पम्मी बनाम जैन: यशवंत क्लब की बंद दीवारों के पीछे वर्चस्व की कल बड़ी जंग; सबसे रसूखदार चुनाव में त्रिकोणीय सस्पेंस का हाई-वोल्टेज ड्रामा
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौर का ‘पॉवर कॉरिडोर': सत्ता परिवर्तन की बेला, ‘प्रतिष्ठा’ और ‘विरासत' की जंग
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मालवा के दिल इंदौर में जब यशवंत क्लब के चुनावों की तारीख नजदीक आती है, तो शहर के संभ्रांत और कुलीन वर्गों में हलचल सिर्फ एक क्लब की कमेटी तक सीमित नहीं रहती। यह इंदौर के सबसे रसूखदार पांच हजार से अधिक सदस्यों के बीच सामाजिक वर्चस्व, प्रतिष्ठा और ‘पॉवर गेम' का मैदान बन जाता है।
28 जून को होने जा रहे इस बार के चुनाव बेहद असाधारण हैं। इस बार क्लब की कमान संभालने वाले दो सबसे बड़े नाम निवर्तमान चेयरमैन मंजीत सचदेवा (टोनी)और सचिव संजय गोरानी लगातार दो कार्यकाल पूरे करने की संवैधानिक बाध्यता के कारण खुद मैदान में नहीं हैं। नेतृत्व परिवर्तन के इस मोड़ पर क्लब की राजनीति एक नए और दिलचस्प त्रिकोणीय मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है।
महाराजा के आदेश से कुलीनों का ठिकाना
यशवंत क्लब का इतिहास इंदौर की रियासतकालीन पहचान से जुड़ा है। क्लब की स्थापना 1934 में इंदौर के महाराजा सर तुकोजीराव होलकर तृतीय के आदेश पर हुई थी। नाम तत्कालीन होलकर महाराजा यशवंतराव होलकर द्वितीय के नाम पर रखा गया था।
शुरुआती दौर में इसके दरवाजे केवल राजपरिवार, कुलीन वर्ग, और होलकर राज्य के शीर्ष अधिकारियों के लिए ही खुले थे। समय के साथ इसमें शहर के बड़े व्यापारिक घरानों, उद्योगपतियों और संभ्रांत नागरिकों को प्रवेश मिला। आज भी महारानी उषा देवी क्लब की मुख्य संरक्षक हैं।
चुनावी समीकरण: दो पैनलों में आर-पार, ‘पीला' बनाम ‘सफेद’ का इतिहास
यशवंत क्लब के चुनावों की रंगत किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं होती। पिछले चुनावों में जहां पम्मी छाबड़ा पैनल ‘पीले’ कपड़ों में और टोनी सचदेवा पैनल ‘सफेद’ परिधानों में अपनी एकजुटता दिखाता नजर आया था, वही पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता इस बार भी मैदान में है। पिछले 14 वर्षों से क्लब की सत्ता मुख्य रूप से टोनी सचदेवा और पम्मी छाबड़ा के इर्द-गिर्द घूमती रही है (टोनी सचदेवा 6 बार चेयरमैन और दो बार सचिव रह चुके हैं)।
चूंकि इस बार सचदेवा-गोरानी टीम खुद चुनाव नहीं लड़ सकती, इसलिए उन्होंने ‘जैन पैनल' को आगे कर अपनी विरासत को बचाने की कमान सौंपी है। वहीं दूसरी तरफ, पिछली हार का बदला लेने और क्लब की सत्ता में वापसी के लिए पम्मी छाबड़ा पैनल ने पूरी ताकत झोंक दी है।
प्रशासनिक और खेल गतिविधियों का सिरमौर
प्रशासनिक और खेल गतिविधियों के मामले में यह क्लब मध्य भारत का सिरमौर है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस, स्क्वैश, बैडमिंटन कोर्ट, आधुनिक जिम, स्विमिंग पूल और एक विशाल क्रिकेट मैदान है, जहां सालभर खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों की धूम रहती है।
