30 सेकंड लेट हुए तो छूटी नीट परीक्षा: गेट पर रोते रहे छात्र; कड़े नियमों का असर, कलावा कटवाया, नंगे पैर पहुंचे केंद्र
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल/इंदौर/ग्वालियर/जबलपुर।
मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित NEET-UG री-एग्जाम 2026 के दौरान मध्यप्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त नियमों की वजह से कई जगहों पर भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले। एक ओर प्रशासन परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर कुछ छात्रों की परीक्षा महज 30 से 40 सेकंड की देरी के कारण छूट गई। कई अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों के बाहर रोते-बिलखते देखा गया, जबकि उनके परिजन अधिकारियों से रहम की गुहार लगाते रहे।
परीक्षा केंद्रों के गेट बंद कर दिए गए थे
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के निर्देशों के अनुसार दोपहर 1:30 बजे सभी परीक्षा केंद्रों के गेट बंद कर दिए गए थे। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। भोपाल के सरोजिनी सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय और पीएमश्री सेंट्रल स्कूल सहित कई परीक्षा केंद्रों पर कुछ छात्र निर्धारित समय से कुछ सेकंड देरी से पहुंचे। छात्रों और उनके परिजनों ने अधिकारियों से बार-बार अनुरोध किया कि उन्हें परीक्षा में शामिल होने दिया जाए, लेकिन नियमों के चलते किसी को भी राहत नहीं मिल सकी।
छात्रों को अतिरिक्त समय लगा
परिजनों का आरोप था कि परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त मार्गदर्शन की व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों को रोल नंबर और परीक्षा कक्ष खोजने में अतिरिक्त समय लग गया। उनका कहना था कि यदि दो से चार मिनट की छूट दी जाती तो छात्रों का एक साल बर्बाद होने से बच सकता था। हालांकि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि एनटीए के नियमों में किसी प्रकार की ढील देने का अधिकार उनके पास नहीं है।
गलत परीक्षा केंद्र पहुंचने से भी छूटी परीक्षा
भोपाल और छतरपुर में कुछ अभ्यर्थी गलत परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए, जिससे उनकी परीक्षा छूट गई। छतरपुर के एक छात्र को नौगांव स्थित केंद्र पर परीक्षा देनी थी, लेकिन वह शहर के दूसरे स्कूल में पहुंच गया। जब उसे अपनी गलती का पता चला और वह बाइक से सही केंद्र के लिए रवाना हुआ, तब तक परीक्षा केंद्र का गेट बंद हो चुका था। काफी प्रयास और अनुरोध के बावजूद उसे प्रवेश नहीं मिल पाया।
कुछ अन्य अभ्यर्थियों ने भी बताया कि प्रवेश पत्र में दिए गए परीक्षा केंद्र की जानकारी समझने में भ्रम की स्थिति बनी, जिसके कारण वे निर्धारित समय पर सही स्थान तक नहीं पहुंच सके। ऐसे मामलों में छात्रों और उनके परिजनों की निराशा साफ दिखाई दी।
परीक्षा केंद्रों पर दिखी अभूतपूर्व सख्ती
री-नीट परीक्षा में इस बार सुरक्षा को लेकर बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। नकल और किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए अभ्यर्थियों की कई स्तरों पर जांच की गई। परीक्षा केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां छात्र-छात्राओं की मेटल डिटेक्टर से जांच की गई।
धातु से बनी सभी वस्तुएं हटवा ली
सुरक्षा जांच के दौरान छात्रों से धातु से बनी सभी वस्तुएं हटवा ली गईं। छात्राओं को कान की बाली, टॉप्स, नथ और अन्य आभूषण उतारने पड़े। कई जगहों पर अभ्यर्थियों के हाथों में बंधे कलावे और रक्षा सूत्र भी कटवाए गए। कुछ केंद्रों पर लोहे के बटन और चेन वाली पैंट पहनकर पहुंचे छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रीवा, सतना और गुना में सुरक्षा कर्मियों ने चेन, धातु के बटन और अन्य धातु सामग्री बाहर ही उतरवा ली। रीवा में एक छात्र की चेन प्लास से काटकर अलग की गई। वहीं कई छात्रों की पैंट की जिप और धातु वाले हिस्सों को भी हटवाया गया ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
कई छात्रों को नंगे पैर देना पड़ा एग्जाम
