कचरे के ढेरों को लापरवाही की मिट्टी से ढंका जा रहा: देशभर में स्वच्छता का सिरमौर कहे जाने वाला शहर सवालों के घेरे में
KHULASA FIRST
संवाददाता

पूरी कॉलोनी ही समस्या बन गई
कालिंदी गोल्ड के रहवासियों का फूटा गुस्सा
खुदी सड़क मरम्मत के इंतजार में
कुएं पर स्लैब डालकर हो रहा अवैध निर्माण
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक मीडिया हाउस ने एप्लीकेशन पर मोहल्ले की समस्याओं के समाधान को लेकर अभियान चलाया है। उन्हीं समस्याओं में से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को खुलासा फर्स्ट पाठकों के सामने लाया है।
देशभर में लगातार स्वच्छता का ताज अपने नाम करने वाला इंदौर फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस शहर को साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बताया जाता है, वहीं अब कचरे के निपटान को लेकर चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं।
मामला लालाराम नगर क्षेत्र का है, जहां हजारों टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित करने के बजाय उस पर मिट्टी डालकर छिपाने का दावा किया जा रहा है।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल कचरा प्रबंधन की लापरवाही नहीं, बल्कि स्वच्छता के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को भी उजागर करेगा।
सवाल यह है कि क्या स्वच्छता में नंबर-1 शहर की चमक के पीछे कचरे के ऐसे पहाड़ दबाए जा रहे हैं, जिन्हें मिट्टी की परतों से ढंककर अदृश्य बनाने की कोशिश की जा रही है?
लालाराम नगर में दिखी अव्यवस्था...लालाराम नगर स्थित एसबीआई एटीएम के पास, गीता नगर पुलिया के नीचे नाले किनारे का यह मामला स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद सामने आया है।
शिकायत के आधार पर पड़ताल में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो निगम की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
“तुम्हारे पांवों के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं’... तो चलिए आपको यकीन दिलाते हैं लालाराम नगर में कचरे के ढेरों को मिट्टी से ढंके हुए पहाड़ के जरिए।
क्षेत्र के निवासी अथर्व तिवारी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर, यह खुलासा किया है कि इंदौर नगर निगम की गाड़ियां वर्षों से खुले स्थान पर कचरा डाल रही है।
आरोप है कि बाद में बुलडोजर की सहायता से कचरे के ऊपर मिट्टी की पतली परत बिछाकर उसे छिपाने का प्रयास किया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है, जबकि कचरे का वास्तविक समाधान नहीं किया जा रहा।
इंदौर मॉडल पर कई प्रश्नचिह्न... इस पूरे मामले ने स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार अव्वल रहने वाले इंदौर मॉडल पर कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। रहवासियों का आरोप है कि यदि खुले में कचरा डालने और उसे मिट्टी से ढंकने का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का केंद्र बन सकता है।
क्या कहता है वैज्ञानिक दृष्टिकोण...विशेषज्ञों के अनुसार, अपशिष्ट और औद्योगिक कचरे का कुप्रबंधन मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा है। खुले में कचरा डालना, जलाना या बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के दबाना वायु, जल और मिट्टी को प्रदूषित करता है।
इससे भूजल दूषित होने, दुर्गंध फैलने, संक्रामक रोगों के प्रसार, श्वसन संबंधी बीमारियों तथा दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
जनता के मन की पीड़ा...यदि भविष्य में इस प्रकार के कचरा प्रबंधन के कारण क्षेत्र में पर्यावरणीय या स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इंदौर नगर निगम, या संबंधित प्रशासनिक अधिकारी या फिर मध्य प्रदेश सरकार।
इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग पर गर्व करने वाले शहरवासियों के मन में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्वच्छता का मॉडल केवल आंकड़ों तक सीमित है, या फिर जमीनी स्तर पर भी उतना ही प्रभावी है?
