गरीबों के खातों से चल रहा था साइबर ठगी का नेटवर्क: 17 लाख की साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
साइबर ठगी करने वाले गिरोह ने ठगी की रकम को इधर से उधर पहुंचाने के लिए शहर में गरीबों के बैंक खातों का नेटवर्क खड़ा कर रखा है। एरोड्रम पुलिस की जांच में सामने आया कि मजदूरों और रैपिडो चालकों के बैंक खाते कमीशन पर लेकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराए जा रहे थे।
इनमें ठगी की रकम जमा होने के बाद निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती थी। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 15 आरोपियों को चिह्नित किया है। इनमें से चार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब बाकी आरोपियों की भूमिका और विदेश में बैठे साइबर ठगों से उनके कनेक्शन की जांच कर रही है। ठगी का खुलासा एरोड्रम क्षेत्र निवासी नीलेश दवे की शिकायत से हुआ।
जानकारी के मुताबिक नीलेश ने फेसबुक पर ट्रेडिंग कंपनी का विज्ञापन देखा था। विज्ञापन के जरिए उसे टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा गया। ग्रुप में यूएसडीटी, क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में चार से पांच गुना मुनाफे का झांसा दिया गया। भरोसा होने के बाद नीलेश ने अलग-अलग बैंक खातों में करीब 17 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
रकम जमा होते ही ग्रुप के सदस्यों ने संपर्क तोड़ दिया। पुलिस ने रकम के ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की तो एक बैंक खाता सामने आया, जिसमें ठगी की रकम पहुंची थी। यह खाता भावेश के नाम पर था। पूछताछ में भावेश ने बताया कि उसने अपना करंट अकाउंट ऋषभ यादव को दे दिया था।
सिर्फ बैंक खाता ही नहीं, बल्कि चेकबुक, पासबुक और बैंक में पंजीकृत मोबाइल सिम भी सौंप दी थी। इसके बाद खाते में आने वाली रकम निकालकर आगे दूसरे खातों में भेजा जाता था। जांच में पुलिस को पता चला कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय आरोपी साइबर ठगों के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करते थे।
इन खातों को आगे उपलब्ध कराने के बदले उन्हें कमीशन मिलता था। पुलिस के अनुसार ये खाते सामान्य बैंकिंग के लिए नहीं, बल्कि साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
चार आरोपी गिरफ्तार... डीसीपी जोन-1 नरेंद्र रावत के मुताबिक पुलिस ने भावेश, आदित्य पांडे, साहिल अरोरा सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोपियों की भूमिका बैंक खाते उपलब्ध कराने, खातों के जरिए रकम ट्रांसफर कराने और साइबर ठगों के साथ समन्वय करने से जुड़ी सामने आई है।
ऋषभ यादव की भूमिका भी खाते के संचालन और रकम के लेन-देन से जुड़ी है। पुलिस उससे जुड़े अन्य बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। वहीं पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि एक आरोपी के नाम पर ही तीन बैंक खाते खोले गए थे।
आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने के लिए किया गया। एक खाते में करीब 5.30 लाख रुपए होने की जानकारी मिली है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस रकम का 17 लाख रुपए की मौजूदा ठगी से सीधा संबंध है या नहीं।
आठ खातों में पहुंची ठगी की रकम
अब तक की जांच में पुलिस ने ऐसे आठ बैंक खातों की जानकारी जुटाई है, जिनमें साइबर ठगी की रकम पहुंची थी। इन खातों के ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इसी तरीके से अन्य लोगों को भी ठगी का शिकार बनाया गया होगा। खातों में रकम आने के बाद उसे तुरंत निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का पैटर्न भी जांच में सामने आया है।
विदेश से संचालित नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी का मुख्य नेटवर्क विदेश से संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इंदौर में मौजूद आरोपी इस नेटवर्क के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध करा रहे थे। ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत हुई कार्रवाई के बाद अब पुलिस का फोकस उन 11 अन्य आरोपियों पर है जो खातों की खरीद-फरोख्त, रकम के लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों की मदद से बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल संपर्कों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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