एक ही व्यक्ति को बड़ी संख्या में मामलों में गवाह बनाए जाने की व्यवस्था को कानूनी भाषा में ‘स्टॉक गवाह’ कहा जाता है। इस प्रथा पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर चिंता जताई है।
मध्य प्रदेश के मऊगंज और इंदौर से भी ऐसे मामले सामने आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि एक ही व्यक्ति को बार-बार अलग-अलग मामलों में गवाह बनाना न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
निगरानी के लिए बनी विशेष समिति
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद जस्टिस विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है। यह समिति ऐसे मामलों की निगरानी करेगी, जिनमें एक ही व्यक्ति को बड़ी संख्या में मामलों में गवाह बनाया गया है।
मेमोरेंडम गवाह क्यों होता है महत्वपूर्ण?
सेवानिवृत्त न्यायाधीश दीपक अग्रवाल के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में मेमोरेंडम गवाह की भूमिका बेहद अहम होती है। आरोपी द्वारा दिए गए कथित बयान और पुलिस कार्रवाई की पुष्टि यही गवाह करता है।
यदि बाद में वही गवाह अपने बयान से मुकर जाए, तो पूरे मामले की दिशा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि मेमोरेंडम गवाह यह भी सुनिश्चित करता है कि पुलिस किसी व्यक्ति को मनमाने तरीके से आरोपी नहीं बना रही है और कार्रवाई विधि सम्मत तरीके से हुई है।
क्या है स्टॉक गवाह?
जब पुलिस या जांच एजेंसियां अलग-अलग मामलों में बार-बार एक ही व्यक्ति को गवाह के रूप में इस्तेमाल करती हैं, तो उसे स्टॉक गवाह कहा जाता है।
क्या होता है मेमोरेंडम गवाह?
मेमोरेंडम या मेमो गवाह वह व्यक्ति होता है, जो पुलिस की कार्रवाई जैसे गिरफ्तारी, जब्ती, बरामदगी या पंचनामा के दौरान स्वतंत्र गवाह के रूप में मौजूद रहता है और बाद में अदालत में उसकी पुष्टि करता है।
व्यापमं घोटाले में एक ही व्यक्ति का 847 आरोपियों के खिलाफ गवाह होना अब जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए गंभीर बहस का विषय बन गया है।
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