राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की तैयारी: चंपत राय का अयोध्या से जाना तय; दिल्ली में मिलेगी नई जिम्मेदारी, नृपेंद्र मिश्रा बन सकते हैं महासचिव या सीईओ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
अब 11 जुलाई को अयोध्या स्थित मणिराम दास जी की छावनी में होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों के त्यागपत्र स्वीकार किए जाने की पूरी संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे स्वीकार होने के बाद चंपत राय का अयोध्या से हटना लगभग तय माना जा रहा है। उन्हें विश्व हिंदू परिषद के दिल्ली स्थित मुख्यालय में नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
वहीं ट्रस्ट के निर्माण कार्य से जुड़े गोपाल राव को भी अयोध्या से हटाकर पश्चिम भारत में संगठनात्मक दायित्व देने की तैयारी है। दूसरी ओर, डॉ. अनिल मिश्रा को ट्रस्ट से हटाए जाने के बाद किसी प्रमुख जिम्मेदारी में शामिल किए जाने की संभावना फिलहाल नहीं बताई जा रही है।
11 जुलाई की बैठक में होगा नए ढांचे पर मंथन
ट्रस्ट की आगामी बैठक में राम मंदिर के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नया प्रबंधन ढांचा प्रस्तुत किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि मंदिर के बेहतर संचालन के लिए सुझाव देंगे और ट्रस्ट की सहमति के बाद नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जा सकती है। इसी बैठक में नए महासचिव और ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों के नामों पर भी चर्चा होगी तथा घोषणा किए जाने की संभावना है।
महासचिव पद के लिए तीन नाम चर्चा में
महासचिव पद के लिए कई नामों पर विचार किया जा रहा है। इनमें राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि और ट्रस्टी कृष्णमोहन प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता है कि ट्रस्ट के महासचिव का पद संघ के पूर्णकालिक और अनुभवी कार्यकर्ता के पास ही रहे। ऐसे व्यक्ति की तलाश की जा रही है, जिसकी संत समाज में स्वीकार्यता हो, संगठनात्मक अनुभव मजबूत हो और जिसकी छवि ईमानदार तथा मिलनसार हो।
हालांकि नृपेंद्र मिश्रा के नाम पर ट्रस्ट के सभी सदस्यों में अभी पूर्ण सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में अंतिम निर्णय में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह भी चर्चा है कि यदि उन्हें महासचिव नहीं बनाया गया तो उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया जा सकता है।
संघ और विहिप की भूमिका रहेगी अहम
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद दोनों ही राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखना चाहते हैं। इसी कारण महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर संघ से जुड़े अनुभवी व्यक्ति की नियुक्ति की संभावना अधिक मानी जा रही है। मंदिर निर्माण समिति में अब तक सक्रिय रहे नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका भी भविष्य में और व्यापक हो सकती है।
इस्तीफे को लेकर 30 घंटे तक रही चुप्पी
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने 26 जून को अपने इस्तीफे सौंप दिए थे, लेकिन ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद ने करीब 30 घंटे तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। इस दौरान दोनों संगठनों के पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से इस विषय पर टिप्पणी करने से बचते रहे। यहां तक कि डॉ. अनिल मिश्रा ने भी मीडिया से बातचीत में इस्तीफे की बात से इनकार किया था।
केजरीवाल दौरे के कारण टाली गई घोषणा
सूत्रों के मुताबिक, जिस दिन इस्तीफे दिए गए, उसी दिन आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का अयोध्या दौरा प्रस्तावित था। ऐसे में संगठन और सरकार स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि इस्तीफों की घोषणा तत्काल न की जाए, ताकि इस घटनाक्रम का राजनीतिक लाभ किसी अन्य दल को न मिल सके।
हालांकि बाद में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के बयानों से बदलाव के संकेत मिलने लगे थे। अब ट्रस्ट ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है और 11 जुलाई की बैठक को राम मंदिर ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
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