स्वच्छता में नंबर-1: पेयजल में फिसड्डी; इंदौर में दूषित पानी पर फूटा लोगों का गुस्सा
KHULASA FIRST
संवाददाता

’मैं प्यासा हूं साहब पानी से भी मर सकता हूं’
गहराता जल संकट, जनता पूछ रही जिम्मेदार कौन
कहीं नलों से आ रहा गटर का पानी, कहीं 10 मिनट की सप्लाई, कहीं महीनों से नहीं पहुंचा नर्मदा जल
शिकायतों के बावजूद समाधान न मिलने से रहवासियों में आक्रोश
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक मीडिया हाउस ने एप्लीकेशन पर मोहल्ले की समस्याओं के समाधान को लेकर अभियान चलाया है। उन्हीं समस्याओं में से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को खुलासा फर्स्ट पाठकों के सामने लाया है।
देशभर में स्वच्छता का सिरमौर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जिसने शहर की चमकदार छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर शहर लगातार स्वच्छता के राष्ट्रीय पुरस्कार जीत रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों परिवार दूषित पानी, अधूरी जलापूर्ति और टैंकरों के भरोसे जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई क्षेत्रों में लोगों के घरों तक गटर मिश्रित पानी पहुंच रहा है, जबकि कई कॉलोनियों में नलों से पानी केवल कुछ मिनटों के लिए आता है। नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है और जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
करोड़ों खर्च, नतीजा शून्य
शहर के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही शिकायतें इस बात की गवाही दे रही हैं कि इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है।
हुजूरगंज स्थित मारुति पैलेस निवासी विजय बताते हैं कि उनके क्षेत्र में नलों से गटर का बदबूदार पानी आ रहा है। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। पानी कुछ मिनटों के लिए आता है और वह भी उपयोग योग्य नहीं होता।
चंदन नगर निवासी सुनील महतो का आरोप है कि नर्मदा लाइन में ड्रेनेज का पानी मिल रहा है। सुबह नल मात्र 10 मिनट तक चलता है और उसमें भी साफ पानी नहीं आता। जिम्मेदार अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कालानी नगर स्थित त्रिशला अपार्टमेंट के इमरान खान के अनुसार क्षेत्र में कई दिनों से कीचड़युक्त पानी की सप्लाई हो रही है। नगर निगम और जलप्रदाय विभाग को शिकायत करने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।
तुलसी नगर, अपोलो डीबी सिटी निवासी शीतल बताती हैं कि पानी में इतनी अधिक बदबू होती है कि उसे छूना तक मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि पानी में नाले और गटर जैसी दुर्गंध आती है, जिससे परिवार के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
द्वारकापुरी निवासी संदीप औस्तोलिया ने पानी वितरण में भेदभाव का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कुछ घरों तक नियमित पानी पहुंच रहा है, जबकि अनेक परिवार एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय पार्षद को शिकायत देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सिल्वर स्टार सिटी के गोपालकृष्ण यादव बताते हैं कि उनके क्षेत्र में आज तक नर्मदा जल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और विकराल हो गई है।
बर्फानी धाम क्षेत्र निवासी शिवाजी चौरसिया कहते हैं कि शहर का जल संकट अब टैंकर माफिया के लिए कमाई का जरिया बन चुका है। नगर निगम जहां अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल दिखाई दे रहा है, वहीं लोग महंगे दामों पर पानी खरीदने को विवश हैं।
इंद्रपुरी कॉलोनी वार्ड-74 के गजेंद्र यादव बताते हैं कि छोटी पाइपलाइन और दूषित जलापूर्ति के कारण पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। पार्षद और विधायक दोनों को शिकायत की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
पंचशील नगर निवासी दीपक शर्मा के अनुसार जल संकट इतना गहरा गया है कि लोगों को निजी टैंकर बुलाने पड़ रहे हैं। नगर निगम से मदद मांगने पर उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि उनकी सोसायटी ‘कवर्ड सोसायटी’ की श्रेणी में आती है।
एलआईजी गुरुद्वारा क्षेत्र के हर्ष खत्री का कहना है कि उनके इलाके में वर्षों से जल समस्या बनी हुई है। हर चुनाव में समाधान के वादे किए जाते हैं, लेकिन हालात नहीं बदलते।
11 महीने से बोरिंग खराब राजनीति के बीच पिस रही जनता
एक अन्य रहवासी बताते हैं कि उनके क्षेत्र में 11 महीने से बोरिंग खराब है। पार्षद का कहना है कि उनके पास कोटा नहीं है, जबकि विधायक कार्यालय से यह कहकर जवाब दिया जाता है कि कांग्रेस पार्षद से संपर्क करें। इस राजनीतिक खींचतान का खामियाजा सीधे आम नागरिक भुगत रहे हैं।
40 परिवार चंदा जुटाकर मंगा रहे पानी
तुकोगंज स्थित पार्श्वनाथ सोसायटी के डॉ. श्यामबिहारी गौतम बताते हैं कि सिल्वर स्टड बिल्डिंग के लगभग 40 परिवार तीन महीने से चंदा एकत्रित कर टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं। प्रत्येक परिवार अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठा रहा है, लेकिन नगर निगम में बार-बार शिकायत के बाद भी समाधान नहीं मिला।
एक महीने से नहीं पहुंचा नर्मदा जल
सप्तशृंगी नगर, सिलिकॉन सिटी निवासी महेंद्रचंद्र शर्मा ने बताया कि एक महीने से नर्मदा का पानी नहीं मिला है। विधायक के आश्वासन के बावजूद लोग टैंकर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन 15 दिन से कोई टैंकर भी नहीं पहुंचा।
नेताजी सुभाष मार्ग मल्हारगंज निवासी राजीव वर्मा बताते हैं कि 12 महीनों से नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। पानी की समस्या पर क्षेत्रीय पार्षद ध्यान नहीं दे रहे हैं।
योजनाएं कागजों में, प्यास धरातल पर
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में जल संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन और अमृत 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं। इनका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाना और शहरी जल प्रबंधन को मजबूत बनाना है, लेकिन इंदौर के अनेक क्षेत्रों की स्थिति देखकर लगता है कि इन योजनाओं का लाभ अभी तक जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर पाया है।
“गंदा पानी पीने को मजबूर हैं लोग”
छत्रीबाग निवासी प्रकाश बताते हैं कि सुबह आने वाला पानी अत्यंत गंदा और बदबूदार होता है। उन्होंने अपने पार्षद और विधायक मालिनी गौड़ तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं निकल सका। उनका कहना है कि लोग इसी पानी को पीने और घरेलू उपयोग के लिए मजबूर हैं।
सबसे बड़े सवाल
1. स्वच्छता में देश का सिरमौर बना इंदौर आखिर अपने नागरिकों को स्वच्छ पेयजल कब उपलब्ध करा पाएगा?
2. क्या नगर निगम, जनप्रतिनिधि और प्रशासन राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनता की मूलभूत आवश्यकता को प्राथमिकता देंगे? और सबसे महत्वपूर्ण...आखिर शहर की जनता की प्यास कब बुझेगी?
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