आदिपुरुष की गलती पर मांगी माफी और बोले- न्यूट्रल रहने वाले डरपोक हैं: मनोज मुंतशिर का बड़ा बयान; इंदौर की माटी और रंगमंच की नई शुरुआत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रसिद्ध गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने इंदौर में अपनी फिल्म आदिपुरुष को लेकर हुए विवाद पर खुलकर बात की और पुरानी गलती के लिए माफी मांगी। लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में ‘कृष्णा: राधा से रणभूमि तक’ शो के मंचन से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने सांस्कृतिक चेतना, युवाओं की भूमिका, राजनीति, आंदोलनों की मर्यादा और फिल्मों में बढ़ती अभद्र भाषा जैसे मुद्दों पर बेबाक राय रखी।
इंदौर की संस्कृति और भारत की कहानियों की तारीफ... 75 सदस्यीय टीम के साथ इंदौर पहुंचे मुंतशिर ने शहर की ऐतिहासिक विरासत, खान-पान और सभ्यता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में ब्रॉडवे और अन्य भव्य शो की परंपरा लंबे समय से रही है, लेकिन भारत के पास इससे कहीं अधिक महान और वैभवशाली कहानियां हैं। इसी सोच के साथ ‘सारेगामा’ म्यूजिक कंपनी और शो की निर्माता नीलम मुंतशिर के सहयोग से ‘कृष्णा: राधा से रणभूमि तक’ तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष की मेहनत से तैयार ढाई घंटे के इस शो में भगवान कृष्ण की जीवन यात्रा और उनके व्यक्तित्व को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। इंदौर में शनिवार और रविवार को इसका मंचन किया जा रहा है।
युवाओं के लिए कृष्ण के आदर्श जरूरी
मुंतशिर ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए भगवान कृष्ण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन की उलझनों में मार्गदर्शन देने वाले आदर्श भी हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर की समस्याओं के बीच कृष्ण की शिक्षाएं युवाओं को सही रास्ता दिखा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि पिछली कई पीढ़ियां देश की परिस्थितियों से संघर्ष करती रहीं, इसलिए संस्कृति और जड़ों पर उतना ध्यान नहीं दे सकीं। अब यह जिम्मेदारी युवा पीढ़ी की है कि वह भारतीय संस्कृति, भगवान कृष्ण और श्रीराम के आदर्शों को समझे और आगे बढ़ाए।
आदिपुरुष विवाद पर बोले- बड़ी गलती थी... फिल्म आदिपुरुष से जुड़े विवाद पर मुंतशिर ने स्वीकार किया कि उनसे बड़ी भूल हुई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए थी और किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था।
उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने बड़ी गलती के बावजूद उन्हें दोबारा स्वीकार किया, इसके लिए वे आभारी हैं। अब उनका प्रयास अपनी कलम और काम के माध्यम से देश के इतिहास और सम्मान को आगे बढ़ाना है।
मुंतशिर ने दावा किया कि भारतीय सिनेमा अब अपनी जड़ों और इतिहास की ओर लौट रहा है। आने वाले समय में भारतीय संस्कृति से जुड़ी कई बड़ी फिल्मों के आने की उम्मीद है।
अभद्र भाषा के बढ़ते चलन पर जताई नाराजगी... ओटीटी और फिल्मों में बढ़ती गालियों व अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारत में निराला, जयशंकर प्रसाद और दिनकर जैसे महान लेखक हुए हैं, ऐसे देश में लोगों का ध्यान खींचने के लिए गाली-गलौज का सहारा लेना उचित नहीं है।
कामकाजी महिलाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महिलाओं का बाहर निकलकर काम करना और देश के विकास में योगदान देना सकारात्मक बदलाव है। बच्चों की देखभाल में घरेलू मदद लेना गलत नहीं है। प्रेस वार्ता के अंत में मुंतशिर ने देश और जीवन के संघर्षों पर आधारित कविता भी सुनाई।
तटस्थ बने रहना एक तरह की कायरता
राजनीति पर सवाल पूछे जाने पर मुंतशिर ने कहा कि युवाओं का खुद को ‘अपोलिटिकल’ या न्यूट्रल बताना उचित नहीं है। उनके अनुसार 18 वर्ष की उम्र के बाद वोट देना या नोटा का विकल्प चुनना भी एक राजनीतिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर पूरी तरह तटस्थ बने रहना एक तरह की कायरता है।
उन्होंने युवाओं के आंदोलन और सरकार से सवाल पूछने के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन साथ ही आंदोलनों में मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन में असामाजिक या बाहरी तत्वों को फायदा नहीं उठाने देना चाहिए। देश का तिरंगा, संविधान और ‘वंदे मातरम’ का सम्मान सर्वोच्च होना चाहिए।
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