खबर
Top News

पद और नाम है, तो हुए बदनाम: नाम वाली संपत्ति होना अपराध कैसे; बेनामी संपत्ति वाले कर रहे कटघरे में खड़ा

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 जून 2026, 2:39 pm
14 views
शेयर करें:
पद और नाम है, तो हुए बदनाम

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जो है नाम वाला वही तो बदनाम है... और साथ में बड़ा पदनाम हो, तो बदनाम करना और भी आसान है। बेनामी संपत्ति खरीदना बड़ा आर्थिक अपराध है, लेकिन राजनीति से अकूत कालाधन जुटाकर देश-विदेश में बेनामी संपत्ति खड़ी करने वाले नेताओं को इसका जरा भी अपराधबोध नहीं है। शायद इसीलिए नामजद खरीदी गई संपत्ति पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों की उस संपत्ति का है, जिसे लेकर चारों ओर हल्ला मचा हुआ है, जबकि यह सारी संपत्ति सरकार के संपदा पोर्टल पर ऑन रिकॉर्ड दर्ज है। किसी बड़े राजनेता के लिए ऐसा करना राजनीतिक शुचिता ही कहा जाएगा, जिसके लिए बड़ी हिम्मत और बड़ा दिल चाहिए।

मुख्यमंत्री के संपत्ति विवाद की तुलना यदि इंदौर के पक्ष-विपक्ष दोनों दलों के बड़े नेताओं से करें तो पाएंगे कि इंदौर के विधायक हों या बीते दो-तीन दशक तक इंदौर व्यापार अपराधीकरण में विराजे तथाकथित विकास पुरुष राजनेताओं की काली कमाई से खड़ी की गई करोड़ों की बेनामी संपत्ति का कोई ओर-छोर नहीं है।

प्राधिकरण ने जहां-जहां भी विकास किया, वहां-वहां ऐसे नेताओं ने पहले से ही लंबी-चौड़ी संपत्तियां बेनामी तरीके से अपने कब्जे में करके बेहिसाब कालाधन कमाया। यही नहीं, इंदौर का मास्टर प्लान भी इसीलिए बदनाम है। बीते मास्टर प्लान में भी बड़े-बड़े खेल होने की चर्चा आम है।

कहीं बड़े अधिकारियों का पैसा भी इंदौर में बेनामी संपत्तियों में लगा हुआ बताया जाता है। इंदौर के नामी जनप्रतिनिधियों की बेनामी संपत्ति और कालाधन देश की सीमा से बाहर विदेश में भी लगने की चर्चा सुनाई देती रही है।

ऐसे में समर्थक कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने ऐसा तो कुछ नहीं किया, जैसा उनको गरियाने वाली राजनीति कर रहे नेताओं ने किया है। क्या मुख्यमंत्री का कसूर यह है कि उन्होंने नाम से संपत्ति खरीदी?

राजनीति और सरकार का लंबा अनुभव डॉ. मोहन यादव को है। वे चाहते तो करोड़ों की बेनामी संपत्तियां खड़ी कर सकते थे और यदि ऐसा करते तो क्या यह हल्ला मचता। बेनामी संपत्तियां खरीदने वाले नेताओं की तरह वह भी आराम से बिना किसी चिंता-फिक्र के कालेधन को दिन दूना और रात चौगुना करते।

सवाल मुख्यमंत्री से पूछे जा रहे हैं, जबकि असल में उन नेताओं से पूछना चाहिए, जो आरोप लगा रहे हैं। आज तक जो भी विपक्ष में रहा, उसे दल के राजनेताओं ने सरकार में बैठे और इंदौर जैसे शहर विकास के प्राधिकरण मैं बैठे राजनेता व मास्टर प्लान का बड़ा खेल करने वाले नेताओं के खिलाफ कोई खुलासा क्यों नहीं किया? क्यों ऐसे नेताओं की संपत्तियों और कालेधन के निवेश की खोज समय-समय पर विपक्ष में रहने वाले नेताओं ने नहीं की?

क्यों नहीं मीडिया ने इस तरह के मामले का संज्ञान लिया? भाजपा की मीडिया सेल के एक पदाधिकारी यह कहते हुए बताते हैं कि कालाधन और बेनामी संपत्तियों के अपराधी राजनेता सिर्फ मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए इस तरह के आरोपों का खेल खेल रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह सब भाजपा की सरकार और मुख्यमंत्री को अस्थिर करने के लिए सुनियोजित सत्ता षड्यंत्र है।

विपक्ष के हल्ला बोल के बाद समर्थक भी पूरी तैयारी के साथ मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के बचाव में आ गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों द्वारा खरीदी गई जमीन को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच अब समर्थकों ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। उनका तर्क है कि यदि संपत्ति वैध तरीके से खरीदी गई है, संबंधित व्यक्तियों के नाम पर दर्ज है और सरकार के रिकॉर्ड में उपलब्ध है, तो इसे भ्रष्टाचार का प्रमाण कैसे माना जा सकता है।

समर्थकों का कहना है कि देश में सबसे बड़ा आर्थिक अपराध बेनामी संपत्ति और कालेधन से अर्जित अघोषित संपत्तियां हैं, जबकि मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी जिन जमीनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वे कथित तौर पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत खरीदी गईं और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। उनका सवाल है कि क्या अपने नाम से संपत्ति खरीदना ही अपराध हो गया है?

