चीन की कूटनीति से ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता पर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
9 जून से चल रही ब्रिक्स देशों की एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप बैठक में अधिकारिक स्तर की चर्चा गुरुवार को खत्म हुई। अब 12 और 13 जून की बैठक के लिए कई देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधि भाग लेने पहुंचे, कुछ देर रात आए।
कुल जमा तीन देशों के तीन प्रमुख मंत्री हैं, बाकी चार के उप मंत्री। चीन समूह का सबसे ताकतवर सदस्य है और अपनी कूटनीति और हितों को सर्वोपरि रखता है चीन की चालाकी और अक्सर कई सवालों को जन्म देती है।
कूटनीतिज्ञों का मानना है चीन अक्सर विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर प्रतिनिधित्व का स्तर अपने रणनीतिक और घरेलू कार्यक्रमों के अनुसार तय करता है।
इस सम्मेलन के इतर बात करें तो विश्लेषकों का मानना है, ब्रिक्स की स्थापना से ही चीन इसे अपने नेतृत्व में ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में देखता है।
बीजिंग खुद को ब्रिक्स का नेता मानता है और जब कोई अन्य देश, खासकर भारत इस मंच पर प्रमुखता पाता है, तो वह इसे एक "प्रोवोकेशन" के रूप में लेता है।
मंत्री स्तर पर अनुपस्थिति चीन का एक साइलेंट लेकिन तीखा संदेश भी हो सकता है। खासकर ऐसे समय जब भारत कृषि उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भरता के संकट के साथ खाड़ी देशों और जिओ पॉलिटिक्स की प्रतिकूल परिस्थितियों से गुजर रहा है।
अनुपस्थिति का पैटर्न
चीन के कृषि मंत्री हान जून (सितंबर 2024 से) की अनुपस्थिति ने कूटनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। आधिकारिक तौर पर बीजिंग ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, लेकिन यह घटना इकलौती नहीं है।
चीन की ब्रिक्स बैठकों से अनुपस्थिति का एक पुराना और सुचिंतित पैटर्न रहा है। मई में जब भारत ने नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाई, तब चीनी विदेश मंत्री वांग यी इसलिए नहीं आए थे, क्योंकि उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग में थे। चीन ने अपना प्रतिनिधित्व भारत में अपने राजदूत शू फेइहोंग के माध्यम से किया।
तो क्या चीन नहीं चाहता भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का एजेंडा ‘भारत-केंद्रित’ बने और उसे अपनी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया जाए। जब ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्री और अधिकारी इंदौर में खाद्य सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल खेती और कृषि सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं, तब असली सवाल सम्मेलन कक्ष के बाहर खड़ा है—क्या ब्रिक्स केवल कृषि सहयोग का मंच है या फिर पश्चिमी प्रभाव वाली वैश्विक व्यवस्था के समानांतर एक नए शक्ति केंद्र का निर्माण कर रहा है?
इंदौर बैठक का एजेंडा खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-स्मार्ट कृषि, कृषि नवाचार और टिकाऊ खेती है। लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे केवल कृषि सम्मेलन नहीं मान रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार तनाव, खाद्यान्न आपूर्ति संकट और जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि अब सीधे भू-राजनीति से जुड़ चुकी है। ऐसे समय चीन जैसे चतुर और चालक खिलाड़ी इस सम्मेलन को कितना महत्व देगा यह देखना।
ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्या ब्रिक्स कृषि सहयोग पर सहमत हो पाएगा, जबकि चीन, भारत, रूस और नए सदस्य देशों की आर्थिक तथा रणनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं? चीन कृषि के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है और वैश्विक व्यापार भी अपने तरीके करता है इसलिए इंदौर घोषणा-पत्र कितना प्रभावित हो पाएगा, विचारणीय है।
इधर जिला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक ईरान के कृषि मंत्री डॉ. गुलामरज़ा नूरी केजलजेह और उप-कृषि मंत्री डॉ. सैयद सईद राद मंत्री टीम के साथ आ चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के जॉन स्टीनहुइज़न भी शिरकत करेंगे। रूस का प्रतिनिधित्व उप-कृषि मंत्री मैक्सिम मार्कोविच करेंगे, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप-मंत्री मोहम्मद सईद अल-नुऐमी 10 जून को पहुंच चुके हैं।
पार्टनर कंट्री में नाइजीरिया के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मंत्री सेनेटर अबूबकर क्यारी और उज़्बेकिस्तान के उप-कृषि मंत्री अब्दुज़ुखुरोव जमशीदजोन तोलिबोविच भी हिस्सा ले रहे हैं। कई देशों के कृषि मंत्री, कुछ देशों के डिप्टी मिनिस्टर सहित 57 प्रतिनिधि शामिल हैं।
खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि और डिजिटल फार्मिंग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा जारी है। जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होना है, उसमें वैश्विक खाद्य संकट से निपटने और कृषि व्यापार बाधाओं को दूर करने की साझा प्रतिबद्धता पर बात हो रही है।
इसके अलावा सप्लाई चैन का संकट, ब्रिक्स देशों के बीच खाद्यान्न भंडार के सहयोग पर बातचीत की जाएगी। अन्य मुद्दों में सस्टेनेबल और डिजिटल कृषि रोडमैप के साथ क्लाइमेट चेंज व नए सदस्य देशों के एकीकरण पर भी साझा फैसला होगा।
संबंधित समाचार

