नवीन टीम पुराना संघ: पुराने प्रचारकों के ही हवाले नई भाजपा
KHULASA FIRST
संवाददाता

नितिन नबीन के नूतन संगठन ढांचे के लिए आरएसएस ने नहीं दिए नए प्रचारक..!
नई कार्यकारिणी में बीएल संतोष, शिव प्रकाश का रिपीट होना क्या आरएसएस की नाराजगी बता रहा है?
2024 लोकसभा चुनाव के बाद से ही आरएसएस ने अपनी राजनीतिक शाखा में नए प्रचारक देने से हाथ खींच रखे हैं
प्रचारकों की कमी के कारण ही कई राज्यों में भाजपा संगठन महामंत्री के पद हैं खाली, मध्य प्रदेश भी उनमें से एक है
सौदान सिंह की वापसी से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के पुराने नेता-कार्यकर्ताओं ने ली राहत की सांस, सिंह का इन दोनों राज्यों से है गहरा नाता
जेपी नड्डा के बयान के बाद से ही थमा है पार्टी में आरएसएस के प्रचारकों की आमद का सिलसिला
आरएसएस के नए सांगठनिक ढांचे ने भी रोक रखी है प्रचारकों की राह, पहले संघ अपनी रचना पर कर रहा फोकस
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लोकसभा-2024 के चुनाव के बाद से क्या आरएसएस की भाजपा से नाराजगी अब तक दूर नहीं हुई? या आरएसएस ने स्वयं को चाक-चौबंद करने के कारण भाजपा को उसके हाल पर छोड़ रखा है? ये दोनों सवाल भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष की घोषित हुई टीम के बाद आरएसएस व भाजपा के हलकों में एक समान गूंज रहे हैं। कारण है भाजपा पर संघ की कमान वाले संगठन महामंत्री पद पर कोई फेरबदल न होना।
हालांकि इस पद पर रद्दोबदल आरएसएस की रजा पर ही होता है। भाजपा इसमें दखल नहीं देती। लिहाजा उम्मीद थी कि ‘नवीन टीम’ के लिए आरएसएस भाजपा को ‘नूतन’ प्रचारक की रसद भेजेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
भाजपा को फिलहाल बीएल संतोष व उनके सहयोगी शिव प्रकाश के जरिये ही ‘संतोष’ करना होगा। बस, सौदान सिंह के जरिये ही एक बदलाव हुआ है और वे बीएल के सहयोगी के रूप में तैनात किए गए हैं। सौदान सिंह के आने से मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के पुराने नेता और कार्यकर्ता राहत में हैं, लेकिन सिंह भी पहले से ही संघ की तरफ से भाजपा में ही हैं।
यानी आरएसएस ने कोई नया प्रचारक या पदाधिकारी भाजपा को नहीं दिया। आमतौर पर परिपाटी के अनुसार भाजपा में संगठन महामंत्री और इस पद के जरिये पार्टी की कमान आरएसएस के हाथों में रहती है, लेकिन कई राज्यों में ये पद भी अरसे से रिक्त है।
मध्य प्रदेश भी उनमें से एक है। हितानंद शर्मा की रवानगी के बाद क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल से ही भाजपा का काम चल रहा है। इससे साफ होता जा रहा है कि संघ ने अपने पुराने प्रचारकों के जरिये ही, जो पहले से भाजपा में हैं, काम चला रहा है।
बताता जा रहा है कि आरएसएस पहले अपनी ‘नवीन रचना’ के अनुरूप प्रचारकों की तैनाती पर फोकस किए हुए है। उसके बाद ही भाजपा को नए प्रचारकों की ‘रसद’ मिल पाएगी। तब तक ‘नवीन टीम’ को ‘पुराने संघ’ से ही काम चलाना होगा।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अगुआई में घोषित की गई नई संगठनात्मक टीम में बीएल संतोष (राष्ट्रीय संगठन महामंत्री) और शिव प्रकाश (राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री) को उनके पदों पर बरकरार रखने के पीछे कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांगठनिक कारण हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह सांगठनिक निरंतरता है। नितिन नबीन भाजपा के अब तक के सबसे युवा अध्यक्षों में से एक हैं। जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव कर नए और युवा चेहरों को आगे लाया जा रहा हो, तब पार्टी पूरे सांगठनिक ढांचे को एक साथ नहीं बदलना चाहती थी। नए अध्यक्ष के साथ काम सुचारु रूप से चलता रहे, इसके लिए बीएल संतोष के लंबे सांगठनिक अनुभव की आवश्यकता थी।
बीएल संतोष व शिवकुमार की जुगलजोड़ी को यथावत रखे जाने के पीछे का एक प्रमुख कारण आगामी चुनाव और चक्रव्यूह तैयार करना है। आगे देश के कई राज्यों में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें उत्तर प्रदेश व गुजरात सबसे अहम हैं।
पंजाब भी जीतने में पार्टी जी-जान से जुटी हुई है। चुनावी रणनीति बनाने, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और टिकटों के बंटवारे में अंतिम निर्णय लेने के लिए भाजपा आलाकमान को बीएल संतोष के कुशल चुनावी प्रबंधन और कड़क प्रशासनिक शैली पर पूरा भरोसा है।
बीएल संतोष को आरएसएस और भाजपा के बीच मजबूत सेतु माना जाता है। संगठन महामंत्री का पद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के बीच समन्वय की सबसे अहम कड़ी होता है। बीएल संतोष और शिव प्रकाश दोनों ही संघ के प्रति पूरी तरह समर्पित और वैचारिक रूप से मजबूत चेहरा माने जाते हैं।
संघ की शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों की निरंतरता और समन्वय के लिहाज से भी इन्हें बनाए रखना जरूरी समझा गया। इसके अलावा शीर्ष नेतृत्व का अटूट विश्वास भी अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। बीएल संतोष और शिव प्रकाश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है।
जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर और बूथ नेटवर्क को मजबूत करने में इनके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने इन पर दोबारा भरोसा जताया है। पार्टी के भीतर यह संदेश साफ है कि भले ही राजनीतिक चेहरे या अध्यक्ष बदलते रहें, लेकिन भाजपा के सांगठनिक और वैचारिक ताने-बाने की कमान अनुभवी और मजबूत रणनीतिकारों के हाथों में ही सुरक्षित रखी गई है।
क्या नड्डा के बयान की गूंज आज तक है बरकरार..?
आरएसएस हलकों में पूर्व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान की गूंज आज तक बरकरार है? ये सवाल नितिन नबीन की नई टीम को पुराने प्रचारकों के हवाले ही करने पर सामने आ रहा है। तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा ने यह बयान 18 मई 2024 को एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू के दौरान दिया था।
लोकसभा चुनाव-2024 के बीच आए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि पहले पार्टी सक्षम नहीं थी तो आरएसएस की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब भाजपा बड़ी और सक्षम हो गई है तथा अपने आप पार्टी को चलाती है। नड्डा ने कहा था, ‘शुरू में हम अक्षम होंगे, थोड़ा कम होंगे, आरएसएस की जरूरत पड़ती थी, आज हम बढ़ गए हैं, सक्षम हैं, तो भाजपा अपने आप को चलाती है। संघ की तरफ से बाद में इसे लेकर प्रतिक्रिया आई थी, जिसमें इसे एक ‘पारिवारिक मामला’ बताया गया था।
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