मुख्यमंत्री के पक्ष में यह भी तर्क दिया जा रहा है कि भारतीय राजनीति में अनेक नेताओं पर वर्षों से बेनामी संपत्ति, भूमि कारोबार और कालेधन के आरोप लगते रहे हैं। विशेष रूप से इंदौर में मास्टर प्लान, भूमि विकास और प्राधिकरण की परियोजनाओं के दौरान प्रभावशाली लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि निवेश और बेनामी संपत्ति खरीदने की चर्चाएं समय-समय पर होती रही हैं। ऐसे में समर्थकों का कहना है कि यदि तुलना की जाए तो मुख्यमंत्री पर लगे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि क्या यह पूरा विवाद केवल एक भूमि खरीद का मामला है या फिर इसके पीछे मुख्यमंत्री की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की रणनीति भी काम कर रही है। दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि खरीद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री पहले ही आरोपों को खारिज कर चुके हैं और भाजपा नेतृत्व भी उनके समर्थन में खुलकर सामने आया है। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।

क्या कहता है बेनामी संपत्ति कानून... नाम छिपाकर संपत्ति खरीदना गंभीर अपराध, कड़ी सजा का प्रावधान
देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन और बेनामी संपत्ति के खिलाफ कठोर कानून बनाए। इसके अंतर्गत कई मामलों में कार्रवाई भी हुई, लेकिन अभी इस तरह की कार्रवाइयां बंद जैसी हैं।

कानून लागू होते समय कहा गया था कि अब कोई भी बेनामी संपत्ति रखने वाला कानून से बच नहीं पाएगा। उसे अपनी संपत्ति का खुलासा करना ही होगा। अन्यथा सरकार ऐसी बेनामी संपत्तियों को राजसात कर लेगी।

सरकार की इस घोषणा के बाद देशभर में बड़ी हलचल पैदा हो गई थी। अब इस पर फिर से बहस शुरू हो सकती है, क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कानूनी रूप से खरीदी गई नामजद संपत्ति पर भी विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए, जबकि उज्जैन, भोपाल, इंदौर से लेकर दिल्ली, मुंबई और केरल से कन्याकुमारी तक राजनेताओं और कारोबारियों की अर्बन की बेनामी संपत्तियां कालाधन उगलने वाली इंडस्ट्री बनी हुई हैं।

काजल की इस कोठरी में रंगे हुए विधायक हों या सांसद, मंत्री या फिर पक्ष-विपक्ष के नेता... अधिकांश के चेहरों पर बेनामी संपत्तियों और कालेधन की कालिख दिखाई देती है।

मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों के बहाने अब सरकार को क्यों नहीं सबसे पहले मध्य प्रदेश के राजनेताओं की बेनामी संपत्ति का हिसाब-किताब खंगालना चाहिए? ऐसा इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कानून कहता है कि बेनामी संपत्ति रखना या खरीदना गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। इसे रोकने के लिए बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016 लागू है, जिसने पुराने कानून को और अधिक सख्त बनाया।

कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपनी अवैध या अघोषित आय से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर संपत्ति खरीदता है, जबकि वास्तविक लाभ और नियंत्रण स्वयं रखता है, तो वह बेनामी संपत्ति मानी जा सकती है।

हालांकि हर दूसरे व्यक्ति के नाम की संपत्ति स्वतः बेनामी नहीं होती। परिवार के कुछ मामलों, वैध भुगतान और कानूनी अपवादों को भी कानून मान्यता देता है।

यदि जांच में कोई संपत्ति बेनामी साबित होती है, तो सरकार उसे जब्त (कुर्क) कर सकती है। दोषी पाए जाने पर 7 वर्ष तक की जेल और संपत्ति के उचित बाजार मूल्य के 25% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के अपने या परिवार के नाम पर वैध आय और कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्ति खरीदना अपने-आप में अपराध नहीं है।

अपराध तब बनता है, जब लेनदेन कानून की दृष्टि में बेनामी या अवैध धन से जुड़ा हुआ सिद्ध हो जाए। इसलिए किसी भी संपत्ति को बेनामी या अवैध मानने का निर्णय केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि सक्षम जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाता है।

संबंधित समाचार

पूर्व मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान
Top News

पूर्व मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान:कहा-अब राजनीति नहीं; धर्म की रक्षा करेंगे, दशहरे पर निकालेंगे अयोध्या यात्रा

about 6 hours ago
भाजपा मंडल अध्यक्ष के जन्मदिन पर उड़ाई नियमों की धज्जियां
Top News

