लोकायुक्त के दो मामलों में बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर पटवारी और वन आरक्षक सेवा से बर्खास्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश लोकायुक्त द्वारा रिश्वतखोरी के दो अलग-अलग मामलों में दोषसिद्ध शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ शासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से पृथक (बर्खास्त) कर दिया है। दोनों मामलों में विशेष न्यायालय से सजा सुनाए जाने के बाद संबंधित विभागों ने आरोपियों को सरकारी सेवा से हटा दिया।
नामांतरण के लिए रिश्वत मांगने वाला पटवारी बर्खास्त
लोकायुक्त के अनुसार, अपराध क्रमांक 215/2019 में आरोपी दिनेश जगताप, तत्कालीन पटवारी, हल्का नंबर-34, छायगांव माखन, जिला खंडवा के खिलाफ कार्रवाई की गई।
शिकायतकर्ता सादिक शेख, निवासी इंदिरा आवास कॉलोनी, छायगांव माखन, ने अपनी पत्नी के नाम खरीदे गए 450 वर्गफीट के प्लॉट के नामांतरण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के एवज में पटवारी ने ₹3,000 की रिश्वत मांगी।
पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त कार्यालय, इंदौर से की। शिकायत के सत्यापन के बाद 16 सितंबर 2019 को लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर आरोपी पटवारी को ₹500 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय, खंडवा ने 31 मार्च 2026 को आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹15,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद कलेक्टर, खंडवा ने 13 मई 2026 को आरोपी पटवारी को शासकीय सेवा से पृथक कर दिया।
वन भूमि के पट्टे के लिए रिश्वत लेने वाला वन आरक्षक भी पदच्युत
दूसरा मामला अपराध क्रमांक 148/2019 का है, जिसमें आरोपी आजम खान, तत्कालीन वन आरक्षक (बीट गार्ड), मचलगांव बीट, वन परिक्षेत्र भीकनगांव, जिला खरगोन के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
शिकायतकर्ता सिगड़र डुडवे, निवासी ग्राम पालड़ी, पंचायत पोखर बुजुर्ग, थाना भीकनगांव, जिला खरगोन ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दी थी कि वह करीब 12 वर्षों से जिस वन भूमि पर खेती कर रहा है, उसके मौका नक्शे की तैयारी और पट्टा दिलाने संबंधी फाइल पर हस्ताक्षर करने के बदले वन आरक्षक ₹5,000 की रिश्वत मांग रहा है।
शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त टीम ने 13 जुलाई 2019 को कार्रवाई करते हुए आरोपी वन आरक्षक को ₹1,900 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
विशेष न्यायालय ने 19 नवंबर 2025 को आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कारावास और ₹5,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी आदेश दिया गया।
न्यायालय से सजा मिलने के बाद वन मंडल अधिकारी, सामान्य वन मंडल, खरगोन ने 28 नवंबर 2025 से आरोपी वन आरक्षक को शासकीय सेवा से पदच्युत कर दिया।
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