खबर का असर: फायर सेफ्टी और अवैध निर्माण को लेकर नए कानूनों की तैयारी: सरकार से लेकर निगम तक हरकत में
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजधानी हादसे और उठते सवालों के बीच मंत्री विजयवर्गीय ने की समीक्षा, शहर में निगम का जांच अभियान तेज
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजधानी में होटल अग्निकांड में 22 लोगों की मौत और अवैध निर्माणों, फायर सेफ्टी तथा भवन उपयोग में अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रदेश सरकार ने अग्नि सुरक्षा और कॉलोनी विकास संबंधी नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
वहीं, शहर में फायर सेफ्टी और अवैध निर्माणों को लेकर लगातार प्रकाशित खबरों के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल में प्रस्तावित मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक-2026 तथा मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम-2026 की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दोनों विधेयकों में आवश्यक संशोधन कर अगले सप्ताह पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार ने दिखाई गंभीरता: कल खुलासा फर्स्ट में प्रकाशित खबर ‘राजधानी में 22 मौतों के बाद भी नहीं चेते इंदौर के अधिकारी, क्या शहर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?’
में अवैध निर्माण, आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों, फायर सेफ्टी की अनदेखी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई की धीमी गति पर सवाल उठाए गए थे।
वर्षों से सामने आ रही शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद जिस तरह कार्रवाई नहीं हुई उसने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
अब हादसे के बाद सरकार और प्रशासन की सक्रियता को उसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है।
भारत सरकार के मॉडल फायर एक्ट के अनुरूप बनेंगे नियम: बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक-2026 को भारत सरकार के मॉडल फायर एक्ट के अनुरूप तैयार किया जाए।
उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रदेश में बड़ी इमारतें, औद्योगिक परियोजनाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होंगे। ऐसे में अग्निशमन विभाग को अत्याधुनिक उपकरण, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन से लैस करना आवश्यक है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
सभी भवनों में एक्जिट प्लान और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य होगी
विजयवर्गीय ने फायर सेफ्टी अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों की योग्यता एवं अनुभव के स्पष्ट मानक निर्धारित करने के निर्देश दिए, साथ ही अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन कर बेहतर प्रावधान शामिल करने को कहा।
बैठक में सभी भवनों में एक्जिट प्लान, फायर पाइपलाइन और सुरक्षा व्यवस्था का स्पष्ट प्रदर्शन अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया गया। अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए फायर टैक्स के सुझाव पर भी चर्चा हुई।
सरकार की समीक्षा बैठक के साथ ही इंदौर नगर निगम ने भी शहर के होटलों और व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी मानकों की जांच तेज कर दी है। आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर निगम की संयुक्त टीम द्वारा सरवटे बस स्टैंड, एबी रोड और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में स्थित होटलों एवं भवनों का निरीक्षण किया गया।
जांच में कई प्रतिष्ठानों में फायर अलार्म, हाइड्रेंट सिस्टम, स्प्रिंकलर, आपातकालीन निकास मार्ग और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां सामने आईं।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर वर्षों से संचालित इन प्रतिष्ठानों की नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई और इन्हें नियमों के विरुद्ध संचालित होने की अनुमति कैसे मिलती रही।
467 भवनों की जांच 32 पहले ही सील
निगम के आंकड़ों के अनुसार अब तक शहर के विभिन्न जोन क्षेत्रों में 467 भवनों का सर्वे किया है। जांच में 305 भवनों में फायर सेफ्टी उपकरण स्थापित पाए गए, जबकि 157 में उपकरण बंद मिले या आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था नहीं पाई गई।
अब तक 101 भवन स्वामियों और संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं तथा 32 भवनों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई भी की जा चुकी है। यह आंकड़े स्वयं दर्शाते हैं कि शहर में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी कितने बड़े पैमाने पर हो रही थी और प्रशासन लंबे समय तक इसे रोकने में विफल रहा।
समीक्षा बैठक में प्रस्तावित कॉलोनी अधिनियम-2026 पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसमें कॉलोनी पंजीयन, विकास अनुमति, नियम उल्लंघन और अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कार्रवाई संबंधी प्रावधानों को शामिल किया गया है।
मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट कहा कि अवैध और अनधिकृत कॉलोनियों पर सख्ती जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
तीन दिन का अंतिम मौका दिया
निरीक्षण के दौरान कई होटलों और भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन तथा बेसमेंट का उपयोग स्वीकृत अनुमति के विपरीत पाया गया। निगम ने संबंधित संचालकों को तीन दिन का नोटिस जारी कर कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं।
निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद पुनः निरीक्षण किया जाएगा और यदि व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं मिलीं तो संबंधित भवनों को सील कर दिया जाएगा।
हालांकि सवाल यह भी है कि जिन खामियों पर अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं, वे वर्षों से मौजूद थीं तो संबंधित विभागों ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की।
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