हनी ट्रैप-2 :17 दिन बाद भी वीडियो और डिजिटल सबूतों पर सस्पेंस: ब्लैकमेलिंग एंगल पर केंद्रित जांच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप-2 मामले का खुलासा हुए 17 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जांच एजेंसियां अब तक मुख्य रूप से ब्लैकमेलिंग और उगाही के एंगल पर ही फोकस करती नजर आ रही हैं। मामले में जब्त किए गए मोबाइल फोन, एसडी कार्ड, पेन ड्राइव और कथित वीडियो सामग्री को लेकर पुलिस ने अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आरोपियों से बरामद डिजिटल उपकरणों में क्या सामग्री मिली है और क्या उसमें किसी रसूखदार व्यक्ति के फोटो या वीडियो मौजूद हैं, इस पर जांच एजेंसियां पूरी तरह मौन हैं।
आरोपियों के पास से मिले कई डिजिटल डिवाइस
मुख्य आरोपी श्वेता जैन के पास से पांच मोबाइल फोन, रेशू चौधरी के पास से चार मोबाइल फोन, 32 जीबी का एसडी कार्ड, दो पेन ड्राइव और कथित स्पाई कैमरे बरामद किए गए हैं। हालांकि इन उपकरणों की जांच के नतीजों पर पुलिस ने अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है।
डीसीपी बोले- कुछ आरोपियों का वीडियो बनाने का इतिहास
डीसीपी क्राइम राजेश कुमार त्रिपाठी ने स्वीकार किया है कि कुछ आरोपियों का वीडियो बनाने का पुराना इतिहास रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि मामला अभी जांच के अधीन है और जब्त मोबाइल फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
अलका दीक्षित और जयदीप फिर रिमांड पर
पुलिस ने फिर कथित शराब कारोबारी अलका दीक्षित और उसके बेटे जयदीप दीक्षित को एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया। पूछताछ के बाद दोनों को गुरुवार को पुनः जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि के लिए अतिरिक्त पूछताछ की गई थी।
FIR और कार्रवाई के बीच 17 दिन का अंतर
पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फरियादी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर ने शिकायत में आरोप लगाया है कि 28 अप्रैल की रात सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में उसे रोककर मारपीट की गई, एक करोड़ रुपए की मांग की गई और रकम नहीं देने पर फोटो-वीडियो वायरल करने तथा जान से मारने की धमकी दी गई। हालांकि शिकायत में वर्णित घटना और पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बीच लगभग 17 दिन का अंतर रहा। इसके बाद 17 मई की रात करीब 40 अधिकारियों की टीम ने एक साथ सात ठिकानों पर छापेमारी कर अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, श्वेता जैन, रेशू चौधरी, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित और हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा सहित अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बाद 18 मई को क्राइम ब्रांच ने औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया और आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड प्राप्त की गई।
कई सवालों के जवाब अब भी बाकी
मामले में अब तक सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल उपकरणों में आखिर क्या मिला है। क्या जांच केवल उगाही और ब्लैकमेलिंग तक सीमित रहेगी या फिर कथित वीडियो नेटवर्क, उससे जुड़े लोगों और संभावित प्रभावशाली चेहरों तक भी पहुंचेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस जांच जारी होने का हवाला देकर किसी भी संवेदनशील जानकारी का खुलासा करने से बच रही है।
संबंधित समाचार

युवक ने की आत्महत्या:डंपर से फंदा लगाकर दी जान; पत्नी को लेने ससुराल गया था मृतक

छेड़छाड़ का आरोपी गिरफ्तार:जंगल में ले जाकर की थी जबरदस्ती; कोर्ट में होगी पेशी

हनीट्रैप में भाजपा नेत्री गिरफ्तार:फर्नीचर व्यापारी से रुपए मांगने का आरोप

नशे के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई:63 पेटी अंग्रेजी शराब और लोडिंग वाहन जब्त; आरोपी फरार
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!