36 घंटे बाद मिला पेट्रोकेमिकल मैनेजर का शव: नर्मदा पुल पर छोड़ी कार; लाल रंग के बैग में दवाइयां और जिम्मेदारी वाला नोट मिला
KHULASA FIRST
संवाददाता

भैया' बेटी अब आपकी जिम्मेदारी'
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खरगोन जिले में नर्मदा पुल पर लावारिस मिली एक कार, उसमें लाल रंग का बैग, दवाइयां और एक ऐसा नोट जिसने पूरे परिवार को झकझोर दिया। करीब 36 घंटे चली तलाश के बाद आखिरकार इंदौर की पेट्रोकेमिकल कंपनी में मैनेजर 50 वर्षीय निशांत जोशी का शव बुधवार दोपहर मंडलेश्वर के गांधी नगर क्षेत्र में नर्मदा से बरामद कर लिया गया।
सोमवार को घर से दफ्तर जाने का कहकर निकले निशांत लापता हो गए थे। रात में उनकी कार नर्मदा पुल पर लावारिस मिली थी। पुलिस, एसडीईआरएफ और गोताखोर लगातार नदी में तलाश कर रहे थे। बुधवार दोपहर कचरे के बीच उनका शव दिखाई दिया, जिसे रेस्क्यू टीम ने निकाला।
मूल रूप से हरदा निवासी निशांत जोशी तीन दशक से राजेंद्र नगर क्षेत्र में रह रहे थे। इंदौर स्थित हैवनॉल पेट्रोकेमिकल कंपनी में मैनेजर थे और कंपनी के महत्वपूर्ण फील्ड कार्यों की जिम्मेदारी संभालते थे। 22 जून को दोपहर करीब एक बजे घर से निकले थे।
परिजनों को बताया था कार्यालय जा रहे हैं, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। देर रात मंडलेश्वर पुलिस को कसरावद रोड स्थित नर्मदा पुल पर उनकी कार लावारिस मिली। कार से मिले दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। अगले दिन गुमशुदगी दर्ज कराई गई और तलाश अभियान शुरू हुआ।
दो मोबाइल नंबर बनेंगे पुलिस जांच का हिस्सा
तलाशी के दौरान पुलिस को कार से लाल बैग मिला। उसमें कपड़े और दवाइयां थीं। हस्तलिखित नोट भी बरामद हुआ, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। नोट में लिखा है डियर विवेक भैया, आशी की मेंटली, फिजिकली, फायनेंसियली जिम्मेदारी अब आपकी और भाभी की। नोट में दो मोबाइल नंबर भी लिखे थे। पुलिस ने इसे जांच का हिस्सा बनाया है।
पत्नी नारकोटिक्स एसपी, बेटी भोपाल में छात्रा
निशांत जोशी का परिवार प्रशासनिक और पेशेवर रूप से प्रतिष्ठित माना जाता है। उनकी पत्नी स्मिता जोशी मंदसौर जिले के गरोठ में नारकोटिक्स विभाग में एसपी हैं, जबकि बेटी आशी भोपाल में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है। शव मिलने की सूचना मिलते ही स्मिता जोशी, बेटी आशी, चचेरे भाई डॉ. विवेक जोशी और परिजन मंडलेश्वर पहुंचे।
कंपनी की कार से करते थे सफर
पुलिस के अनुसार जिस कार में निशांत सफर कर रहे थे, वह उनकी कंपनी के मालिक शैलेंद्र भंडारी के नाम पर पंजीकृत है। कंपनी के कामकाज के सिलसिले में निशांत नियमित रूप से इसी वाहन का उपयोग करते थे।आमतौर पर उनके साथ ड्राइवर भी रहता था, लेकिन घटना वाले दिन अकेले निकले थे। उनका कार्यक्षेत्र धामनोद, महेश्वर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैला हुआ था।
मानसिक अवसाद से जूझ रहे थे
निशांत काफी समय से मानसिक अवसाद से जूझ रहे थे। उनका इलाज भी चल रहा था। चचेरे भाई डॉ. विवेक जोशी की देखरेख में उपचार किया जा रहा था। परिवार का कहना है पहले भी घर छोड़कर जा चुके थे और अतीत में आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश भी कर चुके थे।
उनके करीबी मित्र आशीष गंगराड़े ने बताया सोमवार शाम तक उनकी बातचीत हुई थी। जो सामान्य लगी और ऐसा नहीं लगा था कोई गंभीर कदम उठा सकते हैं।
परिजनों को सौंपा शव : मंडलेश्वर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। परिवार अंतिम संस्कार के लिए शव को हरदा ले गया, जहां आज सुबह अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है परिस्थितियों, बरामद नोट और अन्य तथ्यों को जांच में शामिल किया गया है।
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