राजा रघुवंशी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर शिलांग हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है। अदालत ने मेघालय पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया में कई गंभीर कानूनी खामियां बताते हुए राज्य सरकार की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया
हाईकोर्ट ने अपने लगभग 20 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान संविधान और कानून के अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया।
9 जून 2025 को हुई थी गिरफ्तारी
मेघालय पुलिस ने 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सोनम रघुवंशी को गिरफ्तार किया था। इससे पहले पुलिस ने दावा किया था कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची थी।
बाद में 27 अप्रैल 2026 को जिला अदालत ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां पाते हुए सोनम को जमानत दे दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मेघालय पुलिस हाईकोर्ट पहुंची थी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।
गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट नहीं बताया
हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के समय पुलिस सोनम को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से यह बताने में विफल रही कि उसे किस अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत आरोपी को प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना।
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य है, जिसका पालन इस मामले में नहीं किया गया।
'हास्यास्पद' बताई गिरफ्तारी चेकलिस्ट
हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के समय तैयार की गई चेकलिस्ट पर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने इसे "Ridiculous" (हास्यास्पद) करार देते हुए कहा कि जिस प्रपत्र पर सोनम से हस्ताक्षर कराए गए, उसमें राजा रघुवंशी की हत्या या उस पर लगे हत्या के आरोप का कहीं कोई उल्लेख ही नहीं था। इसके बजाय चेकलिस्ट में ऐसे सामान्य प्रश्न शामिल थे, जिनका इस हत्याकांड से कोई सीधा संबंध नहीं था।
उदाहरण के तौर पर उससे पूछा गया कि क्या वह किसी सशस्त्र बल से भगोड़ी है, क्या वह विदेश में किसी अपराध में शामिल रही है, क्या वह रिहा कैदी है या चोरी की संपत्ति से उसका कोई संबंध है। अदालत ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी के दौरान आवश्यक विवेक और सावधानी का प्रयोग नहीं किया।
गलत धारा बार-बार लिखी गई
मामले की सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से कहा गया कि दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) की जगह 403(1) लिखा जाना केवल टाइपिंग की त्रुटि थी। हालांकि सोनम की ओर से अदालत को बताया गया कि यह गलती केवल एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी, बल्कि गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट, निरीक्षण रिपोर्ट सहित कई आधिकारिक दस्तावेजों में बार-बार दोहराई गई।
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया में लगातार हुई ऐसी त्रुटियां गंभीर लापरवाही को दर्शाती हैं।
गाजीपुर कोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल
मेघालय पुलिस का तर्क था कि गाजीपुर में गिरफ्तारी के बाद सोनम को स्थानीय अदालत में पेश किया गया था, जहां ट्रांजिट रिमांड भी मंजूर हुआ और उसे आरोपों की जानकारी होने की बात उसने स्वीकार की थी। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि गाजीपुर अदालत में भी गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट और प्रभावी रूप से नहीं बताए गए थे। हाईकोर्ट ने इस पहलू को भी अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना।
फैसले का मिला सहारा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मिहिर राजेश शाह मामले का भी उल्लेख किया गया। इस फैसले में सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के समय उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है। केवल मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि इस सिद्धांत का पालन इस मामले में नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट जाएगी मेघालय पुलिस
जानकारी के अनुसार मेघालय पुलिस अब हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व निर्णयों का विस्तृत उल्लेख किया है, इसलिए आगे राहत मिलना आसान नहीं होगा।
फिलहाल इंदौर नहीं आ सकेगी सोनम
हाईकोर्ट ने जमानत तो बरकरार रखी है, लेकिन जिला अदालत द्वारा लगाई गई सभी शर्तें भी यथावत रखी हैं। इन शर्तों के अनुसार सोनम बिना अदालत की अनुमति शिलांग के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकती। ऐसे में फिलहाल सोनम के इंदौर लौटने की संभावना नहीं है।
राजा के परिवार ने फिर उठाई सीबीआई जांच की मांग
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजा रघुवंशी का परिवार एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग पर अडिग है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी का आरोप है कि मेघालय पुलिस ने शुरुआत से ही जांच में गंभीरता नहीं दिखाई, जिसका परिणाम यह हुआ कि मुख्य आरोपी को जमानत मिल गई। परिवार ने आशंका जताई है कि यदि जांच में कमियां बनी रहीं तो भविष्य में आरोपियों को इसका लाभ मिल सकता है।
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