ओपन स्पेस की जमीन दबाकर बनाई अवैध दुकान: नगर निगम और ड्रग विभाग की शह पर चल रहा खेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

विजय नगर के शिवाय सेंटर का मामला, नियमों की अनदेखी के बावजूद कार्रवाई नहीं, सड़क पर पार्किंग की समस्या जस की तस
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
विजय नगर स्कीम 54 में नियमों को दरकिनार कर संचालित हो रहे ‘शिवाय एडवांस गैस्ट्रो, लीवर एंड डायबिटीज व डायग्नोस्टिक सेंटर' की मनमानी बढ़ रही है। दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर मूकदर्शक बने हुए हैं।
सत्यसाईं चौराहे से स्कीम 54 जाने वाले इस तिराहे को निजी चिकित्सा संस्थान के व्यावसायिक स्वार्थ के लिए छोड़ दिया गया है। इस मामले में नगर निगम सहित ड्रग एवं कंट्रोल विभाग के जिला अधिकारी और यातायात पुलिस की लापरवाही दिख रही है। भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी कर खड़े किए इस अवैध साम्राज्य पर किसी भी विभाग ने प्रभावी कदम नहीं उठाया है। इससे यह साफ है कि पूरा तंत्र इन डॉक्टरों के आगे नतमस्तक हो चुका है।
नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं
चिकित्सा केंद्र के संचालक डॉ. अमोल पाटिल और डॉ. अमित बूंदीवाल द्वारा नियमों की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिल्डिंग परमिशन के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी कमर्शियल इमारत में ओपन स्पेस को खाली रखना होता है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में दमकल गाड़ियां और एंबुलेंस आसानी से आ-जा सकें, लेकिन यहां डॉ. पाटिल और डॉ. बूंदीवाल ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सौदेबाजी से इस जमीन पर पक्का अवैध निर्माण कर मेडिकल दुकान खड़ी कर दी है।
प्रशासन लाचार
नगर निगम का पीला पंजा जहां आम और गरीब नागरिकों के छोटे-मोटे अतिक्रमणों पर तुरंत चल जाता है, वहीं इस अवैध निर्माण के सामने पूरी तरह लाचार और पंगु बना हुआ है। निगम प्रशासन ने इस खुले उल्लंघन पर पूरी तरह से मुंह मोड़ लिया है और डॉक्टरों के खिलाफ कोई एक्शन न लेकर उन्हें अभयदान दे रखा है।
भ्रष्टाचार और मिलीभगत का सबसे बड़ा उदाहरण ड्रग एवं कंट्रोल विभाग की कार्यप्रणाली में देखने को मिलता है। विभाग के जिला अधिकारी ने बिना पार्किंग स्पेस और पूर्णतः अवैध रूप से ओपन स्पेस एरिया में बनी इस दुकान को दवाई बेचने का लाइसेंस कैसे जारी कर दिया, यह समझ से परे है।
मामले का खुलासा होने के बावजूद ड्रग विभाग के जिला अधिकारी ने इस दुकान के लाइसेंस की समीक्षा करने या इसे तत्काल सस्पेंड करने की हिम्मत तक नहीं दिखाई। इस प्रकार का रवैया सीधे तौर पर नियमों को ठेंगा दिखाने वाले डॉक्टरों को खुली छूट और खुला संरक्षण देने जैसा है, जिससे विभाग की साख और निष्पक्षता पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है।
ट्रैफिक जाम को लेकर यातायात पुलिस का रवैया गैर जिम्मेदाराना
तिराहे पर हर दिन पैदा होने वाले ट्रैफिक जाम को लेकर यातायात पुलिस का रवैया भी पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना बना हुआ है और वह कार्रवाई करने के खिलाफ दिख रहा है। शिवाय सेंटर के प्रबंधन ने सार्वजनिक सड़क को अपनी निजी संपत्ति समझ रखा है और वहां बाउंसरों की तैनाती कर दी है।
ये निजी गार्ड मुख्य सड़क पर मरीजों के दोपहिया और चार पहिया वाहनों को दो-दो कतारों में खड़ा करवाते हैं। सत्यसांई चौराहे को जोड़ने वाला यह सबसे प्रमुख मार्ग होने के कारण यहां सुबह से रात तक गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। इस रास्ते से गुजरने वाली एंबुलेंस और आम राहगीर घंटों इस जानलेवा जाम में फंसकर परेशान होने को मजबूर हैं।
यदि कोई आम नागरिक इस अव्यवस्था का विरोध करता है या वहां अपनी गाड़ी खड़ी करने की कोशिश करता है, तो ये बाउंसर सरेआम बदतमीजी और गुंडागर्दी पर उतारू हो जाते हैं। सार्वजनिक सड़क पर अपनी खुद की गैरकानूनी व्यवस्था चलाने वाले इन गुंडों के खिलाफ यातायात पुलिस कार्रवाई करने से कतरा रही है।
भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर
नगर निगम के जोन अधिकारियों और बिल्डिंग अधिकारी की भूमिका भी मामले में संदेह के घेरे में है। रोजाना इस मार्ग पर आंखें मूंदकर निकलने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है, क्योंकि इन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को सड़क पर फैला यह अतिक्रमण और अनिवार्य ओपन स्पेस को दबाकर बनाई गई मेडिकल दुकान दिखाई नहीं देती।
यह एरिया ब्लॉक होने से बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के मानकों की धज्जियां उड़ चुकी हैं, जो किसी हादसे को खुला आमंत्रण है। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला धृतराष्ट्र बना बैठा है। रहवासियों में प्रशासन के इस पक्षपातपूर्ण और कमजोर रवैये को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
नगर निगम के पास इस अवैध निर्माण की शिकायतें पहुंचने के बाद भी फाइलों को दबा दिया गया है। जब आम जनता के हितों की रक्षा करने वाले जिम्मेदार अधिकारी ही इस प्रकार पीछे हटेंगे, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाएगा।
डॉक्टर अमोल पाटिल और डॉक्टर अमित बूंदीवाल के प्रभाव के आगे ड्रग विभाग के जिला अधिकारी और यातायात पुलिस की टीमें कार्रवाई करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही हैं।
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