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घुसपैठियों पर बड़ा एक्शन: 131 लोगों को किया गिरफ्तार; फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की जांच जारी

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जून 2026, 2:14 pm
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घुसपैठियों पर बड़ा एक्शन

खुलासा फर्स्ट, अहमदाबाद।
पुलिस और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने शहर में अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ मंगलवार देर रात विशेष अंडरकवर अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 291 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 131 लोगों के अवैध रूप से भारत में रहने की पुष्टि होने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

संवेदनशील इलाकों में एक साथ छापेमारी
बाकी 160 लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने चंदोला झील क्षेत्र, गुलाबनगर और दानिलिमडा के खोडियारनगर समेत कई इलाकों में एक साथ दबिश दी। ये इलाके लंबे समय से अवैध घुसपैठियों के संभावित ठिकानों के रूप में चिन्हित बताए जाते रहे हैं।

दस्तावेजों की हो रही गहन जांच
पुलिस की अचानक कार्रवाई से कई स्थानों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ संदिग्धों ने भागने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए सभी लोगों को पूछताछ के लिए अहमदाबाद क्राइम ब्रांच कार्यालय लाया गया है।

जांच एजेंसियां राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी समेत अन्य दस्तावेजों की वैधता की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर भी है कि यदि फर्जी दस्तावेज मिले हैं तो उन्हें तैयार कराने के पीछे कौन लोग या गिरोह सक्रिय हैं।

दर्ज होगा मामला
पुलिस के मुताबिक जिन 131 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई है, उनके खिलाफ विदेशी नागरिकों से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा और बाद में निर्वासन (डिपोर्टेशन) की कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की भी जांच
जांच एजेंसियों को आशंका है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को पहचान पत्र, रहने की व्यवस्था और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला एक संगठित नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है। पुलिस अब ऐसे एजेंटों और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

160 संदिग्धों का सत्यापन जारी
अधिकारियों के अनुसार शेष 160 लोगों की पहचान और नागरिकता का सत्यापन सबसे बड़ी चुनौती है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इनमें से कुछ लोग वर्षों से स्थानीय आबादी के बीच मजदूरी और छोटे रोजगार के जरिए रह रहे थे। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सभी संदिग्धों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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