धार्मिक स्थलों के विवाद में मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकराया: दोनों पक्ष बोले-बातचीत नहीं; अदालत से चाहिए फैसला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख मंदिर-मस्जिद विवादों वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद में हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए मध्यस्थता (मेडिएशन) के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। दोनों पक्षों का कहना है कि वे बातचीत के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए अंतिम फैसला चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों के शांतिपूर्ण समाधान की संभावना तलाशने के लिए 'समाधान समारोह-2026' पहल के तहत दोनों पक्षों को पत्र भेजकर मध्यस्थता के लिए सहमति मांगी थी। हालांकि, किसी भी पक्ष ने इसके लिए हामी नहीं भरी। यह पत्र कब भेजा गया था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट परिसर में 21 से 23 अगस्त तक 'समाधान समारोह-2026' के तहत विशेष लोक अदालत का आयोजन प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों का आपसी सहमति से समाधान निकालना है।
1. ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (वाराणसी)
विवाद क्या है?
वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं शताब्दी में मुगल शासक औरंगजेब ने यहां स्थित प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया था। मुस्लिम पक्ष इस दावे को स्वीकार नहीं करता और मस्जिद की कानूनी स्थिति बरकरार रखने की मांग करता है।
हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें
ज्ञानवापी परिसर को प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर घोषित किया जाए। परिसर में नियमित पूजा की अनुमति मिले। मिले धार्मिक अवशेषों को मंदिर का हिस्सा माना जाए।
मुस्लिम पक्ष की प्रमुख मांगें
ज्ञानवापी को मस्जिद के रूप में यथावत रखा जाए। पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत नए दावों को खारिज किया जाए। नमाज के अधिकार सुरक्षित रखे जाएं।
मौजूदा स्थिति: वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पूजा के अधिकार, एएसआई सर्वे, वजूखाना क्षेत्र और पूजा स्थल अधिनियम से जुड़े विभिन्न मामलों पर सुनवाई जारी है।
2. श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद (मथुरा)
विवाद क्या है?
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर बने मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुस्लिम पक्ष इस दावे से असहमत है और मस्जिद की वैधता बनाए रखने की मांग कर रहा है।
हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें
शाही ईदगाह मस्जिद हटाई जाए। विवादित भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपी जाए। मंदिर का पुनर्निर्माण कराया जाए।
मुस्लिम पक्ष की प्रमुख मांगें
मस्जिद की कानूनी स्थिति बरकरार रखी जाए। 1968 के समझौते और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का पालन किया जाए। सभी याचिकाएं खारिज की जाएं।
मौजूदा स्थिति : इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भूमि स्वामित्व, एएसआई सर्वे तथा 1968 के समझौते की वैधता से जुड़े कई मुकदमे लंबित हैं।
3. शाही जामा मस्जिद विवाद (संभल)
विवाद क्या है?
संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्राचीन हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुस्लिम पक्ष इस दावे को खारिज करते हुए मस्जिद को ऐतिहासिक और वैध धार्मिक स्थल बताता है।
हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें
मस्जिद का पुरातात्विक सर्वे कराया जाए। मंदिर के अवशेष मिलने पर मंदिर को बहाल किया जाए। हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया जाए।
मुस्लिम पक्ष की प्रमुख मांगें
मस्जिद की वर्तमान स्थिति बरकरार रखी जाए। सर्वे और नए मुकदमों पर रोक लगाई जाए। पूजा स्थल अधिनियम, 1991 लागू किया जाए।
मौजूदा स्थिति : चंदौसी सिविल कोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सर्वे, उसकी वैधता और अन्य संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।
अब आगे क्या होगा?
मध्यस्थता का प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद तीनों मामलों में नियमित न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। संबंधित अदालतों में दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और कानूनी दलीलें पेश करेंगे। यदि भविष्य में दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो अदालत दोबारा मध्यस्थता की संभावना पर विचार कर सकती है। फिलहाल इन विवादों का अंतिम समाधान अदालत के फैसले के बाद ही तय होगा।
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