राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में FIR की तैयारी: 150 संदिग्धों की जांच पूरी, इतने लोगों को बनाया जा सकता है आरोपी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों के आधार पर अगले 24 से 48 घंटे में एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार SIT ने छह दिनों की जांच में बड़ी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए हैं। टीम ने जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को सात पेन ड्राइव में सुरक्षित किया है। अब तक करीब 150 संदिग्ध व्यक्तियों के नाम जांच के दायरे में आए हैं, जिनमें से लगभग 25 लोगों के खिलाफ प्रत्यक्ष कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
80 लोगों को बनाया जा सकता है नामजद
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि प्रस्तावित एफआईआर में करीब 80 लोगों को नामजद किया जा सकता है। इनमें राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी, कर्मचारी और दान प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और अनुकल्प मिश्रा का नाम भी जांच में प्रमुखता से सामने आया है। टिन्नू यादव को ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता है और वह मंदिर में दान राशि की गणना एवं उससे जुड़े कार्यों की निगरानी करता था। आरोप है कि उसके निर्देश पर कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज हटाई गई। वहीं अनुकल्प मिश्रा भी मंदिर प्रशासन से जुड़ा कर्मचारी बताया जा रहा है।
जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश
SIT जिन लोगों से पूछताछ कर चुकी है, उन्हें फिलहाल अयोध्या छोड़कर बाहर नहीं जाने की मौखिक चेतावनी दी गई है। इनमें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित कई प्रमुख नाम शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि आगे की पूछताछ में इन लोगों की जरूरत पड़ सकती है।
मंदिर निर्माण प्रभारी के अयोध्या छोड़ने की चर्चा
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े प्रभारी गोपाल राव कथित तौर पर अयोध्या छोड़कर कर्नाटक चले गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने जांच एजेंसी को इसकी आधिकारिक सूचना दी थी या नहीं। उनसे संपर्क करने के प्रयास किए गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
सीता रसोई ट्रस्ट की भी होगी जांच
जांच एजेंसियों का फोकस अब उन अन्य संस्थाओं और ट्रस्टों पर भी है, जिनके माध्यम से दान राशि एकत्र की गई। इसी क्रम में "सीता रसोई ट्रस्ट" के गठन, उसके बैंक खातों और प्राप्त दान की राशि की भी पड़ताल शुरू की गई है। जांच अधिकारियों को ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन में कुछ ऐसे बिंदु मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है।
महाकुंभ के दौरान मिले दान पर भी उठे सवाल
जांच टीम प्रयागराज महाकुंभ के दौरान राम मंदिर के नाम पर प्राप्त दान राशि की भी समीक्षा कर रही है। अधिकारियों को संदेह है कि श्रद्धालुओं से प्राप्त वास्तविक दान और रिकॉर्ड में दर्ज राशि के बीच अंतर हो सकता है। इसी वजह से उस अवधि के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और दान संग्रह व्यवस्था की दोबारा जांच की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में भी गरमाया मामला
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा सबसे पहले समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि मंदिर की दान राशि में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। विवाद बढ़ने पर भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने राम मंदिर ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।
आज की रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब सभी की नजर SIT की उस प्रारंभिक रिपोर्ट पर है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जानी है। रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर, आगे की जांच और संभावित गिरफ्तारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रशासनिक ढांचे के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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