सतना में एक छात्र के जूते सुरक्षा जांच के दौरान बाहर रखवा दिए गए। इसके बाद उसे नंगे पैर ही परीक्षा केंद्र के अंदर जाना पड़ा। वहीं कई छात्राओं को परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले कान के टॉप्स और नथ उतारनी पड़ी। कुछ केंद्रों पर पानी की बोतलों के रैपर तक हटवा दिए गए ताकि किसी प्रकार की जानकारी छिपाकर अंदर ले जाने की संभावना न रहे।
असुविधाओं का सामना करना पड़ा
अभ्यर्थियों का कहना था कि सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें कई असुविधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन परीक्षा के महत्व को देखते हुए उन्होंने सभी नियमों का पालन किया। हालांकि कुछ छात्रों ने धार्मिक प्रतीकों जैसे कलावा और रक्षा सूत्र कटवाने पर आपत्ति भी जताई।
इंदौर में पुलिस अधिकारी ने की मदद, बच गई छात्रा की परीक्षा
इंदौर के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बाल विनय मंदिर परीक्षा केंद्र पर एक सकारात्मक तस्वीर भी देखने को मिली। यहां रिया नाम की छात्रा अपना आधार कार्ड हॉस्टल में ही भूल गई थी। परीक्षा केंद्र पहुंचने पर उसे जब यह बात पता चली तो वह घबरा गई और रोने लगी।
मौके पर ड्यूटी कर रही पलासिया थाना क्षेत्र की उपनिरीक्षक अभिरुचि ने छात्रा की परेशानी को समझा और तत्काल उसके परिजनों से संपर्क किया। उन्होंने वॉट्सएप के माध्यम से आधार कार्ड की प्रति मंगवाई और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करवाई। इसके बाद छात्रा को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल गई। समय रहते मिली मदद के कारण उसकी परीक्षा छूटने से बच गई।
भोपाल में डिजिटल कॉपी नहीं मानी गई
दूसरी ओर भोपाल के एक परीक्षा केंद्र पर एक छात्र अपना मूल पहचान पत्र घर पर ही भूल गया था। उसने वॉट्सएप पर आईडी की कॉपी मंगवा ली, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने डिजिटल कॉपी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद छात्र को मूल दस्तावेज लेने के लिए वापस जाना पड़ा। इस घटना ने परीक्षा केंद्रों पर अलग-अलग स्तर पर अपनाई जा रही प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए।
हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई परीक्षा
एनटीए ने इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया था और उनके साथ सीआरपीएफ की निगरानी भी रही। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की गई।
अभ्यर्थियों की पहचान के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा केंद्रों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
रेलवे स्टेशनों पर बनाए गए हेल्प बूथ
परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए भोपाल, विदिशा, नर्मदापुरम, गुना और अशोकनगर रेलवे स्टेशनों पर विशेष हेल्प बूथ स्थापित किए गए थे। इन बूथों पर छात्रों को परीक्षा केंद्रों का पता, परिवहन व्यवस्था और अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। रेलवे और प्रशासन के कर्मचारियों ने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में छात्रों की मदद भी की।
मेडिकल कॉलेजों में छुट्टियां भी रद्द
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने परीक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए 20 और 21 जून को मेडिकल कॉलेजों के छात्रों और संबंधित कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी थीं। प्रशासन का उद्देश्य था कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी व्यवस्था में कोई कमी न रहे और अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
हालांकि परीक्षा के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि सुरक्षा और अनुशासन के बीच मानवीय संवेदनाओं को लेकर बहस अभी भी जारी है। कुछ सेकंड की देरी से परीक्षा छूटने वाले छात्रों और उनके परिजनों के लिए यह दिन निराशा और तनाव से भरा रहा, जबकि सफलतापूर्वक परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली।
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