‘रण’ जीत लिया ‘रणदिवे’ने: चैलेंज, इनोवेशन और क्राइसिस मैनेजमेंट के नए योद्धा गौरव
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर के राजनीतिज्ञ लक्ष्मी देवी और कुबेर की पूजक हैं। उसके लिए वह कुछ भी कर सकते हैं, इसलिए राजनीतिक प्रभुत्व की इस रणभूमि में लगातार भाजपा के बलशाली नेता कोल्ड वॉर (शीत युद्ध) में पूरी ताकत लगाए रहते हैं-‘हम भी खेलेंगे, नहीं तो खेल बिगाड़ देंगे।’
यानी बने-बनाए काम रुकवाना या बिगाड़ देना, यानी किसी की मेहनत से बने हुए रायते को ढोलने में यहां के नेता निपुण हैं। इंदौर से लेकर भोपाल-दिल्ली तक इनके अय्यारों, रणनीतिकारों, संरक्षकों और प्रचारक वर्ग की टुकड़ियां या कहें बटालियन सक्रिय रहती है।
इसलिए मुख्यमंत्री ने ताई, भाई और फूफा लोगों को छोड़कर अब भतीजों की चतुरंगी सेना को आगे कर दिया है। मुख्यमंत्री समर्थकों का कहना है कि गौरव भाजपा की प्रभुत्व की राजनीति का चक्रव्यूह भेदकर रण जीतना जानते हैं।
समय-समय पर उन्होंने अपने कुशल राजनीतिक योद्धा होने का परिचय अपने काम से दिया है। उनके साथ युवाओं की बड़ी टीम भी है। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मजबूत नेता रहे हैं और इंदौर में एबीवीपी के काम को नए सिरे से बढ़ाने और उसे मजबूती देने का काम उन्होंने कुशलतापूर्वक किया।
इतने बलशाली योद्धाओं के बीच गौरव रणदिवे का रणभूमि में अपनी विजय पताका फहराना बहुत कुछ कहता है। जेन-जी के इस युग में भाजपा के लिए मध्य प्रदेश में अब गौरव जैसे नौजवान उम्मीद हैं।
60 से 65 साल की उम्र पार कर चुके थकेले, लेकिन धनशाली नेताओं को इंदौर ही नहीं, देशभर में युवा नौजवान स्वीकार नहीं करने वाले हैं, इसलिए मुख्यमंत्री लगता है इंदौर की राजनीति का पूरी तरह से कायाकल्प करने में लगे हुए हैं।
इस काम में गौरव जैसे नौजवान योद्धाओं की टोली महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, बशर्ते रायता ढोलने या फैलाने वाले फूफा रायता ढोलने में सफल नहीं हो पाएं। उनके करीबी बताते हैं कि वह इंदौर की भयावह राजनीति के बावजूद शहर अध्यक्ष बने।
फिर कोरोना और इसके अलावा समय-समय पर जो भी संकट सरकार, संगठन और समाज के साथ आए, उन सबसे सरकार, शासन-प्रशासन और समाज को सफलतापूर्वक उबार लिया।
इसका एक कारण यह भी रहा कि वह बेहद शांत, लो-प्रोफाइल और गंभीर प्रवृत्ति के नौजवान हैं, इसलिए उन्होंने इंदौर के सभी नेताओं के बीच कुशलतापूर्वक तालमेल और समन्वय बनाए रखा है। इस कारण उन्हें मामा हो या ताई, भाई हो या फिर फूफा लोग, सभी का प्यार और समर्थन समान रूप से गौरव को मिलता है।
पिछला विधानसभा और लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए चुनौती वाला था। इसके लिए गौरव जैसे नौजवान नेताओं को मालवा में चुनाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। इंदौर की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत में गौरव की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
गौरव ने हमेशा सरकार, संगठन और मुख्यमंत्री का गौरव बढ़ाया है। जैसा इस समय मुख्यमंत्री के लिए गौरव की बात है कि गौरव ने सरकार के एक बड़े कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर सफल बनाया।
जानकार बताते हैं कि इंदौर की बीजेपी की खतरनाक राजनीति में मेगा इवेंट्स और क्राइसिस मैनेजमेंट के नए सूत्रधार अब स्थापित हो चुके हैं। इस तरह की टास्क को बेहतर तरीके से अंजाम देने में गौरव जैसे नौजवान ताकत के साथ बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं।
इंदौर में स्वामित्व रजिस्ट्री वितरण कार्यक्रम...मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे की भूरी-भूरी प्रशंसा करके यह बता दिया है कि उनका भरोसा अब नौजवानों की टोली पर है, जो उनके लिए बी-टीम का काम करेगी।
गौरव एक पराक्रमी राजनीतिक योद्धा हैं, यह मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर 2026 को इंदौर के गांधी नगर ग्राउंड में ऐतिहासिक ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन’ योजना का भव्य शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस राज्य-स्तरीय और बेहद महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता के बाद मंच से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भाजपा के युवा एवं ऊर्जावान नेता व प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे की कार्यकुशलता की खुलकर सराहना की।
कार्यक्रम की सफलता में गौरव रणदिवे का योगदान...कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार गौरव रणदिवे रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सार्वजनिक मंच से अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इस वृहद आयोजन की पूरी रूपरेखा, संरचना और प्रबंधन का जिम्मा गौरव रणदिवे के नेतृत्व में तैयार किया गया था।
उत्कृष्ट समन्वय...राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के आगमन, भव्य रोड शो और हजारों हितग्राहियों तक निःशुल्क रजिस्ट्री वितरण से जुड़े इस चुनौतीपूर्ण आयोजन को जमीन पर उतारने में उनकी संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक तालमेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजनीतिक चर्चा...कार्यक्रम के दौरान सीएम द्वारा उनके नाम का विशेष उल्लेख और बाद में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा इसे ‘राज की बात’ करार दिए जाने ने इस आयोजन में गौरव रणदिवे की केंद्रीय और निर्णायक भूमिका पर मुहर लगा दी।
