करोड़ों के लाइट हाउस प्रोजेक्ट की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त: निगमायुक्त को व्यक्तिगत पेशी के आदेश; तीन साल में ही इस तरह की शिकायतें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इंदौर में तैयार किया गया बहुचर्चित लाइट हाउस प्रोजेक्ट अब अपनी खराब निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 128 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट में महज तीन साल के भीतर ही फ्लैटों में सीपेज, लीकेज और अन्य समस्याओं की शिकायतें सामने आने लगी हैं। मामले को लेकर दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने यह आदेश उस समय दिया, जब निगम की ओर से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं की गई। मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने निगमायुक्त को 14 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
गुलमर्ग कॉम्प्लेक्स-2 में बनाए गए थे 1040 फ्लैट
इंदौर के गुलमर्ग कॉम्प्लेक्स-2 में केंद्र सरकार के लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत 1040 फ्लैटों का निर्माण किया गया था। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत तैयार किया गया था। इसमें आधुनिक प्री-फेब्रिकेटेड सैंडविच तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
इस प्रोजेक्ट का वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल उद्घाटन किया था। उस समय इंदौर नगर निगम ने इसे शहर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए आधुनिक और किफायती आवास योजना के रूप में पेश किया था।
तीन साल में ही सामने आने लगीं निर्माण संबंधी शिकायतें
रहवासियों का आरोप है कि जिस प्रोजेक्ट को आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं वाला बताया गया था, उसमें अब रहने में परेशानी होने लगी है। फ्लैटों में मुख्य रूप से ये समस्याएं सामने आई हैं- दीवारों में सीपेज और नमी। पाइपलाइन लीकेज। कमरों में गंदा पानी भरने की शिकायत। प्लास्टर और निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं। नमी के कारण बिजली लाइनों में शॉर्ट सर्किट का खतरा। रहवासियों का कहना है कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी उन्हें मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
रहवासी नरेंद्र गोस्वामी ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
गुलमर्ग कॉम्प्लेक्स-2 के रहवासी नरेंद्र गोस्वामी ने इन समस्याओं को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए इस प्रोजेक्ट में निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया है और रहवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों और एजेंसियों से जवाब मांगा था।
हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और निर्माण एजेंसी को भेजा नोटिस
मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश सरकार, इंदौर नगर निगम और निर्माण एजेंसी मेसर्स केपीआर प्रोजेक्ट्स कॉन प्रा. लि. को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुराग जैन ने कोर्ट में मामले की पैरवी करते हुए बताया कि फ्लैटों में लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
निर्माण एजेंसी को सुधार के निर्देश, फिर भी नहीं सुधरे हालात
शिकायतों के बाद इंदौर नगर निगम ने निर्माण एजेंसी को फ्लैटों में आ रही समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रहवासियों का कहना है कि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
12 लाख रुपए तक है एक फ्लैट की कीमत
लाइट हाउस प्रोजेक्ट में बनाए गए एक फ्लैट की कीमत करीब 12 लाख रुपए बताई गई है। हितग्राहियों को इसमें लगभग 6 लाख रुपए तक का अनुदान भी दिया गया था। ऐसे में रहवासियों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी यदि आवास में मूलभूत समस्याएं बनी रहती हैं तो यह गंभीर विषय है।
अब निगमायुक्त को देना होगा जवाब
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सभी की नजर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल की पेशी और कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर है। मामले में यह स्पष्ट होगा कि निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी, निगम की निगरानी व्यवस्था और शिकायतों के समाधान को लेकर क्या कदम उठाए गए।
128 करोड़ रुपए के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर सरकारी आवास योजनाओं में गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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