रिपोर्ट से चाैंकाने वाला खुलासा: हर दूसरी मौत के समय नहीं था प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी; ग्रामीण इलाकों की स्थिति सबसे चिंताजनक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा जारी एसआरएस (सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 के अनुसार देश में वर्ष 2024 के दौरान हुई कुल मौतों में से 45.5 प्रतिशत मौतें ऐसी रहीं, जिनके समय कोई प्रशिक्षित डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा वर्ष 2020 के 18 प्रतिशत की तुलना में ढाई गुना से भी अधिक है। यानी पिछले चार वर्षों में बिना प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता के होने वाली मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
क्या बताती है रिपोर्ट
रिपोर्ट में उन मौतों को इस श्रेणी में शामिल किया गया है, जहां मरीज को मृत्यु के समय या तो कोई चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिली या फिर सहायता किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा दी गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच को दर्शाती है।
आखिर क्यों बढ़ा यह आंकड़ा?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, इलाज की बढ़ती लागत, अस्पतालों तक पहुंच में कठिनाई और मृत्यु संबंधी रिपोर्टिंग व्यवस्था की चुनौतियां शामिल हैं।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 2020 के बाद स्वास्थ्यकर्मियों की श्रेणियों और रिपोर्टिंग पद्धति में हुए बदलावों का भी आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।
गांव और शहरों के बीच बड़ी असमानता
रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का बड़ा अंतर भी सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी के मौतों की दर 48.9 प्रतिशत रही।
शहरी क्षेत्रों में यह दर 36.1 प्रतिशत दर्ज की गई। यह अंतर पिछले कई वर्षों से लगातार बना हुआ है, जो ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की चुनौतियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मध्यप्रदेश और पड़ोसी राज्यों की स्थिति
छत्तीसगढ़ – 60.4%
राजस्थान – 54.2%
मध्यप्रदेश – 40.7%
किन राज्यों में सबसे ज्यादा हैं ऐसे मामले?
रिपोर्ट के अनुसार बिना प्रशिक्षित डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी में मौतों का प्रतिशत सबसे अधिक इन राज्यों में दर्ज किया गया।
बिहार – 67.8%
झारखंड – 61.8%
छत्तीसगढ़ – 60.4%
राजस्थान – 54.2%
तेलंगाना – 52.6%
ओडिशा – 52%
वहीं सबसे बेहतर स्थिति वाले राज्य
केरल– 26.8%
जम्मू-कश्मीर – 29.2%
कर्नाटक – 32.5%
अस्पतालों में मौतों का अनुपात भी घटा
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में लगभग 24.7 प्रतिशत मौतें सरकारी अस्पतालों में दर्ज हुईं, जबकि 2014 में यह आंकड़ा 27 प्रतिशत था। कोविड काल के दौरान यह हिस्सा बढ़ा था, लेकिन बाद के वर्षों में फिर गिरावट देखने को मिली।
इसके अलावा प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा दी गई चिकित्सा देखभाल का प्रतिशत भी 2014 के 35 प्रतिशत से घटकर 2024 में लगभग 14 प्रतिशत रह गया है।
विशेषज्ञों की चिंता
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट देश में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की असमानता को उजागर करती है। ग्रामीण, गरीब और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को अंतिम समय तक भी पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती।
विशेषज्ञों के अनुसार चाहे आंकड़ों में वृद्धि का कुछ हिस्सा रिपोर्टिंग प्रणाली में बदलाव से जुड़ा हो, लेकिन ग्रामीण-शहरी अंतर और राज्यों के बीच भारी असमानता यह स्पष्ट संकेत देती है कि देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
क्या है एसआरएस रिपोर्ट?
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा संचालित एक प्रमुख जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है। इसके माध्यम से जन्म दर, मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, प्रजनन दर और स्वास्थ्य संबंधी अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र और प्रकाशित किए जाते हैं।
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