अब प्रशासन पर निगाहें...लापरवाही के इस पूरे मामले में अब निगाहें प्रशासन पर है कि वह इस शिकायत की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और खुले में कचरा डालने के आरोपों पर क्या जवाब देता है।
बिजली, पानी, सड़क और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे लोग, जिम्मेदार विभागों पर लगाए गंभीर आरोप
भंवरासला स्थित कालिंदी गोल्ड कॉलोनी के रहवासियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है। आए दिन घंटों तक बिजली बंद रहती है।
पेयजल के नाम पर घरों तक बदबूदार और काले रंग का पानी पहुंच रहा है। पानी में दुर्गंध आती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।
स्वच्छता में लगातार सातवें आसमान पर रहने वाले शहर इंदौर की यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। क्षेत्र की बदहाल व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए स्थानीय आशीष कुमार ने कॉलोनी कहा कि इस कॉलोनी में समस्या नहीं है, बल्कि पूरी कॉलोनी ही एक समस्या बन गई है।
लोगों का आरोप है कि विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी न तो फोन उठाते हैं और न ही बिजली सप्लाई बहाल होने की समय-सीमा बताते हैं। लंबे समय तक बिजली गुल रहना आम समस्या बन चुकी है।
सड़कें बदहाल, गड्ढों में तब्दील रास्ते...कॉलोनी की सड़कों की हालत भी बेहद खराब है। जगह-जगह गड्ढे और टूटी सड़कें आवागमन को मुश्किल बना रही हैं। बारिश के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
सफाई व्यवस्था पर भी सवाल...रहवासियों का कहना है कि कचरा संग्रहण वाहन निर्धारित समय पर नहीं आता हैं । कई दिनों तक कचरा नहीं उठाया जाता, जिससे गंदगी का खतरा बढ़ रहा है।
जनता का सवाल... जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे? ...जब नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे हैं? स्वच्छता और विकास के दावों के बीच भंवरासला की यह हकीकत कब बदलेगी?
आखिर कालिंदी गोल्ड कॉलोनी के रहवासियों को बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी? बिजली, पानी, सड़क और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही कालिंदी गोल्ड कॉलोनी के रहवासी अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं और क्षेत्रवासियों को राहत कब मिलगी ।
दिगंबर जैन मंदिर गली में दुर्घटना का खतरा, सीवरेज कार्य के बाद नहीं हुआ सुधार कार्य, रहवासियों में नाराजगी, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल
छत्रपति नगर दिगंबर जैन मंदिर वाली गली तथा उसके आगे स्थित हाउस नंबर-93 के पास सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी नाराजगी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मार्च 2026 में सीवरेज लाइन का कार्य शुरू किए जाने के कारण सड़क खोदी गई थी, लेकिन आज तक उसकी मरम्मत नहीं की गई।
रहवासियों का कहना है कि कई महीनों से सड़क पर गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्ता बना हुआ है, जिससे आवागमन में लगातार परेशानी हो रही है। अब प्री-मानसून बारिश के कारण स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
सड़क पर पानी भरने से गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। बुजुर्गों, दिव्यांग, महिलाओं, बच्चों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटना की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराए जाने के बाबजूद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का पुनर्निर्माण नहीं किया गया तो हादसा हो सकता है।
रहवासियों की चेतावनी...शिकायतकर्ता ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि कोई दुर्घटना होती है, तो नगर निगम के अधिकारी या राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि संवेदना व्यक्त करने न आएं। जनता अपने मताधिकार के माध्यम से जवाब देगी।
जनता का सवाल...इस मामले को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है। इनका कहना है कि सीवरेज कार्य पूरा होने के महीनों बाद भी सड़क की मरम्मत क्यों नहीं हुई? बारिश से पहले सड़क को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी किसकी थी?
यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल सड़क की मरम्मत, गड्ढों को भरने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि दुर्घटना को रोका जा सके।
भागीरथपुरा में जल गंगा संवर्धन अभियान बना मजाक
प्रदेश सरकार एक ओर जल गंगा संवर्धन अभियान से कुओं, बावड़ियों और तालाबों को पुनर्जीवित और संरक्षित करने युद्ध स्तर पर अभियान चला रही है, ताकि शहर के जल स्रोत सुरक्षित रहें। वहीं, दूसरी ओर भागीरथपुरा में इन सरकारी प्रयासों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
यहां एक कुएं के ऊपर स्लैब डालकर उसे छिपाने और उस पर अवैध निर्माण करने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में तहसीलदार मल्हारगंज द्वारा जारी स्थगन आदेश ने स्थिति की गंभीरता को सामने रखा है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हलका पटवारी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम भागीरथपुरा स्थित सर्वे नंबर 119 के पैकी भाग पर निर्माण कार्य चल रहा है।
जांच में पाया गया कि कपिल कश्यप, जुगल कश्यप एवं सुनील कश्यप द्वारा कुएं में मुरम और गर्डर डालकर उसे भरा गया है और उस पर स्लैब डालकर निर्माण किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता श्री वीर बजरंग संस्था, भागीरथपुरा के संयोजक गोलू कश्यप ने ‘खुलासा फर्स्ट’ को बताया कि भू-माफिया चंद्रप्रकाश कश्यप, राजेश यादव, कपिल कश्यप, जुगल कश्यप एवं उनके साथियों द्वारा प्राचीन बजरंग मंदिर पर कब्जा करने और संचालन समिति के कर्ताधर्ताओं को जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
इतना ही नहीं, भक्तों को मंदिर आने से रोका जा रहा है। गोलू कश्यप ने आरोप लगाया है कि इन सभी के बीच सांठगांठ है और न्यायालय के आदेश के बाद भी चोरी-छिपे निर्माण कार्य कर रहे हैं।
न्यायालय ने सख्त लहजे में कहा है कि यह निर्माण कार्य सामाजिक दृष्टि से जनहानि का कारण बन सकता है, क्योंकि पुराना कुआं नीचे है और भविष्य में उसके धंसने अथवा दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
विदित हो कि 30 मार्च 2023 को रामनवमीं के अवसर पर सपना-संगीता रोड स्थित बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में एक हादसा हुआ था। मंदिर में आयोजित हवन-पूजन के दौरान प्राचीन बावड़ी की छत अचानक धंसने से कई श्रद्धालु बावड़ी में अंदर गिर गए थे। इस भीषण हादसे में 36 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
हादसे के बाद उच्च न्यायालय ने जल स्रोतों पर निर्माण करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद प्रशासन के स्थगन आदेश की अवहेलना करते हुए बिना किसी वैधानिक अनुमति के यह निर्माण खतरा बना हुआ है।
तहसीलदार ने अपने आदेश में चेतावनी दी है कि यदि यह निर्माण कार्य तत्काल नहीं रोका गया, तो संबंधितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और उसकी जवाबदारी निर्माणकर्ताओं की होगी।
सेवा सेतु ने कुओं और बावड़ियों की सफाई कर अधिकारियों को दी चुनौती
निगम में स्वच्छता के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट, फर्जीवाड़े के विरोध में कल सेवा सेतु शिक्षा एवं जनकल्याण समिति ने मोर्चा खोल दिया है।
अलग-अलग हिस्सों में ड्रेनेज लाइन के फर्जी बिलों से लेकर डिवाइडरों पर घटिया मिट्टी के रंग पोतकर खजाना खाली करने जैसे गंभीर घोटालों के बीच, समिति के पदाधिकारियों ने स्वयं मैदान संभाल लिया है।
शैलेष त्रिपाठी और हिमांशु यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर शहर के उपेक्षित कुओं और बावड़ियों की बदहाली को दूर करने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया।
इस मौके पर यादव ने निगम के भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के टैक्स का पैसा डकारने वाले अधिकारी यदि अपनी जवाबदेही नहीं समझते, तो अब उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
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