दानराशि जांच में बढ़ा दायरा: एसआईटी जांच में दो नामों का जिक्र; वीआईपी पास जारी करने पर भी सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
राम मंदिर के चढ़ावे और दानराशि में कथित गड़बड़ी की जांच लगातार गहराती जा रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, चौथे दिन हुई पूछताछ में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने दानराशि की गिनती प्रक्रिया को लेकर दो अहम नामों का जिक्र किया है। इसके बाद जांच एजेंसियों का फोकस ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर भी बढ़ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर के चढ़ावे और दानराशि में कथित हेरफेर के मामले में एसआईटी लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है। इसी क्रम में ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय, उनके ड्राइवर टिन्नू यादव और गोपाल राव से कई दौर की पूछताछ की गई है। जांच टीम ने इस दौरान कई दस्तावेज और अन्य सबूत भी जुटाए हैं।
नकदी के साथ गहनों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां केवल नकदी के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, सोने, चांदी और हीरे समेत दान में मिले बहुमूल्य गहनों के रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि दान में मिले आभूषणों के रखरखाव और रिकॉर्ड संधारण में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। इसी वजह से जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
देर रात तक चली पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने देर रात तक कई लोगों से पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। इस दौरान ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा से करीब तीन घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। वहीं महासचिव चंपत राय और गोपाल राव से भी दोबारा पूछताछ की गई। जांच एजेंसियां दानराशि की गिनती, रिकॉर्ड संधारण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
टिन्नू यादव ने लिए दो नाम
सूत्रों का दावा है कि चौथे दिन दोबारा हुई पूछताछ में टिन्नू यादव ने दानराशि की गणना प्रक्रिया को लेकर अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया। इसके बाद एसआईटी ने दोनों की भूमिका की अलग से गहन जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दानराशि के प्रबंधन और गिनती प्रक्रिया में दोनों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
रिकॉर्ड में मिली कई खामियां
सूत्रों के मुताबिक, नकदी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई खामियां सामने आई हैं। इन्हीं खामियों के आधार पर जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं। हालांकि इन खामियों की प्रकृति और उनसे जुड़े तथ्यों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
ट्रस्ट में पद नहीं, फिर भी जारी कर रहे थे VIP पास!
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, गोपाल राव ट्रस्ट में किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद वह कथित रूप से वीवीआईपी दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि उनकी आईडी का इस्तेमाल कर उनके एक रिश्तेदार द्वारा भी वीवीआईपी पास जारी किए गए थे या नहीं।
मंदिर निर्माण में भी भूमिका की जांच
जांच टीम अब मंदिर प्रबंधन और निर्माण कार्यों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री और पत्थरों की खरीद प्रक्रिया में भी गोपाल राव की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसी वजह से उनकी गतिविधियों और अधिकारों के दायरे की भी जांच की जा रही है।
अभी किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि, पूरे मामले में अब तक एसआईटी या जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं और एसआईटी की जांच लगातार कई अहम बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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