मंत्री को हाईकोर्ट से फिर राहत: नामांकन में संपत्ति छिपाने के आरोप वाली याचिका खारिज; कोर्ट बोला- चुनाव याचिका ही सही रास्ता
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत मिली है। हाईकोर्ट ने 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान संपत्ति की जानकारी छिपाने के आरोपों को लेकर दायर रिट याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव संपन्न होने और परिणाम घोषित होने के बाद इस तरह के विवाद को केवल चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) में चुनावी विवादों के लिए स्पष्ट व्यवस्था है। ऐसे मामलों में रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
हलफनामे में संपत्ति छिपाने का था आरोप
याचिकाकर्ता राजकुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि सुरखी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के दौरान गोविंद सिंह राजपूत ने फॉर्म-26 में अपनी, पत्नी और ज्ञानवीर सेवा समिति से जुड़ी कुछ अचल संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं दी थी।
याचिका में दावा किया गया कि चुनाव अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर हाईकोर्ट से मामले की जांच और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने कहा- 45 दिन में दायर करनी थी चुनाव याचिका
हाईकोर्ट ने कहा कि राजपूत ने 30 अक्टूबर 2023 को नामांकन दाखिल किया था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कानून के तहत तय समय सीमा में चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प उपलब्ध था, लेकिन याचिकाकर्ता ने इसका इस्तेमाल नहीं किया।
इसके बजाय मार्च 2025 में चुनाव अधिकारियों के समक्ष शिकायत की गई। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित समय सीमा गुजरने के बाद उसी चुनावी विवाद को रिट याचिका के माध्यम से दोबारा नहीं उठाया जा सकता।
परिणाम के बाद चुनाव अधिकारियों की भूमिका समाप्त
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर और जिला निर्वाचन प्रशासन चुनाव प्रक्रिया से जुड़े ऐसे विवाद पर दोबारा फैसला नहीं कर सकते। इसलिए शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने के चुनाव अधिकारियों के फैसले में कोर्ट ने कोई कानूनी त्रुटि नहीं मानी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव की वैधता से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए चुनाव याचिका ही निर्धारित वैधानिक माध्यम है।कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था को दरकिनार कर रिट याचिका के जरिए चुनावी विवाद की सुनवाई करना चुनाव कानून में निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत होगा।
याचिका खारिज, किसी पक्ष पर नहीं लगाया खर्च
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में रिट याचिका के जरिए हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। याचिकाकर्ता ने चुनाव कानून में उपलब्ध वैधानिक उपाय का इस्तेमाल नहीं किया था।
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