गंभीर खतरा: राजधानी समेत इतने जिलों में बने आतंकियों के आधार; फैले नेटवर्क पर उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल समेत 15 जिलों में बीएसएनएल की क्लोन आधार मशीनों से आतंकियों के आधार बनाए जाने का खुलासा हुआ है। यूआईडीएआई ( यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने मानी है यूआईडीएआई ने इसे स्वीकार किया है। दिसंबर 2023 से मामला सामने आ चुका है, लेकिन अब तक न एफआईआर हुई ना सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी गई।
सुरक्षा के लिए बड़ी चेतावनी
देश की सुरक्षा के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है। मध्य प्रदेश में बीएसएनएल ( भारत संचार निगम लिमिटेड ) की क्लोन आधार मशीनों से आतंकवादियों के आधार कार्ड बनाए जा रहे थे। यह बात अब खुद यूआईडीएआई ने मानी है।
बीएसएनएल के रिकॉर्ड में यह दर्ज है कि उसकी आधार मशीनों का अवैध इस्तेमाल कर आतंकवादियों के आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। इस जानकारी का इनपुट बीएसएनएल को दिसंबर 2023 में यूआईडीएआई ने एक पत्र के माध्यम से दिया था।
खत में क्या लिखा था
06 दिसंबर 2023 को बीएसएनएल मध्यप्रदेश सर्किल ने अपने अधिकारियों को गोपनीय और गंभीर पत्र भेजा था। इसमें यूआईडीएआई के दिल्ली दफ्तर से मिले इनपुट का हवाला दिया गया था।
इसमें लिखा था कि बीएसएनएल की क्लोन मशीनों से आतंकवादियों के आधार बन रहे हैं। इसमें यह भी बताया गया कि इन वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार किस प्राधिकारी के पास है। उस पत्र में यह भी कहा गया था कि स्थानीय सुपरवाइजर और ऑपरेटर भी इस गड़बड़ी में शामिल थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए 79 स्टेशन आईडी और ओए ( ऑपरेटिंग एरिया ) की सूची तैयार कर उन्हें डी-रजिस्टर यानी रजिस्ट्रेशन खत्म करने के निर्देश जारी किए गए थे।
अब तक एफआईआर नहीं हुई
हैरानी की बात यह है कि इस इनपुट के बाद ढाई साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और ना ही सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दी गई। वहीं, दस्तावेज बताते हैं कि दिसंबर 2023 से फरवरी 2026 तक फाइलें और पत्र बस एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर चक्कर काटते रहे हैं।
2026 में आया दूसरा पत्र
पहले खत के करीब 26 महीने बाद यानी 02 फरवरी 2026 को बीएसएनएल मध्यप्रदेश सर्किल ने एक और पत्र लिखा है। इस बार कॉर्पोरेट ऑफिस को संबोधित करते हुए पूछा गया कि टेंडर बिजनेस प्रक्रिया स्तर पर हम हैं, इसलिए कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार किस प्राधिकारी के पास है?
यह सवाल ही बताता है कि इतने समय में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस रैकेट को चलाने वाला नेटवर्क मेसर्स रॉयल कम्युनिकेशन से जुड़े वेंडरों द्वारा संचालित था। इसमें स्थानीय सुपरवाइजर और ऑपरेटर भी शामिल पाए गए थे।
15 से ज्यादा जिलों में था रैकेट
बीएसएनएल के दस्तावेजों के मुताबिक यह रैकेट मध्यप्रदेश के कई बड़े शहरों और 15 से ज्यादा जिलों में फैला था। इनमें भोपाल, विदिशा, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, जबलपुर, बालाघाट, मंडला, नरसिंहपुर, सतना, सिवनी, शहडोल, छिंदवाड़ा, ग्वालियर और शिवपुरी शामिल हैं। दस्तावेजों में यह भी संकेत मिला है कि ये मशीनें दूसरे राज्यों में भी इस्तेमाल हो रही थीं और वहां भी अवैध आधार बनाए गए।
प्राधिकरण ने साधी चुप्पी
यूआईडीएआई के भोपाल दफ्तर के प्रमुख सुमित मिश्रा ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। प्राधिकरण के मीडिया निदेशक प्रवीण चौधरी ने पहले मेल पर पत्रों की प्रतियां और सवाल मांगे, लेकिन बाद में कोई जवाब नहीं दिया गया।
एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
बीएसएनएल मप्र के मुख्य महाप्रबंधक मिथलेश कुमार ने कहा कि यूआईडीएआई से पत्र मिलने के बाद संबंधित मशीनों पर तत्काल रोक लगाई गई थी।
उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मप्र के अधिकार क्षेत्र की कोई भी मशीन राज्य के बाहर काम न कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि यूआईडीएआई के पत्र में जिस वेंडर का नाम था, उसे इस वर्ष की टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से भी प्रतिबंधित किया गया है। जब उनसे पूछा गया कि यदि मप्र में आतंकवादियों के आधार बनाए जा रहे थे तो एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब केवल यूआईडीएआई ही दे सकता है।
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