दान की जमीन पर बन रही अवैध बहुमंजिला व्यावसायिक बिल्डिंग: नियमों की खुलेआम धज्जियां
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सराफा बाजार जैसे अति भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्र में नियमों को ताक में रख दान की जमीन पर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत का निर्माण किया जा रहा है। इसमें अवैध बेसमेंट, बैकलेन पर कब्जा, नक्शे के विपरीत चौथी मंजिल का निर्माण और छोटी-छोटी दुकानों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, जबकि नगर निगम द्वारा इस प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती।
प्लींथ लेवल की जांच नहीं, सर्टिफिकेट लंबित: निर्माण के दौरान सबसे अहम चरण ग्राउंड लेवल पर प्लींथ लेवल (कुर्सी हाइट) की जांच होती है, लेकिन इस प्रकरण में न तो मौके पर सही तरीके से निरीक्षण किया गया और न ही प्लींथ लेवल सर्टिफिकेट जारी हुआ।
नियमानुसार बेस डालते समय बीआई (बिल्डिंग इंस्पेक्टर) और कंसल्टेंट इंजीनियर दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है कि निर्माण नियमानुसार हो, लेकिन यहां यह प्रक्रिया पूरी तरह नजरअंदाज की गई।
बीआई और कंसल्टेंट इंजीनियर की जवाबदारी: नगर निगम के नियम अनुसार कंसल्टेंट इंजीनियर अपना लाइसेंस लगाकर यह गारंटी देता है कि संपूर्ण निर्माण नियमों और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप किया जाएगा।
इस भवन के कंसल्टेंट इंजीनियर आदर्श वर्मा हैं, जिनकी जिम्मेदारी निर्माण की वैधानिकता सुनिश्चित करने की थी। इसके बावजूद न केवल नियमों का उल्लंघन किया गया, बल्कि अब तक कार्य-पूर्णता प्रमाण-पत्र भी जारी नहीं हुआ है।
दो प्लॉट का संयुक्तिकरण; निकासी एक, बड़ा हादसा तय: दो भूखंडों का संयुक्तिकरण कर व्यावसायिक बिल्डिंग बनाई जा रही है, लेकिन निकासी एक ही रखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि भविष्य में आगजनी या कोई अन्य हादसा होता है तो जान-माल की भारी क्षति की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
डेढ़ लाख रुपए प्रति स्क्वेयर फीट में दुकानों की बिक्री
इस अवैध व्यावसायिक भवन में लगभग डेढ़ लाख रुपए प्रति स्क्वेयर फीट की दर से दुकानों की खुलेआम बिक्री की जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध निर्माण को संरक्षण प्राप्त है।
आपत्ति का इंतजार: इस अवैध भवन का नक्शा निरस्त हो सकता है, क्योंकि निर्माण अनुमति की वैधता तीन वर्ष की होती है, लेकिन नक्शा निरस्ती के लिए न तो कोई आपत्ति दर्ज की जा रही है और न ही निगम आयुक्त स्वप्रेरणा से संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई कर पा रहे हैं। इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण की चर्चा भी तेज है।
कथित भ्रष्टाचार और लाइसेंस के दुरुपयोग का आरोप: सूत्रों का दावा है कि निगम में करोड़ों रुपए के कथित भ्रष्टाचार में लिप्त मस्टरकर्मी असलम खान का कार्यालयीन कार्य कंसल्टेंट इंजीनियर आदर्श वर्मा द्वारा संभाला जाता है। वर्मा के नाम से निगम में लाइसेंस लेकर नक्शा स्वीकृत कराया गया, लेकिन निर्माण नियमों के विपरीत किया जा रहा है।
जगदीश मंदिर की दान की जमीन, 40 करोड़ का सौदा
खुलासा फर्स्ट द्वारा यह खुलासा किया गया था कि जगदीश मंदिर के नाम दान में दी गई जमीन पर पुजारी परिवार द्वारा भवन बनाकर वर्षों तक व्यावसायिक दुकानें संचालित की गईं, जिसे बाद में लगभग 40 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। दस्तावेजों के अनुसार यह भूमि भूखंड क्रमांक 44, बड़ा सराफा, श्रीनाथ एंटरप्राइजेस (पार्टनरशिप), श्रेय जैन पिता मनीष जैन और भूखंड क्रमांक 45 (पुराना 44), बड़ा सराफा, सुजाता पति मधु कुमार जैन के नाम दर्ज है।
तीन बार नोटिस, फिर भी निर्माण जारी: राजमोहल्ला जोन-2, वार्ड-69 स्थित इन दोनों भूखंडों पर ग्राउंड+3 फ्लोर व्यावसायिक भवन की अनुमति दी गई थी, लेकिन नक्शे के विपरीत निर्माण को लेकर अब तक तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी होने से पहले ही व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं, जो नगर निगम अधिनियम 1956 की धारा 301 का सीधा उल्लंघन है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश: जगदीश मंदिर की दान की जमीन पर सराफा बाजार में बन रही इस अवैध बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि लोगों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले सराफा बाजार क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य बंद कराया जाएगा, दोषियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी और आगे इस तरह का अवैध निर्माण न हो, इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा।
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