बर्फानी बाबा आस्था की राह पर अभेद सुरक्षा
KHULASA FIRST
संवाददाता

अमरनाथ यात्रा 2026: यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात होंगी 670 कंपनियां, ड्रोन और हाईटेक तकनीक से होगी निगरानी
खुलासा फर्स्ट, जम्मू ।
अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यात्रा मार्ग और पड़ावों पर 670 सुरक्षा कंपनियां तैनात रहेंगी।
ड्रोन, सीसीटीवी, RFID ट्रैकिंग, डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्तों की मदद से निगरानी की जाएगी। पिछले वर्ष के आतंकी हमले के मद्देनजर इस बार बहुस्तरीय सुरक्षा योजना लागू की गई है, ताकि यात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
आगामी अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत की जा रही है। केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस वर्ष यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
इसी के तहत यात्रा मार्ग और प्रमुख पड़ावों पर अर्धसैनिक बलों तथा स्थानीय पुलिस की कुल 670 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इसके अलावा ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वाड और अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा।
30 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही अलर्ट मोड पर हैं। पिछले वर्ष पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में 27 लोगों की मौत के बाद इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है।
प्रशासन किसी भी प्रकार की चूक या लापरवाही की संभावना को पूरी तरह समाप्त करना चाहता है, जिसके चलते बहुस्तरीय सुरक्षा योजना तैयार की गई है।
यात्रा मार्ग के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के नशरी-डिगडोल सेक्टर में सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती की गई है। यहां हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान चौकसी कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियां सड़क मार्ग, पड़ाव स्थलों और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। सीआरपीएफ के अधिकारियों के अनुसार इस बार तीर्थयात्रियों के काफिलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए विशेष एस्कॉर्ट व्यवस्था भी लागू की जाएगी। सुरक्षा बल यात्रा मार्ग पर लगातार गश्त करेंगे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करेंगे।
यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन कैमरों के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की हवाई निगरानी की जाएगी, जबकि प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों का विस्तृत नेटवर्क स्थापित किया गया है।
इसके अलावा बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वाड को भी यात्रा मार्ग पर सक्रिय रखा जाएगा, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस वर्ष RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) ट्रैकिंग प्रणाली का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से यात्रियों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी और आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना आसान होगा।
इसके साथ ही यात्रा मार्ग को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है, जिससे किसी भी अनधिकृत उड़ान गतिविधि को रोका जा सके।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में केवल सीआरपीएफ ही नहीं, बल्कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी संयुक्त रूप से जिम्मेदारी निभाएंगी। सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए विशेष कंट्रोल रूम और निगरानी केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यात्रा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए हर स्तर पर तैयारी की गई है। सुरक्षा बलों को संवेदनशील स्थानों की पहचान कर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को भी अलर्ट रखा गया है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत सुरक्षा बलों को दें।
अधिकारियों का कहना है कि व्यापक सुरक्षा इंतजामों के साथ इस वर्ष अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सफल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
तवी पुल और फ्लाईओवर से गायब हुए गमले, सौंदर्यीकरण अधूरा
आगामी 3 जुलाई से शुरू होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन भले ही बेहतर व्यवस्थाओं के दावे कर रहा हो, लेकिन जम्मू शहर में जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।
यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, इसके बावजूद शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सुंदरीकरण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य अधूरे पड़े हैं।
सड़कों की मरम्मत, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में देरी प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है।
जम्मू शहर को अमरनाथ यात्रियों का प्रवेश द्वार माना जाता है। देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालु यहीं से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अपनी यात्रा शुरू करते हैं।
ऐसे में शहर की सुंदरता और व्यवस्थाएं यात्रियों पर पहली छाप छोड़ती हैं। हालांकि इस बार तवी पुल, विभिन्न फ्लाईओवर और प्रमुख मार्गों की स्थिति प्रशासनिक दावों के विपरीत नजर आ रही है।
शहर के कई प्रमुख स्थानों पर लगाए गए सजावटी गमले या तो टूट चुके हैं या पूरी तरह गायब हो गए हैं। खाली पड़े स्टैंड और क्षतिग्रस्त गमले सुंदरीकरण व्यवस्था की अनदेखी को उजागर कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पौधों और गमलों की नियमित देखरेख नहीं होने के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
स्थानीय निवासी प्रिंस कुमार, रामकुमार और संजीव कुमार सहित कई लोगों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा वार्षिक धार्मिक आयोजन है। ऐसे समय में शहर को आकर्षक और व्यवस्थित स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि प्रशासन को प्रमुख मार्गों के सौंदर्यीकरण और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के सामने जम्मू की सकारात्मक और सुंदर छवि प्रस्तुत की जा सके।
नागरिकों का मानना है कि यात्रा शुरू होने से पहले खाली पड़े गमला स्टैंडों पर नए पौधे लगाए जाने चाहिए और टूटे हुए गमलों को बदला जाना चाहिए। उनका कहना है कि शहर की सुंदरता केवल सौंदर्यीकरण का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की मेहमाननवाजी और प्रशासनिक व्यवस्था का भी प्रतीक है।
संकेत सूचक पट्ट भी बने परेशानी का कारण... शहर में केवल सुंदरीकरण ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रभावित दिखाई दे रही हैं। भगवती नगर, बख्शी नगर फ्लाईओवर और अन्य प्रमुख मार्गों पर लगाए गए दिशा संकेतक बोर्ड झाड़ियों और पेड़-पौधों के बीच छिप गए हैं।
इससे वाहन चालकों और बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों को रास्ता पहचानने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में पहली बार जम्मू आने वाले श्रद्धालु इन संकेतक बोर्डों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उनका अस्पष्ट या छिपा होना यात्रियों के लिए भ्रम और असुविधा का कारण बन सकता है।
नगर निगम ने दिया आश्वासन..मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू नगर निगम आयुक्त डॉ. देवांश यादव ने कहा कि संबंधित क्षेत्रों में रखरखाव कार्य की पूर्व टेंडर अवधि समाप्त हो चुकी है। अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर सुंदरीकरण और रखरखाव के कार्य कराए जाएंगे।
हालांकि यात्रा शुरू होने में अब सीमित समय बचा है, ऐसे में नागरिकों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द आवश्यक कदम उठाकर शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करेगा।
अमरनाथ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसलिए यात्रा से पहले शहर को पूरी तरह तैयार करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों माना जा रहा है।
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