महापौर ने पलटा आयुक्त का फैसला धोबी घाट पर मेले की अनुमति निरस्त: नगर निगम में प्रशासनिक खींचतान
KHULASA FIRST
संवाददाता

एमआईसी की आपात बैठक में आयुक्त क्षितिज सिंघल की कार्यप्रणाली पर सवाल, बिना चर्चा अनुमति जारी करने पर जताई गंभीर आपत्ति
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय का संकट फिर खुलकर सामने आ गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में कल रात 8:15 बजे मेयर इन काउंसिल की एक आपात वर्चुअल बैठक आयोजित की गई, जिसमें नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा धोबी घाट पर ताजिए ठंडे करने के साथ-साथ मेला लगाने की दी गई एकतरफा अनुमति को सर्वसम्मति से निरस्त कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और आयुक्त सिंघल के निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे शहर के शीर्ष प्रशासनिक गलियारों में खींचतान तेज होने के आसार बन गए हैं।
महापौर ने तुरंत वर्चुअल बैठक बुलाई
महापौर पुष्यमित्र भार्गव को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली थी कि धोबी घाट पर धार्मिक परंपरा के निर्वहन के साथ ही वहां मेला लगाने की अनुमति निगम प्रशासन द्वारा जारी कर दी गई है। इस संवेदनशील मामले में मेयर इन काउंसिल को अंधेरे में रखा गया और परिषद से कोई चर्चा नहीं की गई। आयुक्त सिंघल के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए महापौर ने तुरंत वर्चुअल बैठक बुलाई।
अनुमति का कारण पूछा
बैठक के दौरान जब इस अनुमति का कारण पूछा गया तो सामने आया कि आयुक्त सिंघल ने वरिष्ठ स्तर से निर्देश होने का हवाला देकर धोबी घाट पर ताजिए ठंडे करने और मेला लगाने की अनुमति जारी कर दी थी।
इस प्रकरण और प्रदाय की गई अनुमति से मेयर इन काउंसिल को अवगत तक नहीं कराया गया था, जिस पर उपस्थित सभी एमआईसी सदस्यों ने आयुक्त सिंघल की कार्यशैली पर आपत्ति दर्ज कराई और प्रशासनिक मनमानी की निंदा की। परिषद के सदस्यों ने आयुक्त के इस कदम को निगम के नियमों के खिलाफ माना।
मेले के दौरान नियमों का उल्लंघन
विगत वर्षों के अनुभवों को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया, जहां यह तथ्य सामने आया कि पिछले वर्ष धोबी घाट पर अनुमति जिन शर्तों पर दी गई थी आयोजकों ने उनका उल्लंघन किया था। स्थल पर स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा गया।
साथ ही निगम की नियमानुसार जमा होने वाली आवश्यक राशि भी आयोजकों द्वारा निगम कोष में जमा नहीं कराई गई थी। इन लापरवाहियों और वित्तीय नुकसान के बावजूद आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बिना समीक्षा और एमआईसी की स्वीकृति के मेले की अनुमति देना उनकी प्रशासनिक अदूरदर्शिता को दर्शाता है।
ये रहे मौजूद
बैठक में मेयर इन काउंसिल के सदस्य राजेंद्र राठौर, निरंजन नरसिंह चौहान, अश्विनी शुक्ल, राजेश उदावत, अभिषेक ‘बबलू' शर्मा, नंदकिशोर पहाड़िया, मनीष शर्मा मामा, राकेश जैन और प्रिया डांगी उपस्थित रहे, जबकि प्रशासनिक पक्ष से आयुक्त क्षितिज सिंघल और अपर आयुक्त भी इस बैठक में शामिल हुए।
ताजिए ठंडे करने की अनुमति ही मान्य
मेयर इन काउंसिल ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आयुक्त द्वारा दी मेले की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। परिषद ने साफ कर दिया कि धोबी घाट पर केवल परंपरा अनुसार ताजिए ठंडे करने की अनुमति ही मान्य रहेगी, वहां किसी भी प्रकार का मेला आयोजित नहीं करने दिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद संशोधित अनुमति पत्र जारी कर शासन को वस्तुस्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। निगम सचिव के माध्यम से आयुक्त सिंघल को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पाबंद किया गया है।
महापौर के आदेश ठेंगे पर, कर्बला मैदान में सजे झूले और दुकानें
कर्बला मैदान धोबी घाट पर कल रात महापौर पुष्यमित्र भार्गव और उनकी एमआईसी टीम द्वारा मेला लगाने की अनुमति न देने के निर्णय और निंदा प्रस्ताव के बावजूद आज सुबह मेले की तैयारियां शुरू हो गईं।
नगर निगम के विरोध को दरकिनार करते हुए मैदान में पुलिस बैरिकेडिंग के बीच बच्चों के झूले और दुकानें सजने लगी हैं, जो सीधे तौर पर महापौर के आदेशों की खुली अवहेलना है।
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