हनीट्रैप का जाल कितना बड़ा: स्पाई कैमरा, 9 मोबाइल और डिजिटल सबूत कर सकते हैं कई सफेदपोशों का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बिल्डर और शराब कारोबारी चिंटू उर्फ हितेंद्र सिंह ठाकुर को ब्लैकमेल करने के मामले में हुई गिरफ्तारियों ने एक बड़े और संगठित हनीट्रैप नेटवर्क की आशंका को जन्म दे दिया है।
क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे गिरोह के तार केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं बल्कि प्रभावशाली लोगों को फंसाकर करोड़ों की उगाही के संगठित खेल तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं।
कल कोर्ट को जांच एजेंसी ने बताया मुख्य आरोपी रेशू चौधरी और चर्चित हनीट्रैप की आरोपी रह चुकी श्वेता जैन के कब्जे से नौ मोबाइल फोन, एक स्पाई कैमरा, पावर बैंक, 32 जीबी मेमोरी कार्ड और दो पेन ड्राइव जब्त की गई हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद डेटा मामले की दिशा तय कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारियों को प्रारंभिक पड़ताल में कई ऐसे डिजिटल संकेत मिले हैं, जिनसे आशंका मजबूत हुई है गिरोह लंबे समय से सुनियोजित काम कर रहा था।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं किन लोगों को निशाना बनाया गया, किस प्रकार संपर्क स्थापित किए गए और कथित ब्लैकमेलिंग का तंत्र कैसे संचालित किया गया।
हिस्ट्री ऑफ कॉल रिकॉर्ड होंगे महत्वपूर्ण
जांच एजेंसियों का फोकस केवल एक शिकायतकर्ता तक सीमित नहीं है। मोबाइल डेटा, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड, फोटो और वीडियो की गहन पड़ताल की जा रही है।
इनमें अन्य पीड़ितों या प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आते हैं तो मामला प्रदेश के सबसे चर्चित ब्लैकमेलिंग प्रकरणों में शामिल हो सकता है।
क्राइम ब्रांच का मानना है फॉरेंसिक रिपोर्ट, डेटा रिकवरी और बैंकिंग लेन-देन की जांच से कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। इसी कारण जांच एजेंसी कुछ आरोपियों से अतिरिक्त पूछताछ और रिमांड की तैयारी भी कर रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह केवल ब्लैकमेलिंग केस है या वर्षों से सक्रिय कोई ऐसा नेटवर्क काम कर रहा था, जिसने रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों की उगाही का समानांतर तंत्र खड़ा कर लिया था?
जैसे-जैसे जांच बढ़ेगी वैसे-वैसे होगा खुलासा
गिरफ्तार शराब तस्कर अलका दीक्षित, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा और जयदीप जांच के दायरे में है। आरोपियों की ओर से जमानत के प्रयास शुरू हो गए हैं, लेकिन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अदालत में स्पष्ट किया जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आना बाकी हैं।
सबसे अधिक चर्चा उस स्पाई कैमरे और डिजिटल स्टोरेज डिवाइसों को लेकर है जो रेशू चौधरी से बरामद हुए हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञ खंगाल रहे हैं इन उपकरणों में रिकॉर्ड सामग्री कितनी पुरानी है, उसे किन-किन माध्यमों से साझा किया गया और डेटा हटाने की कोशिश भी की गई थी। रिकवरी से कई नए नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
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