कार्यकारिणी में भी सेंध
कार्यकारिणी के 5 पदों के लिए दोनों पैनलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन यहां भी निशांत तिवारी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर एंट्री मारकर मुकाबले को बहुकोणीय और अनिश्चित बना दिया है।
विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी सियासत
इस कुलीन क्लब की बंद दीवारों के पीछे चुनावी कड़वाहट भी कम नहीं रही है। किसी जमाने में बेहद करीबी दोस्त रहे टोनी सचदेवा और पम्मी छाबड़ा क्लब की राजनीति के चलते आमने-सामने आ गए। क्लब के भीतर होने वाली ‘तंबोला पार्टियों' और लॉबिंग के दौरान वरिष्ठ सदस्यों के बीच तीखी झड़पें और विवाद हमेशा से चुनावी मुद्दा बनते आए हैं।
पिछले चुनावों में भी ऐन वक्त पर हुई कुछ झड़पों का असर वोटिंग पैटर्न पर साफ देखा गया था। आरोप-प्रत्यारोप, सफाई और अटकलों के बीच इस बार भी दोनों पैनलों के सदस्य और समर्थक क्लब के मतदाताओं को लुभाने और एक-दूसरे की रणनीतियों को काटने में लगे हैं।
सचिव पद का त्रिकोणीय सस्पेंस
बास्केटबॉल महासंघ के पदाधिकारी और पूर्व सितारा खिलाड़ी कुलविंदर सिंह गिल सचिव पद से लड़ना चाहते थे। जब किसी भी पैनल ने उन्हें जगह नहीं दी, तो उन्होंने निर्दलीय पर्चा भर दिया। अब वे जैन पैनल के विजय कस्तूरी और पम्मी पैनल के अतुल सेठ के सामने मजबूत त्रिकोणीय चुनौती पेश कर रहे हैं।
एक ही दिन में फैसला- चुनाव अधिकारी द्वारा अंतिम सूची जारी किए जाने के बाद अब प्रचार अपने चरम पर है। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार मतदान 28 जून को सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से काउंटिंग शुरू होगी और देर रात तक स्थिति साफ हो जाएगी कि महाराजाओं के इस ऐतिहासिक क्लब के सिंहासन पर इस बार इंदौर का संभ्रांत वर्ग किसे बिठाता है।
मुख्य रूप से दो पैनल हैं आमने-सामने
इस बार 9 पदों के लिए मुकाबला है, जिसमें मुख्य रूप से दो पैनल आमने-सामने हैं। इस बार वोटरों की संख्या बढ़कर पांच हजार से अधिक हो चुकी है, जिससे मतदान प्रतिशत अच्छा रहने की उम्मीद है।
जैन पैनल (सचदेवा-गोरानी समर्थित टीम)
चेयरमैन: जितेंद्र जैन
सचिव: विजय कस्तूरी
सह सचिव: तेजवीर जुनेजा
कोषाध्यक्ष: रूपल पारिख
कार्यकारिणी सदस्य (5 पद): वैभव दुआ, गुनीत चड्ढा, राजेश तलवार, भारती बरोड़िया और आशुतोष कौशिक।
पम्मी छाबड़ा पैनल
चेयरमैन: पम्मी छाबड़ा (परमजीत सिंह छाबड़ा)
सचिव: अतुल सेठ
सह सचिव: पंकज कुकरेजा
कोषाध्यक्ष: सतीश मंगलानी
कार्यकारिणी सदस्य (5 पद): अमृत देव, सौरभ भंडारी, बाॅबी थम्मन, कुणाल कासलीवाल और शिखर वर्मा।
निर्दलीय दिग्गजों ने बिगाड़ा गणित: सचिव पद पर त्रिकोणीय मुकाबला
इस चुनाव का सबसे रोमांचक मोड़ निर्दलीय उम्मीदवारों की एंट्री से आया है, जिसने दोनों ही पैनलों के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।
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