अब गृह तहसील में इनकी नहीं होगी पोस्टिंग: नए जिले से तय होगी वरिष्ठता
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश राजस्व विभाग ने पटवारी संविलयन नीति-2026 जारी कर दी है। सामान्य तबादला अवधि समाप्त होने से ठीक पहले आई इस नीति में पटवारियों के अंतर-जिला संविलयन (मर्जर/स्थानांतरण) के लिए विस्तृत नियम तय किए गए हैं।
पटवारी की पदस्थापना अब ऐसे होगी
नई व्यवस्था के तहत किसी भी पटवारी की पदस्थापना उसकी गृह तहसील में नहीं की जाएगी। वहीं संविलयन के बाद संबंधित पटवारी की वरिष्ठता नए जिले की सीनियरिटी सूची के अनुसार तय होगी।
जिला संवर्ग होने के कारण बनाई गई अलग नीति
राजस्व विभाग के अनुसार पटवारी का पद जिला संवर्ग का होता है। इसलिए सामान्य तबादला नीति सीधे तौर पर लागू नहीं होती। इसी कारण अंतर-जिला संविलयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए अलग नीति जारी की गई है।
कौन कर सकेंगे आवेदन
नई नीति के अनुसार पटवारी भर्ती परीक्षा-2022 के परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए पटवारी अंतर-जिला संविलयन के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा 2022 बैच के पटवारियों को भी कुछ विशेष परिस्थितियों में आवेदन का अवसर दिया जाएगा।
2022 बैच के पटवारियों को इन मामलों में मिलेगी राहत
राजस्व विभाग ने कुछ विशेष श्रेणियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया है। इनमें पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में होने की स्थिति हों, विवाहित महिला पटवारी, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिला पटवारी, कैंसर, किडनी रोग, डायलिसिस या ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारी आपसी सहमति से संविलयन चाहने वाले पटवारी शामिल हैं। ऐसे मामलों में रिक्त पद उपलब्ध होने पर संविलयन पर विचार किया जाएगा।
जिले के भीतर पदस्थापना का अधिकार कलेक्टर को रहेगा
नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि किसी भी पटवारी को उसकी गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। संविलयन के बाद जिले के भीतर पदस्थापना का अधिकार कलेक्टर को रहेगा, लेकिन गृह तहसील में नियुक्ति पर प्रतिबंध लागू रहेगा।
वरिष्ठता पुराने जिले के आधार पर नहीं मानी जाएगी
संविलयन के बाद संबंधित पटवारी की वरिष्ठता पुराने जिले के आधार पर नहीं मानी जाएगी। उसकी सीनियरिटी नए जिले की संधारित वरिष्ठता सूची के अनुसार तय होगी। यानी नए जिले में उसे उसी सूची के अनुसार स्थान मिलेगा।
परिवीक्षा और सेवा रिकॉर्ड भी होगा ट्रांसफर
जिन पटवारियों का संविलयन होगा, उनकी परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) से संबंधित कार्रवाई नए जिले में पूरी की जाएगी। साथ ही पुराने जिले से व्यक्तिगत सेवा अभिलेख, विभागीय जांच, दंड एवं अन्य रिकॉर्ड नए जिले को हस्तांतरित किए जाएंगे।
ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया
संविलयन के लिए आवेदन आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन, मध्यप्रदेश द्वारा निर्धारित ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से लिए जाएंगे। आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक का उल्लेख करना होगा। नीति में स्पष्ट किया गया है कि आवेदन के साथ किसी प्रकार के दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इन मामलों में नहीं मिलेगा लाभ
जिन पटवारियों के विरुद्ध लोकायुक्त, आपराधिक प्रकरण या गंभीर जांच लंबित है, उन्हें संविलयन प्रक्रिया के लिए अपात्र माना जाएगा।
रिक्त पद होने पर ही मिलेगा जिला
संविलयन केवल उसी जिले में किया जाएगा जहां संबंधित वर्ग और श्रेणी का पद रिक्त होगा। पूरी प्रक्रिया आरक्षण नियमों और जिला रोस्टर के अनुरूप संचालित की जाएगी।
आदेश के बाद 15 दिन में देनी होगी जॉइनिंग
संविलयन आदेश जारी होने के बाद संबंधित पटवारी को 15 दिनों के भीतर नए जिले में कार्यभार ग्रहण करना होगा। एक बार जिला आवंटित होने के बाद दोबारा जिला परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी।
आरक्षण नियमों का होगा सख्ती से पालन
राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि संविलयन के दौरान किसी भी जिले में आरक्षित पदों की सीमा या रोस्टर व्यवस्था का उल्लंघन नहीं किया जाएगा। सभी नियुक्तियां निर्धारित आरक्षण प्रावधानों के अनुसार ही होंगी।
क्या होगा असर?
नई संविलयन नीति से अंतर-जिला स्थानांतरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नियमबद्ध होगी। गृह तहसील में पोस्टिंग पर रोक, नई वरिष्ठता व्यवस्था और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जैसे प्रावधान आने वाले समय में बड़ी संख्या में पटवारियों को प्रभावित करेंगे।
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