दुबई में संपत्ति फ्रीज भारत में एलओसी फिर नए केस: सटोरिए सतीश सनपाल के साम्राज्य की तीन तरफा जांच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चार साल पहले जबलपुर पुलिस के अनुरोध पर जिस व्यक्ति के खिलाफ देश की सीमाओं पर नजर रखने के लिए लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया गया था, वही नाम अब दुबई की वित्तीय जांच और नए आपराधिक प्रकरणों के बीच फिर चर्चा में है।
सटोरिए सतीश सनपाल से जुड़े मामले अलग-अलग देशों और समय-सीमाओं में फैले हैं, लेकिन अब यह सवाल और तेज हो गया है क्या यह सब महज संयोग है या किसी संगठित वित्तीय संरचना के अलग-अलग हिस्से? दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में 2022 का एलओसी सामने आया है, यूएई से जुड़ी कथित संपत्ति फ्रीज कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं और जबलपुर में दर्ज नए मामले ने पुराने रिकॉर्ड को फिर जांच के दायरे में ला दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट में 4 फरवरी की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया था 5 अगस्त 2022 को एसपी जबलपुर के अनुरोध पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने सटोरिए सतीश सनपाल के खिलाफ एलओसी जारी किया था। अदालत ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया, हालांकि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।
अब इसी पुराने एलओसी के साथ हालिया घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। यूएई में सामने आए कथित दस्तावेजों में बैंक खातों, वित्तीय और अन्य परिसंपत्तियों पर अस्थायी रोक लगाए जाने का उल्लेख होने का दावा किया गया है। इन दस्तावेजों में सनपाल, उसकी पत्नी तबिंदा सनपाल और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम शामिल होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इन दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है क्या यह एक समन्वित जांच का हिस्सा है या अलग-अलग देशों की अलग-अलग कार्यवाई?
एक ओर कोर्ट रिकॉर्ड दूसरी ओर खंडन किस पर भरोसा किया जाए?
सनपाल की ओर से सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में इन खबरों को भ्रामक बताया गया है। उसका कहना है व्यवसाय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और उसकी कंपनियां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं।इस प्रकार, फिलहाल स्थिति दो अलग-अलग पक्षों में बंटी हुई है। सरकारी रिकॉर्ड और जांच से जुड़े दावे बनाम सनपाल का सार्वजनिक खंडन। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है सब कुछ सामान्य है, तो फिर अलग-अलग देशों में एक ही नाम को लेकर वित्तीय और कानूनी हलचल क्यों दिखाई दे रही है?
जांच का केंद्र वित्तीय लेन-देन या कोई बड़ा पैटर्न?
जांच एजेंसियां इन मामलों को एक संभावित नेटवर्क के रूप में देखती हैं, तो सरोरिए सनपाल के बैंकिंग ट्रांजैक्शन, कंपनियों की वास्तविक गतिविधियों, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन, संपत्ति स्वामित्व और अंतिम लाभार्थियों की पहचान पर केंद्रित हो सकता है। सबसे पहले यह स्पष्ट करना होगा 2022 में एलओसी किस मूल मामले के आधार पर जारी किया गया था और वर्तमान में उस प्रकरण की स्थिति क्या है। इसके बाद यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नए जबलपुर मामले और यूएई में कथित वित्तीय कार्रवाई के बीच समान नाम, खाते, कंपनियां या लेन-देन मौजूद हैं या यह केवल अलग-अलग फाइलों का ऐसा मेल है, जिसे अभी जोड़कर देखा जा रहा है।
चार साल पुरानी फाइल फिर चर्चा में क्यों और क्यों बढ़ रहे हैं सवाल?
सटोरिए सनपाल के लिए एलओसी नया नहीं है, लेकिन इसके साथ जुड़े हालिया घटनाक्रम ने इसे फिर प्रासंगिक बना दिया है। क्या यह इसलिए है कि नए सबूत सामने आए हैं, या इसलिए कि पुराने रिकॉर्ड अब नए संदर्भ में पढ़े जा रहे हैं? यदि पुराने मामले, नए प्रकरण और यूएई से जुड़े दावों के बीच दस्तावेजी संबंध स्थापित होता है, तो जांच का दायरा सट्टेबाजी से आगे बढ़कर बड़ा लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय संपत्ति नेटवर्क तक जा सकता है। यही वह बिंदु है जहां यह मामला अधिक जटिल और संवेदनशील हो जाता है। फिलहाल किसी भी अदालत ने सतीश सनपाल को इन आरोपों में दोषी नहीं ठहराया है। लेकिन कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज एलओसी, नए प्रकरण और यूएई से जुड़े दावों ने स्पष्ट कर दिया है अब जांच का मुख्य केंद्र केवल आरोप नहीं, बल्कि वह वित्तीय प्रवाह है, जो इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
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