करोड़ों का ट्रैवलिंग अलाउंस घोटाला: 15 SAF जवानों-कर्मचारियों पर FIR; मास्टरमाइंड फरार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
शहर में स्पेशल आर्म्ड फोर्स (SAF) की छठी बटालियन से जुड़ा ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) घोटाला लगातार बड़ा होता जा रहा है। शुरुआती तौर पर करीब 2 करोड़ रुपए का आंका गया यह घोटाला अब जांच में बढ़कर लगभग 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
मास्टरमाइंड लंबे समय से फरार
मामले में रांझी थाना पुलिस ने एक एसएआई, एक मृत आरक्षक सहित कुल 15 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा बताया जा रहा है, जो लंबे समय से फरार है।
2018-19 से रचा जा रहा था TA घोटाला
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब अधिकारियों को यात्रा भत्ते के भुगतान में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी मिली। शुरुआती जांच में टीए शाखा में पदस्थ एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा और आरक्षक अभिषेक झारिया की भूमिका सामने आई।
राशि अपने सहयोगियों में बांट देता था
जांच में सामने आया कि सत्यम शर्मा वर्षों से फर्जी टीए बिल तैयार कर रहा था। इन बिलों में आरक्षकों को जिले से बाहर ड्यूटी पर दिखाया जाता, जबकि वे वास्तविक रूप से जबलपुर में ही तैनात रहते थे।
भुगतान से पहले आने वाला ओटीपी भी सत्यम शर्मा खुद प्राप्त करता था और राशि निकालकर अपने सहयोगियों में बांट देता था। यह फर्जीवाड़ा 2018-19 से लगातार चल रहा था, जो नवंबर 2025 में उजागर हुआ। अब तक करीब 3 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आ चुकी है।
55 लाख का भुगतान
स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। आरक्षक अभिषेक झारिया के बैंक खाते में 582 यात्रा भत्ता बिलों के जरिए करीब 55 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए, जबकि सात साल की नौकरी में उसकी कुल सैलरी और एरियर सिर्फ 26 लाख रुपए थे।
यानी टीए से मिली राशि वेतन से करीब 210 प्रतिशत अधिक थी। इसी तरह नीतेश कुमार पटेल को वेतन और एरियर के रूप में 24.67 लाख रुपए मिले, जबकि यात्रा भत्तों के जरिए 30.51 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
12 आरक्षकों को TA से 10-10 लाख
जांच में यह भी सामने आया कि SAF में आरक्षकों का शुरुआती वेतन 23 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह होता है, इसके बावजूद 12 आरक्षकों के बैंक खातों में सिर्फ टीए भुगतान के जरिए 10-10 लाख रुपए जमा पाए गए। कुछ खातों में वेतन से 200 गुना ज्यादा रकम होने की पुष्टि हुई।
स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल ने पाया कि 6वीं बटालियन SAF, रांझी में यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता और एफवीसी देयकों के माध्यम से कर्मचारियों को असामान्य रूप से अधिक भुगतान किया गया।
निलंबन के बाद आत्महत्या, आरोपी फरार
टीए घोटाला उजागर होते ही बाबू सत्यम शर्मा और अभिषेक झारिया दोनों को निलंबित कर दिया गया। मानसिक दबाव और शर्म के चलते अभिषेक झारिया ने 12 नवंबर को ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली।
उधर, सत्यम शर्मा जांच शुरू होते ही फरार हो गया। बाद में छिंदवाड़ा में उसकी शादी का कार्ड सामने आया, जिसमें 22 नवंबर की तारीख दर्ज थी। उसने शादी की सूचना विभाग को नहीं दी थी।
दो स्तरों पर जांच, 20 से ज्यादा खाते फ्रीज
मामले की गंभीरता को देखते हुए SAF कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई, जबकि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जिला पंचायत CEO अभिषेक गहलोत के नेतृत्व में 6 सदस्यीय विशेष टीम गठित की।
जांच के बाद 20 से अधिक आरक्षकों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि सत्यम शर्मा 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से का लालच देकर अभिषेक के खाते में राशि ट्रांसफर कराता था और खुद नकद लेता था।
जांच के दौरान सत्यम के खाते में सिर्फ 2.60 लाख रुपए मिले, जिससे कैश लेन-देन की पुष्टि हुई। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और नाम सामने आ सकते हैं।
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