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नायता मुंडला का आईएसबीटी बना मजाक, न बसें, न सुविधाएं: करीब 370 करोड़ रुपए की लागत तैयार बस स्टैंड; आरटीओ और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी का शिकार, सारे दावे हो गए फेल

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जून 2026, 2:49 pm
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नायता मुंडला का आईएसबीटी बना मजाक, न बसें, न सुविधाएं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
करीब 370 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया आईएसबीटी आरटीओ और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से मजाक बनकर रह गया है।

यहां न तो पर्याप्त संख्या में बसें आ रही हैं और न सुविधाएं हैं। सारे दावे और वादे हवा हो चुके हैं। कोई देखने-सुनने वाला नहीं है।

जिस वक्त आईएसबीटी यानी इंटर स्टेट बस टर्मिनल बना था तब तमाम बड़े-बड़े दावे किए गए थे। तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने इस आईएसबीटी को सफल बनाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यहां न बसों की पर्याप्त संख्या जुटी और न सुविधाओं का विस्तार हुआ।

हद तो ये है कि आईएसबीटी के अंदर जहां बसों की पार्किंग होना थी वहां अधिकारियों ने रेस्टॉरेंट खुलवा दिया। सूत्रों का कहना है कि इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई है। आईएसबीटी के मूल प्लान में रेस्टारेंट नहीं है, फिर भी बड़ी शान से चल रहा है।

इस आईएसबीटी को शुरू करते वक्त अधिकारियों ने दावा किया था कि वे यहां सारी सुविधाएं जुटाएंगे, लेकिन हकीकत ये है कि सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। नायता मुंडला आईएसबीटी से 85 बसें संचालित होना थी, लेकिन यहां बमुश्किल 50-55 बसें ही आ रही हैं।

यहां से कन्नौद, सतवास, चापड़ा, बागली, हाटपीपल्या, पूंजापुरा रूट की तमाम बसों का संचालन हो रहा है। आईएसबीटी करीब 370 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है, लेकिन यहां न तो साफ-सफाई हो रही है और न पीने का पानी उपलब्ध है।

यहां तक कि महिलाओं के टायलेट गंदे पड़े हैं और कर्मचारी दिनभर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। वो खुद कहते हैं कि न पानी है और न कोई अन्य सुविधा, हम काम करें तो कैसे? यहां आने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि वहां मौजूद किसी कर्मचारी को शिकायत करो तो जवाब मिलता है कि नगर निगम के जोनल अधिकारी को बताओ। वहां भी कोई सुनता ही नहीं।

पार्किंग की जगह पर रेस्टारेंट
सूत्रों ने बताया कि जिस जगह पर बसों की पार्किंग थी वहां रेस्टारेंट खोल दिया गया है। ये अवैध इसलिए है, क्योंकि आईएसबीटी के मूल प्लान में इसका कोई प्रावधान ही नहीं है। संचालक ने बड़ा शेड बनाकर कुर्सियां-टेबलें लगा दी हैं।

इससे बस ऑपरेटरों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रेस्टारेंट के कारण बस वालों को जगह नहीं मिल रही। दिन में कई बार विवाद की स्थिति निर्मित होती है। यही नहीं, अधिकारियों ने इस आईएसबीटी के गेट नंबर 1 को तोड़कर वहां इलेक्ट्रिक बसों का चार्जिंग स्टेशन बना दिया है।

एआईसीटीएसएल ने 150 इलेक्ट्रिक बसें मंगवाई हैं, जिनमें से 40 मिल गई हैं। ये बसें इंदौर से आसपास के शहरों में चलेंगी, ये भी इसी आईएसबीटी से चलेंगी। चार्जिंग स्टेशन इनके लिए बना है, लेकिन इससे बस आपरेटरों को भारी परेशानी हो रही है।

सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं
मामले में क्षेत्रीय पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि वे नायता मुंडला के आईएसबीटी की स्थिति सुधारने के लगातार प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों से बात की है। पानी के टैंकर डलवा रहा हूं। तमाम असुविधाओं को दूर करने के लिए भी प्रयास कर रहा हूं।

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