इन आवासों की गुणवत्ता पर सवाल: हजार से अधिक फ्लैटों में खतरा; स्टेटस रिपोर्ट तलब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में बनाए गए कई आवासीय प्रोजेक्ट अब अपनी गुणवत्ता को लेकर सवालों के
घेरे में हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट सख्त
विभिन्न जिलों से लगातार मिल रही शिकायतों के बीच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
अदालत यह जानना चाहती है कि निर्माण में सामने आई गंभीर खामियों के बावजूद अब तक प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
128 करोड़ रुपए की लागत से 1,024 फ्लैट तैयार किए
सबसे चिंताजनक स्थिति इंदौर के कनाड़िया स्थित गुलमर्ग परिसर में बने लाइट हाउस प्रोजेक्ट की बताई जा रही है। यहां करीब 128 करोड़ रुपए की लागत से 1,024 फ्लैट तैयार किए थे।
लेकिन निर्माण के महज ढाई साल के भीतर ही बड़ी संख्या में आवासों में सीपेज, पानी का रिसाव, दीवारों में नमी और बिजली का करंट फैलने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आने लगी हैं। रहवासियों का कहना है कि इन खामियों के कारण उनकी सुरक्षा तक खतरे में पड़ गई है।
न्यायालय की शरण में पहुंचे रहवासी
निर्माण की गुणवत्ता से परेशान रहवासियों ने स्थायी समाधान नहीं मिलने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनका आरोप है कि मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी पर होने के बावजूद गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया। बार-बार शिकायतों के बाद भी केवल औपचारिक मरम्मत की गई, जिससे समस्याएं फिर सामने आ गईं।
अन्य शहरों से भी शिकायतें
इंदौर ही नहीं, भोपाल के करोंद और बैरागढ़ में बने पीएम आवास परियोजनाओं से भी निर्माण की खराब गुणवत्ता और मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आई हैं।
इसी तरह ग्वालियर और जबलपुर के कुछ प्रोजेक्टों में भी समान प्रकार की खामियां सामने आने की जानकारी मिली है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि कई परियोजनाओं में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
नई तकनीक से बने थे आवास
इंदौर का लाइट हाउस प्रोजेक्ट ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज के तहत विकसित किया गया था। केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता से प्री-फेब्रिकेटेड सैंडविच पैनल तकनीक का उपयोग कर 128 करोड़ रुपए की लागत से 1,024 आवास तैयार किए गए थे।
इस परियोजना को आधुनिक और टिकाऊ निर्माण तकनीक का मॉडल बताया गया था, लेकिन अब कम समय में ही सामने आई सीपेज और लीकेज जैसी समस्याओं ने इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य सरकार से जवाब मांगा
हाईकोर्ट की निगरानी में अब राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है। आने वाली स्टेटस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि दोषी एजेंसियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और प्रभावित रहवासियों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी।
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