छात्रों के प्रदर्शन का असर: देर रात रजिस्ट्रार हटाए गए; आंदोलन जारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में नर्सिंग परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों में हो रही लगातार देरी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज होता जा रहा है।
छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए गुरुवार देर रात मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को पद से हटा दिया।
रजिस्ट्रार को हटाए जाने के बावजूद नर्सिंग छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर जताया आक्रोश
इससे पहले बुधवार को भोपाल में नर्सिंग छात्रों ने एमपीएनआरसी के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। परीक्षाओं और रिजल्ट में लगातार हो रही देरी से नाराज छात्रों ने काउंसिल की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली और उसका क्रियाकर्म किया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक एवं हाईकोर्ट मामलों के ओआईसी धीरज गोविंदानी और लीगल एडवाइजर हरीश बारी के प्रतीकात्मक पुतले भी जलाए। छात्रों ने काउंसिल की कार्यप्रणाली और लंबित परीक्षाओं को लेकर जमकर नारेबाजी की।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी परीक्षाएं लंबित
नर्सिंग छात्र संगठन के प्रतिनिधि संदीप परमार के मुताबिक, सत्र 2022-23 से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश को एक साल से अधिक समय बीत चुका है। इसके बावजूद संबंधित विद्यार्थियों की परीक्षाएं अब तक आयोजित नहीं हो सकी हैं।
छात्रों ने मांग की है कि वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में कॉलेजों के निरीक्षण और मान्यता प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
छात्रों का आरोप है कि यदि मान्यता प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निरीक्षकों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लीगल एडवाइजर की भूमिका और 10 करोड़ रुपए के खर्च पर सवाल
छात्र संगठन ने एमपीएनआरसी के लीगल एडवाइजर हरीश बारी की नियुक्ति और कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन की ओर से कई आरोप लगाए गए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
छात्रों का दावा है कि लीगल एडवाइजर की भूमिका और उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। साथ ही, काउंसिल के विभिन्न कानूनी मामलों में खर्च की गई राशि का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि काउंसिल के मामलों में वकीलों को करीब 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उनका कहना है कि इस राशि के स्रोत, भुगतान और उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
छात्रों की प्रमुख मांगें
जीएनएम अंतिम वर्ष की परीक्षा: सत्र 2021-22 के मान्यता प्राप्त संस्थानों के विद्यार्थियों को तत्काल जीएनएम अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल किया जाए।
बीएससी नर्सिंग का रिजल्ट: सत्र 2022-23 के बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष का परिणाम जल्द घोषित किया जाए और इसके बाद द्वितीय वर्ष की परीक्षा आयोजित की जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई: लंबित परीक्षाओं और मान्यता प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
मान्यता प्रक्रिया की जांच: वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में कॉलेजों को मान्यता देने की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
वित्तीय पारदर्शिता: काउंसिल की ओर से वकीलों को किए गए भुगतान और कथित 10 करोड़ रुपये के कानूनी खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
रजिस्ट्रार हटे, लेकिन आंदोलन जारी
MPNRC के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को हटाए जाने को छात्र अपने आंदोलन की बड़ी सफलता मान रहे हैं। हालांकि, संगठन का कहना है कि केवल रजिस्ट्रार को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
छात्रों की मांग है कि लंबित परीक्षाओं और परिणामों को लेकर तत्काल समयबद्ध कार्रवाई की जाए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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