55 लाख की अवैध शराब: माफिया तक पहुंची पुलिस की जांच; आलीराजपुर बॉर्डर पर देना थी डिलीवरी, फिर गुजरात के अलग-अलग शहर में होना थी सप्लाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

मुख्य आरोपी शहर के कई ठेकदारों के था संपर्क में, नंबर आए सामने
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कनाड़िया पुलिस द्वारा 912 पेटी अवैध शराब से भरे ट्रक की जब्ती के बाद कार्रवाई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अंतरराज्यीय शराब तस्करी के संगठित नेटवर्क की नई परतों का खुलासा हो रहा है।
करीब 55 लाख रुपए की शराब, 50 लाख रुपए का ट्रक और 5 लाख रुपए की कार सहित लगभग 1.10 करोड़ रुपए का मशरूका जब्त कर पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद मुख्य आरोपी ने पूछताछ में कई खुलासे किए,जिसकी जद में शहर के ठेकेदार भी आ सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक, कनाड़िया पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि यूपी नंबर का एक ट्रक बड़ी मात्रा में अवैध शराब लेकर बायपास से गुजरने वाला है। सूचना मिलते ही कनाड़िया थाना पुलिस ने एचआर रिसोर्ट के पास घेराबंदी कर ट्रक को रोक लिया।
ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें 912 पेटी बियर और अंग्रेजी शराब मिली। मौके से चालक आकाश अहिरवार और उसका साथी राहुल नामदेव गिरफ्तार किए गए। दोनों के पास शराब परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से कड़ी से पूछताछ की तो जांच में सामने आया कि शराब से भरे ट्रक के आगे एक कार लगातार चल रही थी। इस कार का काम रास्ते की निगरानी करना था। यदि कहीं पुलिस की चेकिंग दिखाई देती तो ट्रक चालक को पहले ही सतर्क कर दिया जाता।
रास्ता साफ मिलने पर ही ट्रक आगे बढ़ता था। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाई और चिनार हिल्स के पास एक हुंडई एक्सेंट कार से विजय वैष्णव, दीपांशु सोनोने और नीतेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया।
कार से 15 पेटी अवैध शराब भी बरामद हुई। आरोपी पूरी सप्लाई चेन का हिस्सा थे और ट्रक को सुरक्षित मुकाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे थे। मामले में पुलिस ने आकाश पिता लक्ष्मणसिंह अहिरवार निवासी बालाजी आंगन काॅलोनी हातोद, राहुल पिता राजू नामदेव निवासी अखंड नगर 60 फीट रोड एरोड्रम, विजय पिता यशवंत वैष्णव निवासी कामायनी नगर राऊ, दीपांशु पिता दीपकराव सोनोने निवासी अजयबाग काॅलोनी मूसाखेड़ी और नीतेश पिता मदन प्रजापति निवासी पारसी मोहल्ला छावनी को गिरफ्तार कर इनके कब्जे से कुल 927 पेटी अवैध शराब, अशोक लीलैंड कंपनी का ट्रक और एक हुंडई एक्सेंट कार जब्त की है।
क्या इंदौर के ही ठेकेदारों का माल था गाड़ी में?... कनाड़िया पुलिस की जांच में भले ही आरोपी शिवपुरी ग्वालियर से माल लाना बता रहे हो, लेकिन सूत्रों का दावा है कि उक्त माल इंदौर के ही ठेकेदारों का था, जो कि शहर के आसपास की वाइन शॉप से भरा गया था, जिसकी अलीराजपुर बॉर्डर पर सप्लाई देने थी, जिसके बाद उक्त बड़ी मात्रा में अवैध शराब गुजरात के कई शहरों में सप्लाई होनी थी।
पुलिस को आरोपी विजय के मोबाइल में से गुजरात के उस अवैध शराब माफिया का नंबर भी मिल गया है, जिसे उक्त शराब सप्लाई होनी थी। साथ ही इंदौर के ही कई ठेकेदारों के नंबर भी पुलिस को मिले हैं।
इंटरनेट काॅलिंग का करते थे उपयोग
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी विजय वैष्णव और अन्य मोबाइल पर सामान्य कॉल करने से बचते थे। गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग और वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करता था, ताकि उनकी वास्तविक लोकेशन और पहचान आसानी से ट्रेस न हो सके।
पुलिस ने जब जब्त मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और डिजिटल संपर्कों की तकनीकी जांच की तो पुलिस को उसमें कुछ ज्यादा नहीं मिला, लेकिन जब पुलिस ने इंटरनेट काॅलिंग जैसे वॉट्सएप आदि चेक किया तो उसमें लगातार कॉलिंग मिली। मुख्य आरोपी विजय वैष्णव के संपर्क में शहर के ही कई ठेकेदार थे।
पहले भी पकड़ा जा चुका 750 पेटी अवैध शराब के साथ
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विजय के खिलाफ पहले से धोखाधड़ी के तीन और आबकारी अधिनियम का एक केस दर्ज हैं। वर्ष 2023 में भी उसे इंदौर क्राइम ब्रांच ने 750 पेटी अवैध शराब का साथ पकड़ा था।
वह लाखों की धोखाधड़ी के मामले में भी आरोपी रहा है। विजय इस मामले का मास्टरमाइंड भी है, जो इंदौर और इंदौर के आसपास के इलाकों में रहने वाले साथियों के साथ मिलकर शहर के ही कई ठेकेदारों का माल गुजरात पहुंचाने का काम करता है।
विजय के मोबाइल में से पुलिस को शहर के ही कई ठेकेदारों के नंबर भी मिले हैं, जो कि सप्लाई के दौरान उसके संपर्क में थे। पुलिस अब मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है, जो इस नेटवर्क के संचालन में भूमिका निभा रहे थे।
कई संदिग्ध मोबाइल नंबर भी जांच के रडार पर हैं। इन नंबरों के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि शराब की खरीद, परिवहन और डिलीवरी का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित हो रहा था।
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