गधे के नाम पर नर्सिंग सर्टिफिकेट!: फोटो भी लगाई; फीस भरते ही 5 मिनट में जारी हुआ रजिस्ट्रेशन नंबर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं।
इस बार एक कथित डेमो आवेदन में गधे के नाम, फोटो और मनमानी जानकारी के आधार पर नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने का दावा किया गया है।
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने काउंसिल की ऑनलाइन व्यवस्था में कथित खामियों की जांच के लिए यह आवेदन किया था।
आवेदन में आवेदक के नाम से लेकर माता-पिता के नाम और जाति तक में ऐसी जानकारी दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि यह वास्तविक उम्मीदवार का आवेदन नहीं था। इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने का दावा किया गया है।
नाम ‘डंकी’, फोटो गधे की... फिर भी हो गया रजिस्ट्रेशन
रवि परमार के मुताबिक, ऑनलाइन आवेदन में आवेदक के नाम में ‘डंकी’ लिखा गया। फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर अपलोड की गई।
पिता के नाम में ‘डंकी फादर’ और माता के नाम में ‘डंकी मदर’ लिखा गया। जाति के कॉलम में ‘एनिमल’ दर्ज किया गया। पता और अन्य जानकारियां भी मनमाने तरीके से भरी गईं। इसके बावजूद आवेदन ऑनलाइन प्रक्रिया में आगे बढ़ गया और नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया।
10वीं-12वीं के नंबर भी मनमाने, दस्तावेजों की जगह ब्लैंक पेपर
परमार का दावा है कि आवेदन में ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर भोपाल नर्सिंग कॉलेज और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) का नाम दर्ज किया गया।
10वीं और 12वीं के अंक तथा रोल नंबर भी मनमाने तरीके से भरे गए। ट्रेनिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डिग्री/डिप्लोमा सर्टिफिकेट के स्थान पर दो ब्लैंक पेपर अपलोड किए गए। इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए 2,500 रुपए फीस जमा की गई।
फीस जमा करने के करीब 5 मिनट बाद जारी हुआ सर्टिफिकेट
रवि परमार के मुताबिक, फीस का ऑनलाइन भुगतान करने के करीब पांच मिनट बाद ही नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया।
परमार ने इसका वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में कथित तौर पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिखाई देता है, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर और डिजिटल साइन मौजूद होने का दावा किया गया है।
बिना दस्तावेज सत्यापन के रजिस्ट्रेशन का आरोप
NSUI नेता ने सवाल उठाया कि जब आवेदन में नाम, फोटो और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी ही स्पष्ट रूप से संदिग्ध थी, तो सिस्टम ने इसे किस स्तर पर स्वीकार किया और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट कैसे जारी हो गया।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि वास्तविक उम्मीदवारों के दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना रजिस्ट्रेशन जारी हो सकते हैं, तो इस व्यवस्था का फर्जी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है।
MPNRC और MP Online की भूमिका पर उठे सवाल
परमार ने मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आवेदन किस स्तर पर सत्यापित हुआ, किस अधिकारी या सिस्टम से स्वीकृति मिली और सर्टिफिकेट किस प्रक्रिया के तहत जनरेट हुआ। उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था संचालित करने वाली MP Online की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
परमार के अनुसार, मामले को लेकर MPNRC अध्यक्ष बीनू कुशवाह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
NSUI ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि काउंसिल की ऑनलाइन व्यवस्था में इतनी बड़ी खामी है तो इसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
परमार ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो NSUI की ओर से आंदोलन किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि एक स्पष्ट रूप से संदिग्ध आवेदन ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया से कैसे गुजर गया और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट किस आधार पर जारी हुआ। इसका जवाब MPNRC की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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