मतदाता सूची पर सवाल: एसआईआर के बाद भी मिले लाखों संदिग्ध वोटर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए चार महीने तक चली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बावजूद मध्य प्रदेश की वोटर लिस्ट पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव आयोग की नई जांच में प्रदेशभर में 21 लाख से अधिक और ग्वालियर जिले में करीब 65 हजार ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनके नाम और विवरण संदिग्ध या एक-दूसरे से मिलते-जुलते पाए गए हैं।
प्रदेशभर से 2.52 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए
यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब एसआईआर अभियान के दौरान प्रदेशभर से 2.52 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और समान प्रविष्टियों का सामने आना चुनावी रिकॉर्ड की शुद्धता पर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्वालियर में 65 हजार से ज्यादा संदिग्ध एंट्री
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने एक महीने पहले सभी जिलों को डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्री (डीएसई) की सूची भेजी थी। इसमें ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया गया, जिनके नाम, पहचान या अन्य विवरण एक-दूसरे से मेल खाते हैं।
ग्वालियर में 65 हजार नाम जांच के घेरे में
ग्वालियर जिले में कुल 65,465 संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आई हैं। इनमें 587 मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम और चेहरे एक ही मतदान केंद्र पर दोहराए गए हैं। 674 मतदाताओं के नाम एक ही विधानसभा क्षेत्र में दोबारा दर्ज पाए गए। 64,204 नाम ऐसे हैं, जिनकी प्रविष्टियां प्रदेश की अन्य विधानसभा सीटों से मेल खाती हैं।
अब तक 42 हजार नाम सही पाए गए
उप जिला निर्वाचन अधिकारी अनिल बनवारिया के अनुसार, अब तक की जांच में 42,846 मतदाताओं की प्रविष्टियां सही पाई गई हैं और इनमें किसी तरह के संशोधन की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि जनगणना संबंधी कार्यों के चलते सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, लेकिन शेष लगभग 40 प्रतिशत मामलों की जांच जारी है और जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।
बारिश के बाद फिर होगा मतदाता सूची का पुनरीक्षण
निर्वाचन विभाग के अनुसार मानसून के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण का नया चरण शुरू किया जाएगा। यह प्रक्रिया अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर में शुरू हो सकती है। इस दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे। मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे। गलत प्रविष्टियों और विवरणों में संशोधन किया जाएगा।
निकाय चुनावों की सूची में भी मिली गड़बड़ी
सिर्फ विधानसभा मतदाता सूची ही नहीं, बल्कि नगरीय निकायों की वोटर लिस्ट में भी समान नामों और विवरणों वाले करीब 750 मतदाता चिन्हित किए गए थे। इनमें से 540 नाम जांच के बाद हटाए जा चुके हैं, जबकि शेष मामलों की जांच जारी है।
बड़ा सवाल: एसआईआर के बाद भी क्यों नहीं साफ हुई वोटर लिस्ट?
चार महीने तक चले विशेष पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाना था। लेकिन अभियान समाप्त होने के कुछ ही समय बाद लाखों संदिग्ध प्रविष्टियों का सामने आना निर्वाचन प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जारी जांच में आखिर कितने नाम वास्तव में डुप्लीकेट या फर्जी साबित होते हैं और आगामी पुनरीक्षण में मतदाता सूची को कितना पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सकता है।
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