पूर्व मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान:कहा-अब राजनीति नहीं; धर्म की रक्षा करेंगे, दशहरे पर निकालेंगे अयोध्या यात्रा

भाजपा मंडल अध्यक्ष के जन्मदिन पर उड़ाई नियमों की धज्जियां:प्रतिबंध के बावजूद बुलेट से पटाखे फोड़कर मनाया जश्न; रहवासी होते रहे परेशान

बर्फानी बाबा का आकार घटकर एक फुट:परंतु आस्था में नहीं आई कोई कमी

काॅलेज परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण:मंत्री ने बताया भारतीय ज्ञान परंपरा का वाहक ; आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक प्रगति में अहम योगदान

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार; इस एवज में मांगी थी घूस

पवित्र धाम, अपवित्र काम:चढ़ावा चोरी; चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर

कलेक्टर जनसुनवाई में जरूरतमंदों को मिली राहत:प्रशासन बना आमजन का सहारा; दिव्यांग बालिका की शिक्षा की हुई राह आसान

सीमांकन के बाद भी नहीं बन पाई बाउंड्री:सरकारी बगीचा बना अवैध पार्किंग

वीडियो देखिये, हॉस्पिटल रोड पर जलभराव से बढ़ी परेशानी:मरीजों और राहगीरों को हो रही भारी दिक्कत, हादसे की आशंका

सरकार ने फिर लिया इतने हजार करोड़ का कर्ज:कुल देनदारी इतने लाख करोड़ के करीब पहुंची

सराफा में सरकारी सुविधाघर तोड़ने का आरोप:विरोध करने पर दुकानदारों को दी जान से मारने की धमकी

नगर निगम के नोटिस को हवा में उड़ा रहा पानी माफिया:3 दिन का अल्टिमेटम देकर भूला कॉरपोरेशन

दिग्गज क्रिकेटर का निधन:38 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; विश्व कप में खेली थी यादगार पारी

पिस्टल लहराकर दी गालियां:पुलिस को कहे अपशब्द; कुख्यात बदमाश पर बड़ी कार्रवाई

‘ऑनर’ के नाम पर बहन का कत्ल:एक बार फिर भाई बना जल्लाद; प्रेमी से मिलने की जिद पर दी मौत

वीडियो देखिये, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क्या पूछा:आप कब से राम भक्त हो गए; इनकी पीड़ा राम मंदिर के चढ़ावे चोरी से संबंधित नहीं

सिंहस्थ क्षेत्र में फिर शुरू हुआ पक्का निर्माण कार्य:गृहमंत्री अमित शाह के फैसले की अनदेखी

सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध, सीएम डॉ. मोहन यादव:डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र सतगढ़ी का शिलान्यास

वीडियो देखिये, उत्कृष्ट पुलिसिंग पर 18 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित:पुलिस कमिश्नर ने प्रशस्ति पत्र व नकद पुरस्कार देकर बढ़ाया हौसला

भक्तों ने ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष कर ग्रहण की महाप्रसादी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!