पहली बारिश में धंस गई करोड़ों की सड़क: शिकायतों को किया नजरअंदाज; कभी भी हो सकता है हादसा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली एक फिर सवालों के घेरे में है। अर्जुन बरोदा से सिलोटिया मार्ग पर करोड़ों रुपए से निर्मित सड़क मानसून की पहली ही बारिश में धंस गई। सड़क के नीचे दो से तीन फीट तक खाली जगह बन चुकी है।
सड़क का पूरा बेस बजरी, चूरी और मुरम बारिश के साथ बह गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि इस खतरे की लिखित चेतावनी महीनों पहले ही विभाग, मंत्री और संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी थी, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अब पहली ही बारिश ने न केवल सड़क की गुणवत्ता का खुलासा कर दिया, बल्कि विभागीय लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पहली बारिश ने ही खोल दी निर्माण की असलियत
मानसून की पहली बारिश के साथ ही सड़क का नाले वाला हिस्सा धंस गया। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क के नीचे दो से तीन फीट तक मिट्टी बह चुकी है। सड़क अंदर से खोखली हो गई है।
कभी भी सड़क का बड़ा हिस्सा टूट सकता है। इस मार्ग से रोज ग्रामीण, किसान, स्कूली बच्चे और भारी वाहन गुजरते हैं। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
ठेकेदार पर भी उठे सवाल... ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार कुलदीप शर्मा को कई बार सड़क की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन उन्होंने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार कार्य कर दिया जाता तो आज सड़क धंसने की नौबत नहीं आती।
सरपंच ने तीन महीने पहले लिखी थी जनहानि की आशंका
ग्राम पंचायत मंडलावदा की सरपंच निर्मला सुरेंद्रसिंह चौहान ने 7 अप्रैल 2026 को लोक निर्माण विभाग, डिवीजन-2, इंदौर के कार्यपालन यंत्री को लिखित पत्र भेजकर स्पष्ट चेतावनी दी थी। पत्र में कहा गया था कि सिलोटिया से अर्जुन बरोदा एवं पलासिया तक बनने वाली सड़क गहरे नाले के किनारे से गुजर रही है।
नाले की गहराई लगभग 30 से 35 फीट है। यदि नाले के किनारे पत्थर पिचिंग एवं सीमेंट-कांक्रीट सुरक्षा कार्य नहीं कराया गया तो भविष्य में सड़क धंस सकती है और जनहानि की आशंका बनी रहेगी। इसके बावजूद विभाग ने न तो सुरक्षा कार्य कराया और न ही चेतावनी को गंभीरता से लिया।
मंत्री से भी मांगी गई थी सेफ्टी वॉल की मंजूरी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य विद्या माखनलाल पटेल ने 27 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को पत्र भेजा। पत्र में स्पष्ट लिखा गया कि अर्जुन बरोदा-सिलोटिया मार्ग नाले के बिल्कुल पास से गुजर रहा है।
यदि लगभग 100 फीट लंबी सेफ्टी वॉल बना दी जाए तो सड़क सुरक्षित रहेगी। मंत्री से तत्काल स्वीकृति देने का अनुरोध किया गया। यह पत्र भी प्रशासनिक तंत्र के पास पहुंचा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सवालों के घेरे में पीडब्ल्यूडी
पूरा मामला कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है
जब खतरे की लिखित सूचना पहले ही मिल चुकी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
तकनीकी अधिकारियों ने निरीक्षण क्यों नहीं किया?
सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच किसने की?
यदि सड़क का बेस पहली बारिश में ही बह गया तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता क्या थी?
क्या भुगतान गुणवत्ता परीक्षण के बिना कर दिया गया?
सरकार और पीडब्ल्यूडी से 10 सवाल
चेतावनी मिलने के बाद भी सुरक्षा कार्य क्यों नहीं कराया गया?
सड़क निर्माण की तकनीकी स्वीकृति किसने दी?
गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
पहली बारिश में सड़क धंसने की जिम्मेदारी किसकी है?
ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होगी?
संबंधित इंजीनियरों की जवाबदेही तय होगी या नहीं?
सड़क का भुगतान किस आधार पर किया गया?
क्या निर्माण सामग्री का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाएगा?
दुर्घटना होने पर जिम्मेदार कौन होगा?
क्या पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाएगी?
पूरा प्रोजेक्ट 2 करोड़ 99 लाख का था
ठेकेदार कुलदीप शर्मा ने बताया कि ग्राम अर्जुन बरोदा से सिलोटिया तक की 3 किलोमीटर की सड़क बनाई गई है, पूरा प्रोजेक्ट 2 करोड़ 99 लाख का था, जो पूर्ण हो चुका है, उक्त नाला प्रायवेट लैंड पर मौजूद हैं, जिस पर सेफ्टी वॉल लगभग 100 मीटर तक बनना है,जिसकी गहराई 12 से 15 मीटर है जिसका खर्च 1 से डेढ़ करोड़ रुपए तक होना है जो सड़क निर्माण से अतिरिक्त है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया पीडब्ल्यूडी अधिकारी द्वारा की जाना है वह शासन से अनुमति मिलती है तो वह बन पाएगा।
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