भाजपा मंडल अध्यक्ष के जन्मदिन पर उड़ाई नियमों की धज्जियां:प्रतिबंध के बावजूद बुलेट से पटाखे फोड़कर मनाया जश्न; रहवासी होते रहे परेशान

about 6 hours ago
बर्फानी बाबा का आकार घटकर एक फुट
Top News

बर्फानी बाबा का आकार घटकर एक फुट:परंतु आस्था में नहीं आई कोई कमी

about 7 hours ago
काॅलेज परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण
Top News

काॅलेज परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण:मंत्री ने बताया भारतीय ज्ञान परंपरा का वाहक ; आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक प्रगति में अहम योगदान

about 7 hours ago
लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई
Top News

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार; इस एवज में मांगी थी घूस

about 7 hours ago
पवित्र धाम, अपवित्र काम
Top News

पवित्र धाम, अपवित्र काम:चढ़ावा चोरी; चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर

about 7 hours ago
कलेक्टर जनसुनवाई में जरूरतमंदों को मिली राहत
Top News

कलेक्टर जनसुनवाई में जरूरतमंदों को मिली राहत:प्रशासन बना आमजन का सहारा; दिव्यांग बालिका की शिक्षा की हुई राह आसान

about 7 hours ago
सीमांकन के बाद भी नहीं बन पाई बाउंड्री
Top News

सीमांकन के बाद भी नहीं बन पाई बाउंड्री:सरकारी बगीचा बना अवैध पार्किंग

about 7 hours ago
वीडियो देखिये, हॉस्पिटल रोड पर जलभराव से बढ़ी परेशानी
Top News

वीडियो देखिये, हॉस्पिटल रोड पर जलभराव से बढ़ी परेशानी:मरीजों और राहगीरों को हो रही भारी दिक्कत, हादसे की आशंका

about 7 hours ago
सरकार ने फिर लिया इतने हजार करोड़ का कर्ज
Top News

सरकार ने फिर लिया इतने हजार करोड़ का कर्ज:कुल देनदारी इतने लाख करोड़ के करीब पहुंची

about 7 hours ago
सराफा में सरकारी सुविधाघर तोड़ने का आरोप
Top News

सराफा में सरकारी सुविधाघर तोड़ने का आरोप:विरोध करने पर दुकानदारों को दी जान से मारने की धमकी

about 7 hours ago
नगर निगम के नोटिस को हवा में उड़ा रहा पानी माफिया
Top News

नगर निगम के नोटिस को हवा में उड़ा रहा पानी माफिया:3 दिन का अल्टिमेटम देकर भूला कॉरपोरेशन

about 8 hours ago
दिग्गज क्रिकेटर का निधन
Top News

दिग्गज क्रिकेटर का निधन:38 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; विश्व कप में खेली थी यादगार पारी

about 8 hours ago
पिस्टल लहराकर दी गालियां
Top News

पिस्टल लहराकर दी गालियां:पुलिस को कहे अपशब्द; कुख्यात बदमाश पर बड़ी कार्रवाई

about 8 hours ago
‘ऑनर’ के नाम पर बहन का कत्ल
Top News

‘ऑनर’ के नाम पर बहन का कत्ल:एक बार फिर भाई बना जल्लाद; प्रेमी से मिलने की जिद पर दी मौत

about 8 hours ago
वीडियो देखिये, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क्या पूछा
Top News

वीडियो देखिये, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क्या पूछा:आप कब से राम भक्त हो गए; इनकी पीड़ा राम मंदिर के चढ़ावे चोरी से संबंधित नहीं

about 8 hours ago
सिंहस्थ क्षेत्र में फिर शुरू हुआ पक्का निर्माण कार्य
Top News

सिंहस्थ क्षेत्र में फिर शुरू हुआ पक्का निर्माण कार्य:गृहमंत्री अमित शाह के फैसले की अनदेखी

about 8 hours ago
सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध, सीएम डॉ. मोहन यादव
Top News

सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध, सीएम डॉ. मोहन यादव:डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र सतगढ़ी का शिलान्यास

about 8 hours ago
वीडियो देखिये, उत्कृष्ट पुलिसिंग पर 18 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित
Top News

वीडियो देखिये, उत्कृष्ट पुलिसिंग पर 18 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित:पुलिस कमिश्नर ने प्रशस्ति पत्र व नकद पुरस्कार देकर बढ़ाया हौसला

about 8 hours ago
भक्तों ने ‘जय श्री महाकाल’ का उद्‌घोष कर ग्रहण की महाप्रसादी
Top News

भक्तों ने ‘जय श्री महाकाल’ का उद्‌घोष कर ग्रहण की महाप्रसादी

about 8 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!