बौद्धिक क्षमता...कुशाग्र बुद्धि और संगठन कौशल के धनी गौरव रणदिवे मध्य प्रदेश की राजनीति में एक उभरते और बेहद प्रभावशाली युवा चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। गौरव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के उस फाॅर्मूले में पूरी तरह फिट हैं, जिसमें ऊर्जावान, पढ़े-लिखे नौजवानों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि...उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से बीकॉम और एमबीए की उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह व्यावसायिक और प्रबंधकीय शिक्षा राजनीतिक रणनीतियों को अमलीजामा पहनाने में साफ झलकती है।
वैचारिक यात्रा...छात्र जीवन के दौरान ही वे अपने मूल संस्कारों के प्रभाव से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए और एक समर्पित स्वयंसेवक के रूप में राष्ट्र सेवा का कार्य शुरू किया।
संगठन में बढ़ता कद...उन्हें मई 2020 में इंदौर महानगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की कमान सौंपते हुए भाजपा नगर अध्यक्ष बनाया गया था, जहां उनके कार्यकाल के दौरान सांगठनिक कार्य और चुनाव प्रबंधन काफी मजबूत रहे।
उनकी कार्यकुशलता और निष्ठा को देखते हुए अक्टूबर 2025 में पार्टी ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी, मध्य प्रदेश का प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया। संकट प्रबंधन क्षमता...कोरोना महामारी के कठिन दौर में ‘सेवा ही संगठन’ अभियान के तहत उन्होंने जरूरतमंदों तक राशन, चिकित्सा और राहत सामग्री पहुंचाने में लीडरशिप का बेहतरीन उदाहरण पेश किया था।
अपनी उच्च शिक्षा, वैचारिक स्पष्टता, अनुशासित कार्यशैली और असाधारण प्रबंधन कौशल के कारण गौरव रणदिवे को भाजपा के सबसे बुद्धिमान और भरोसेमंद युवा नेताओं में गिना जाता है, जो पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करने में लगातार सक्रिय हैं।
इंदौर की सियासत में नया फाॅर्मूला...सीएम मोहन यादव की ‘चेक एंड बैलेंस’ पॉलिटिक्स और गौरव रणदिवे के बढ़ते सियासी प्रभाव से कार्यकर्ताओं में उम्मीद जागी है।
युवा लीडरशिप को प्रोत्साहन...मुख्यमंत्री यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि पार्टी अब केवल पुराने समीकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन में मेधावी, शिक्षित और ऊर्जावान युवाओं को आगे लाकर एक समानांतर और स्वतंत्र ‘युवा बी-टीम’ खड़ी की जा रही है।
दिग्गजों के एकाधिकार को चुनौती...इंदौर की राजनीति में हर मुख्यमंत्री को अपनी रणनीति लागू करने में स्थानीय स्तर पर असहजता का सामना करना पड़ता रहा है। ऐसे में रणदिवे जैसे संगठनात्मक पकड़ वाले युवा चेहरे को प्रमोट कर सीएम ने एक बेहतरीन ‘चेक एंड बैलेंस’ (नियंत्रण और संतुलन) का फार्मूला सेट किया है।
संकट प्रबंधन क्षमता... कोरोना महामारी के कठिन दौर में ‘सेवा ही संगठन’ अभियान के तहत उन्होंने जरूरतमंदों तक राशन, चिकित्सा और राहत सामग्री पहुंचाने में लीडरशिप का बेहतरीन उदाहरण पेश किया था।
अपनी उच्च शिक्षा, वैचारिक स्पष्टता, अनुशासित कार्यशैली और असाधारण प्रबंधन कौशल के कारण गौरव रणदिवे को भाजपा के सबसे बुद्धिमान और भरोसेमंद युवा नेताओं में गिना जाता है, जो पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करने में लगातार सक्रिय हैं। नवाचार के प्रयोग करने में गौरव माहिर हैं।
कैलाश विजयवर्गीय का तंज और ‘राज की बात’
मुख्यमंत्री की इस रणनीति का असर मंच पर ही तुरंत देखने को मिला। जब वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माइक संभाला तो उन्होंने अपने चिर-परिचित और मुखर अंदाज में कहा- ‘आज मुख्यमंत्रीजी ने एक राज की बात बताई है कि इस कार्यक्रम के असली सूत्रधार गौरव रणदिवे हैं।'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजयवर्गीय का यह तंज इस बात का प्रतीक था कि वे इंदौर के राजनीतिक मैदान पर किसी नए पावर सेंटर के तेजी से उभरने को लेकर सहज नहीं हैं।
हालांकि, वरिष्ठ नेता ने इसके बाद रणदिवे को बधाई भी दी, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में मंच से दिया गया यह बयान इस बात की तस्दीक करता है कि इंदौर में लीडरशिप को लेकर अंदरखाने खींचतान शुरू हो चुकी है।
भविष्य की राजनीति का नया चेहरा...एमबीए की उच्च शिक्षा, संघ की पृष्ठभूमि और जमीनी स्तर पर चुनावी प्रबंधन का लंबा अनुभव रखने वाले गौरव रणदिवे का बढ़ता कद इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में इंदौर और मध्य प्रदेश की राजनीति में युवा चेहरों को डिसीजन-मेकिंग के केंद्र में रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की यह सोची-समझी कूटनीति यह तय करती दिख रही है कि इंदौर में अब पावर का विकेंद्रीकरण होगा, जहां युवा नेतृत्व सीधे संगठन और मुख्यमंत्री की धुरी के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ेगा।
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