जमीन के मुआवजे के लिए कितनी लंबी प्रतीक्षा: क्यों भटक रहे किसान, इतने परिवार क्यों हैं परेशान, सरकारें बदलती रहीं, नहीं हुआ समाधान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महू क्षेत्र के सैकड़ों किसान पिछले 36 वर्षों से अपनी जमीन के मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे हैं। महू तहसील की बेरछा रेंज स्थित करीब 1911 एकड़ भूमि रक्षा संपदा विभाग द्वारा फायरिंग रेंज और हथियार भंडारण के लिए अधिग्रहित किए जाने के बाद से 1000 से अधिक किसान परिवार आज भी उचित मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वर्षों से चल रही इस लड़ाई में कई सरकारें बदलीं, लेकिन किसानों की समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका।
कई बार लगाए गुहार, नहीं मिला समाधान
किसानों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामोतार शुक्ला का कहना है कि इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और जिला प्रशासन सहित विभिन्न स्तरों पर कई बार ज्ञापन सौंपे गए हैं।
इसके बावजूद प्रभावित किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। उनका आरोप है कि किसानों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया, जिससे प्रभावित परिवार आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
किसानों के पक्ष में आ चुका है हाईकोर्ट का फैसला
अधिवक्ता शुक्ला के अनुसार, मामले में उच्च न्यायालय किसानों के पक्ष में फैसला दे चुका है, लेकिन न्यायालय के आदेशों का पूर्ण क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई गई, जिसके कारण वर्षों बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल सका।
संघर्ष के दौरान कई किसानों का हो चुका निधन
किसान नेताओं का कहना है कि मुआवजे की इस लंबी लड़ाई के दौरान कई प्रभावित किसानों का निधन हो चुका है। अब उनके परिजन इस उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं कि उन्हें उनके अधिकार और न्याय मिल सके। परिवारों का कहना है कि जमीन जाने के बाद आजीविका के संकट से जूझना पड़ा, लेकिन मुआवजे की राशि अब तक नहीं मिली।
आंदोलन की राह पर किसान
मुआवजे की मांग पूरी नहीं होने से नाराज किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। अधिवक्ता रामोतार शुक्ला ने बताया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो 28 सितंबर से "जेल भरो आंदोलन" शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मुआवजे का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों लोगों के अधिकारों और न्याय का सवाल है।
किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब भी कोई ठोस पहल नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मामले को लेकर प्रभावित परिवारों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
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