खेती का इंदौर डिक्लेरेशन: मॉडल ब्रिक्स स्टेट बन सकता है मध्यप्रदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ब्रिक्स देशो के ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ को धरातल पर उतारने के लिए मप्र पहली प्रयोगशाला बन सकता है? आंकड़े बताते हैं किसानों के परिश्रम से कृषि में देश के अग्रणी राज्यों में है।
यह बात अलग है उपजाऊ भूमि विकास की योजनाओं और शहरीकरण के नाम पर लगातार तेजी से काम की जा रही है। युवा खेती से दूर हो रहा है महिलाओं का भी अब योगदान काम हो चुका है क्योंकि लागत बढ़ रही है और फायदा कम हो रहा है।
श्रमिकों की उपलब्धता कम हो गई है, बावजूद किसान खेती कर रहे हैं। ब्रिक्स का एजेंडा प्रदेश की खेती पर आसानी से फिट बैठ जाएगा
नीति विशेषज्ञों का मानना है केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक विशेष ‘ब्रिक्स एग्रीकल्चर पायलट मिशन’ शुरू करें, तो मप्र न केवल भारत बल्कि ब्रिक्स देशों के लिए भी कृषि नवाचार का मॉडल राज्य बन सकता है।
इंदौर घोषणा को सेवन स्टार होटल के एयर कंडीशन सुइट या कमरों और लंबी चौड़ी दस्तावेज रिपोर्ट से खेत तक पहुंचाने की दिशा में यह समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ब्रिक्स देश इस प्रस्ताव पर खुशी-खुशी राजी हो जाएंगे क्योंकि इंदौर में उन्होंने खूब मंथन किया।
सैर सपाटा किया। मौज की। सरकार ने घोर आर्थिक मंदी और घाटे के बावजूद उनके राजसी ठाट-बाट भरे आदर सत्कार में कोई कमी नहीं छोड़ी इसलिए मप्र के प्रति झुकाव तो होना चाहिए।
यह बात अलग है अभी तक ब्रिक्स देशों ने इतने आदर-सत्कार और सम्मान के बावजूद भारत के जहाज पर अमेरिकी हमले और उसमें मारे गए तीन इंजीनियर नाविकों के मामले में सामूहिक शक्ति और संवेदना का परिचय नहीं दिया।
किसी भी सदस्य देश ने निंदा नहीं की। भारत जबकि ब्रिक्स का अध्यक्ष और प्रमुख देश है। पूछा जा रहा है ऐसा हमला क्या चीन के जहाज पर अमेरिका या ईरान कर सकता था? और ऐसा होता तो कितने देश चीन के साथ खड़े होने में देर न करते?
जो भी हो खेती-किसानी के मामले में सदस्य देश एक हद तक तो स्वार्थी नहीं होंगे, ऐसा माना जा सकता है क्योंकि मामला ताजा है इसलिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश को ब्रिक्स के अंतरराष्ट्रीय पटल पर खड़ा कर सकते हैं ऐसा करना ऐतिहासिक होगा।
क्यों उपयुक्त है मप्र... इंदौर घोषणा के चार प्रमुख स्तंभ प्राकृतिक एवं पुनर्योजी खेती,डिजिटल कृषि, देशी बीज संरक्षण, कृषि ज्ञान एवं संसाधन नेटवर्क, इन सभी क्षेत्रों में मप्र के पास आधारभूत संरचना, कृषि विवि, कृषि विज्ञान केंद्र, किसान उत्पादक संगठन और विशाल कृषि क्षेत्र उपलब्ध है।
टेक्नोलॉजी आधारित खेती का विस्तार... पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन आधारित छिड़काव, सॉइल हेल्थ कार्ड ई-नाम (e-NAM), स्मार्ट सिंचाई, प्रिसिजन फार्मिंग, कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया गया है।
हालांकि, पूरे कृषि क्षेत्र की तुलना में उच्च तकनीक आधारित खेती का हिस्सा अभी सीमित है, लेकिन हजारों किसान ड्रोन, सेंसर, मोबाइल आधारित कृषि सलाह और कस्टम हायरिंग सेंटरों का उपयोग कर रहे हैं।
महिला किसान: कृषि की अदृश्य शक्ति... राज्य में कृषि कार्यों में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनुमानत: कृषि श्रम और खेती के विभिन्न कार्यों में 40–50 प्रतिशत तक योगदान है। लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों ( एफआईपीओ) से जुड़ी हैं फिर भी भूमि स्वामित्व और औपचारिक किसान पहचान के मामले में भागीदारी अपेक्षाकृत कम है।
युवा और एग्री-स्टार्टअप... कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। राज्य में एग्री-स्टार्टअप एग्री-टेक प्लेटफॉर्म, ड्रोन सेवाएं, जैविक खेती उद्यम, फूड प्रोसेसिंग इकाइयां तेजी से विकसित हो रही हैं। हजारों युवा प्रत्यक्ष खेती के अलावा कृषि उद्यमिता, मूल्य संवर्धन और डिजिटल कृषि सेवाओं से जुड़े हैं।
अर्थव्यवस्था की रीढ़...लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। करीब एक करोड़ किसान पंजीकृत हैं, जिनमें बड़ी संख्या छोटे और सीमांत किसानों की है। कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
देश के खाद्यान्न भंडारों में प्रमुख योगदान
मप्र देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक है। इसके अलावा सोयाबीन उत्पादन में भी राज्य अग्रणी है। प्रमुख फसलें हैं गेहूं, सोयाबीन, चना, मसूर, अरहर, मक्का, सरसों, धान और कपास।
राज्य का वार्षिक कृषि उत्पादन मौसम के अनुसार बदलता है, लेकिन सामान्य वर्षों में: गेहूं लगभग 350–400 लाख टन, सोयाबीन 50–70 लाख टन, चना 50 लाख टन से अधिक, धान 40 लाख टन से अधिक, मक्का: 30 लाख टन के आसपास उत्पादन दर्ज किया जाता है।
बागवानी में भी तेजी
राज्य में बागवानी क्षेत्र भी तेजी से बढ़ा है। प्रमुख फल संतरा (विशेषकर छिंदवाड़ा), केला (बुरहानपुर), अमरूद, आम, पपीता हैं। राज्य में बागवानी का क्षेत्रफल लगभग 20 लाख हेक्टेयर से अधिक माना जाता है।
प्रमुख सब्जियां
प्याज, टमाटर, आलू, लहसुन
ब्रिक्स घोषणा से क्या बदल सकता है?
मप्र को घोषणा-पत्र के लिए चयनित किया जाए तो कृषि व्यापार बाधाएं कम होंगी, डिजिटल कृषि नेटवर्क विकसित होगा, जैविक और प्राकृतिक खेती उत्पादों के लिए साझा बाजार मिलेगा। प्रदेश का कृषि निर्यात वर्तमान स्तर से कई गुना बढ़ सकता है।
विशेष रूप से सोयाबीन, दाल, मिलेट्स, जैविक उत्पाद और आदिवासी क्षेत्रों के पारंपरिक खाद्यान्नों के लिए चीन, ब्राजील, रूस, यूएई और अफ्रीकी देशों में नए बाजार खुल सकते हैं।
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