मानसून का कहर: गुजरात में 5 मौतें, असम में 24 घंटे में 14 की जान गई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फोर्ट, भोपाल/नई दिल्ली।
देश के कई राज्यों में मानसून ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि असम में बाढ़ से पिछले 24 घंटे में 14 लोगों की मौत हो गई।
वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। खराब मौसम के कारण छह दिनों से रुकी अमरनाथ यात्रा भी शनिवार से दोबारा शुरू कर दी गई।
गुजरात में बाढ़, 40 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला
गुजरात के कई जिले भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बारिश से जुड़े हादसों में 5 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए अहमदाबाद में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला लिया गया है।
असम में बाढ़ से तबाही, 61 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा
असम में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में 14 लोगों की मौत के बाद राज्य में मृतकों की संख्या 61 हो गई है। फिलहाल 12 जिलों के 7.05 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी अलर्ट
उत्तर प्रदेश में पिछले 15 दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने शनिवार को 30 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं राजस्थान के कई हिस्सों में भी लगातार बारिश हो रही है और मौसम विभाग ने विभिन्न जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
अमरनाथ यात्रा फिर शुरू
खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण छह दिनों तक स्थगित रहने के बाद अमरनाथ यात्रा शनिवार से दोबारा शुरू कर दी गई। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन भारी बारिश के आसार, 35 जिलों समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है। मौसम विभाग (IMD) ने शनिवार को भोपाल, इंदौर समेत 35 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले चार दिनों तक कई क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिल रही है, जबकि मानसून ट्रफ भी प्रदेश से गुजर रही है। इसके कारण हवा में 80 से 95 प्रतिशत तक नमी बनी हुई है, जिससे लगातार बारिश का दौर जारी है।
इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
इसके अलावा पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।
अब तक 13 इंच बारिश, मानसून का 35% कोटा पूरा
लगातार बारिश के चलते प्रदेश में वर्षा के आंकड़ों में तेजी से सुधार हुआ है। अब तक प्रदेश में औसतन 330.4 मिमी (करीब 13 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जो पूरे मानसून के सामान्य कोटे का लगभग 35 प्रतिशत है।
20 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन पिछले चार दिनों की बारिश के बाद यह कमी घटकर 11 प्रतिशत रह गई है।
14 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
देवास, भोपाल, इंदौर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, बुरहानपुर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मंदसौर समेत 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। देवास सबसे अधिक वर्षा वाला जिला बना हुआ है, जहां अब तक 19.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।
जलभराव और बाढ़ जैसे हालात की चेतावनी
मौसम विभाग ने लगातार बारिश को देखते हुए निचले इलाकों में जलभराव, छोटी नदियों और नालों में उफान तथा कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई है। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
जुलाई में बारिश के रिकॉर्ड: बड़े शहरों का ट्रेंड
इंदौर: 27 जुलाई 1913 को 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड। जुलाई में औसतन 12 इंच बारिश और करीब 13 दिन वर्षा होती है।
भोपाल: 1986 में जुलाई में 41 इंच बारिश दर्ज हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक दिन में 11 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना था।
जबलपुर: प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा वाला प्रमुख शहर। 1930 में जुलाई में करीब 45 इंच बारिश हुई थी, जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे में 13.5 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई।
ग्वालियर: जुलाई में औसतन 9 इंच बारिश होती है। 1935 में 24.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था।
उज्जैन: जुलाई में जिले की कुल मानसूनी वर्षा का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है और यह महीना यहां सबसे अधिक बारिश वाला माना जाता है।
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