अहम केस में फैसला सुनाने वाली जज को मिली धमकियां: हाई कोर्ट ने इनसे मांगा सुरक्षा पर हलफनामा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिवनी मालवा की एक महिला न्यायाधीश को कथित रूप से मिल रही जान से मारने की धमकियों के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
गोहत्या से जुड़े एक बहुचर्चित हत्या प्रकरण में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद न्यायाधीश के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक अभियान चलने और धमकियां मिलने के आरोप सामने आए हैं।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी ) को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
क्या है पूरा मामला?
मामला अगस्त 2022 का है। सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास महाराष्ट्र के अमरावती जा रहे एक ट्रक को रोका गया था, जिसमें करीब 30 मवेशी लदे होने की बात सामने आई थी।
इसके बाद मौके पर ग्रामीणों और स्वयं को गो-रक्षक बताने वाले लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि भीड़ ने ट्रक में सवार तीन लोगों के साथ मारपीट की, जिसमें नाजिर अहमद की मौत हो गई थी।
14 आरोपियों को सुनाई थी उम्रकैद
इस मामले की सुनवाई सिवनी मालवा की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की अदालत में हुई। अदालत ने 12 जून को फैसला सुनाते हुए 14 आरोपियों को दोषी ठहराया और सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद अदालत परिसर में हंगामे की स्थिति भी बनी थी।
फैसले के बाद सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट
अदालती फैसले के बाद सोशल मीडिया पर न्यायाधीश के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां और पोस्ट साझा की जाने लगीं। साथ ही उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत भी सामने आई। पुलिस ने इस मामले में दो फेसबुक उपयोगकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान
न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से संबंधित वर्ष 2016 से लंबित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह शामिल हैं, ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सरकार ने बताया- सुरक्षा उपलब्ध कराई गई
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि संबंधित महिला न्यायाधीश को सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है।
साथ ही सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस पर विस्तृत जानकारी मांगते हुए कहा कि केवल मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं है।
एसीएस और डीजीपी देंगे विस्तृत जवाब
हाई कोर्ट ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को हलफनामा दाखिल कर यह बताने के निर्देश दिए हैं कि न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या-क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या योजना है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की स्वतंत्रता और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
9 जुलाई को अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी। उस दिन राज्य सरकार को अपना विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करना होगा। हाईकोर्ट सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ सोशल मीडिया पर न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों पर भी विचार करेगा। यह मामला भविष्य में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए अहम माना जा रहा है।
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